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Moradabad News: दम न घुटे इसलिए जेल सरीखे सींखचे का लगाया दरवाजा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 08 Apr 2025 02:04 AM IST
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To avoid suffocation, a prison-like door with bars was installed
मुरादाबाद। जेल के सरीखे सींखचे दरवाजे के पीछे एक कोठरी। जो कहने के लिए आठ बाई दस का कमरा है। बगल में नीचे से गल चुके टॉयलेट का दरवाजा। इनके बीच बदहाली की चुगली करती कमरे की टूटी फर्श। यहां न ताे धूप से मुलाकात होती है और न ही हवा से बात होती है। शहर की वक्फ की संपत्तियों में से एक जामा मस्जिद के नीचे बने कमरे में ऐसे हालात में 60 वर्षीय रईस अहमद परिवार के साथ रहते हैं।
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मजदूरी करने वाले रईस अहमद के छह दशक इस छोटे से घर में गुजर गए। इससे पहले उनके पिता छोटे खां रहते थे। रईस अहमद ने बताया कि उनकी पैदाइश इसी मकान की है। परिवार में दो बेटे और मूक बधिर पत्नी हैं। रईस ने बताया कि कमरे में धूप और हवा की व्यवस्था नहीं है, लिहाजा सरियों का दरवाजा लगाया है।
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शहर में मौजूद वक्फ संपत्तियों में कई मजदूरी पेशा लोग परिवार सहित कयाम करते हैं। अधिकांश की हालत ऐसी है कि उनके पास अनयत्र कहीं छत की गुंजाइश नहीं है। यही वजह है कि परेशानी के बाद भी उनका परिवार दो-तीन पीढि़यों से रहता आ रहा है। जामा मस्जिद क्षेत्र में छह दशक से अधिक समय से रह रहा एक परिवार ताजी हवा व धूप से महरूम है। वहीं सड़क ऊंची होने के बाद दुकान व मकान का फर्श ऊंचा करने पर छत इतनी नीची हो गई कि पंखा टांगना तक मुश्किल है। इन सब परेशानियों के बाद भी उन्हें वक्फ की संपत्ति से काफी लगाव है।
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वक्फ की दुकान में वर्ष 1995 से सीमेंट का कारोबार करते आ रहे मोहम्मद अय्यूब ने बताया कि जब उन्होंने दुकान किराये पर ली तो उस समय जामा मस्जिद क्षेत्र में चहल-पहल कम रहती थी। अब स्थित यह है कि सड़क पर जाम की स्थिति बनी रहती है। कई किरायेदारों ने बताया कि पहले जामा मस्जिद क्षेत्र की सड़क पांच दशक पहले काफी नीची थी। जो अब ऊंची हो गई है। जलभराव की समस्या से निजात के लिए कुछ लोगों ने अपनी दुकान व मकान के फर्श को ऊंचा तो कर लिया, लेकिन अब उनकी छत की ऊंचाई आठ फिट रह गई है। जिसके कारण वह लोग छत में पंखा टांगने तक से महरूम हैं।
एक युवा दुकानदार ने बताया कि उसकी नीचे दुकान व ऊपर मकान है। दोनों का 800-800 रुपये (कुल 1600 रुपये) किराया है। उसने बताया कि उसका जन्म वक्फ के ही किराये के मकान में हुआ है। कमेटी के लोगों से कभी कोई परेशानी नहीं हुई। कुछ माह पहले लिंटर की छत का प्लास्टर छूट रहा था। जिसे उसने खुद अपने पैसे से दुरुस्त करवा लिया। कमोवेश यही स्थित वक्फ संपत्ति में निवास व व्यवसाय करने वालों की है। नया कानून आने के बाद वह खुल कर तो नहीं बोल रहे लेकिन उनके माथे पर भविष्य की चिंता की लकीरें भी झलकती हैं।

किरायेदारों की मुख्य चिंताएं

- किरायेदारी की वैधता पर सवालः नए कानून के तहत, वक्फ बोर्डों को संपत्तियों की पुनः जांच और स्वामित्व की पुष्टि का अधिकार मिला है। इससे उन किरायेदारों की स्थिति अनिश्चित हो गई है जिनके पास वक्फ बोर्ड से स्वीकृत लीज या किरायेदारी अनुबंध नहीं हैं।

- किराया बढ़ोतरी और लीज नवीनीकरण में कठिनाई: लोगों को चिंता है कि वक्फ बोर्ड अब बाजार दर के अनुसार किराया बढ़ा सकता है और लीज़ नवीनीकरण की प्रक्रिया को जटिल बना सकता है, जिससे किरायेदारों पर आर्थिक दबाव बढ़ सकता है।


- कानूनी विवादों में वृद्धिः वक्फ संपत्तियों में रहने वालों को भय है कि स्वामित्व और प्रबंधन में बदलाव के कारण, किरायेदारों को कानूनी विवादों का सामना करना पड़ सकता है। जिससे उनकी स्थिति कमजोर हो सकती है।
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