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Moradabad News: 33 साल में पहली बार जिला अस्पताल में हुई थायराइड की सर्जरी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Fri, 24 Jul 2026 02:17 AM IST
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Thyroid surgery performed at the district hospital for the first time in 33 years.
मुरादाबाद। 33 साल में पहली बार जिला अस्पताल के ईएनटी विभाग में बृहस्पतिवार को एक मरीज की थायराइड की सर्जरी हुई। मेडिकल साइंस की भाषा में इसे हेमी थायरोडेक्टॉमी कहा जा रहा है। निजी अस्पताल में इसका खर्च 80 हजार से एक लाख रुपये तक आता है। वहीं बृहस्पतिवार को जिला अस्पताल में डॉक्टरों ने 14 साल की रहनुमा के गले की यह जटिल सर्जरी निशुल्क की और थायराइड ग्रंथी का अतिरिक्त हिस्सा काटकर निकाला गया।
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पिछले करीब दो वर्षों से मरीज गले में बढ़ती हुई गांठ की समस्या से परेशान थी। समय के साथ गांठ का आकार बढ़ता गया, जिससे उसे खाना निगलने में दिक्कत होने लगी और कई बार भोजन गले में फंस जाता था। परिजनों ने कई निजी अस्पतालों में इलाज कराया, लेकिन महंगे ऑपरेशन के कारण इलाज कराना आसान नहीं था। इसके बाद वह जिला अस्पताल पहुंचे, जहां विशेषज्ञ डॉक्टरों ने जांच के बाद सर्जरी का निर्णय लिया।
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दो दिन तक भर्ती रखने और आवश्यक जांच पूरी करने के बाद बृहस्पतिवार को ईएनटी सर्जन डॉ. विपुल कुशवाहा और एनेस्थेटिस्ट डॉ. प्रदीप शर्मा की टीम ने सफलतापूर्वक ऑपरेशन किया। सर्जरी के दौरान थायराइड ग्रंथि का प्रभावित हिस्सा निकाल दिया गया। निकाली गई गांठ को कैंसर या अन्य गंभीर बीमारी की पुष्टि के लिए मेरठ मेडिकल कॉलेज भेजा गया है। डॉक्टरों के अनुसार यदि समय रहते यह ऑपरेशन नहीं किया जाता तो भविष्य में गांठ के कैंसर में बदलने का खतरा भी हो सकता था।
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इसलिए जटिल होती है थायराइड की सर्जरी
ईएनटी सर्जन डॉ. विपुल कुशवाहा का कहना है कि थायराइड की सर्जरी ईएनटी विभाग की सबसे जटिल सर्जरियों में मानी जाती है। थायराइड ग्रंथि के आसपास आवाज नियंत्रित करने वाली नसें और शरीर के लिए महत्वपूर्ण रक्त वाहिकाएं होती हैं। ऑपरेशन के दौरान अत्यधिक रक्तस्राव, नसों को नुकसान या अन्य जटिलताओं का खतरा बना रहता है।


वर्जन
आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को इलाज के लिए महंगे निजी अस्पतालों का सहारा नहीं लेना पड़ेगा। इससे न केवल मरीजों का लाखों रुपये का खर्च बचेगा, बल्कि जिले में सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा भी मजबूत होगा।
- डॉ. प्रदीप वार्ष्णेय, एसआईसी
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