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Moradabad News: अपात्र गटक रहे गरीबों के निवाले

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 08 Jul 2024 06:56 AM IST
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The undeserving are gulping down the morsels of the poor.
मुरादाबाद। गरीबों के लिए संचालित सरकार की मुफ्त राशन योजना का लाभ जिले के साधन संपन्न लोग भी ले रहे हैं। राशनकार्ड धारकों की बायोमेट्रिक केवाईसी से खुलासा हुआ है कि बड़ी संख्या में जीएसटी भरने वाले, शस्त्रधारी और चार पहिया वाहन से चलने वाले लोग भी राशन ले रहे हैं। कई ऐसे लोग जिनका निधन हो चुका है, लेकिन उनके परिजन उनके नाम पर मुफ्त राशन ले रहे हैं। ऐसी युवतियां जिनकी शादी हो चुकी है और वे ससुराल चली गई हैं, उनके नाम पर भी राशन लिया जा रहा है। शासन के निर्देश पर राशनकार्ड धारकों के बायोमेट्रिक सत्यापन के दौरान कई चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं।
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केस-01

कटघर के मोहल्ला सिम्मन हजारी में कोटे की दुकान से 906 राशनकार्ड धारक और उससे 4800 उपभोक्ता जुड़े हैं। कोटेदार महिपाल सिंह ने बताया अब तक 20 फीसदी उपभोक्ताओं की केवाईसी की जा चुकी है। बायोमेट्रिक सत्यापन में पाया गया कि कार्ड पर उपभोक्ता के रूप में दर्ज 22 लोगों का निधन हो चुका है। पांच युवतियों की शादी हो चुकी है और दो लोग सरकारी नौकरी कर रहे हैं। सात उपभोक्ता संपन्न हैं और जीएसटी देते हैं। उनका 200-300 वर्ग मीटर का पक्का मकान भी है।
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केस-02
मोहल्ला सरस्वती विहार में 600 राशनकार्ड वाली कोटे की दुकान से करीब 3000 उपभोक्ता (यूनिट) जुड़े हैं। शासनादेश के तहत प्रति यूनिट पांच किलो की दर से मुफ्त खाद्यान्न दिया जाता है। यहां अब तक 200 यूनिट का सत्यापन किया जा चुका है। जिसमें 14 लोगों का निधन हो चुका है। 55 युवतियों की शादी हो चुकी है। तीन राशनकार्ड धारक परिवारों के पास कार है और तीन उपभोक्ता शस्त्र लाइसेंस धारक हैं। एक उपभोक्ता जीएसटी भरने वाला है। शासनादेश के मुताबिक इन सबके नाम राशनकार्ड में नहीं होने चाहिए।
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ये आंकड़े शहर की सिर्फ दो दुकानों के हैं। यही स्थिति जिले भर में 1239 कोटेदारों द्वारा किए जा रहे सत्यापन के दौरान देखने को मिल रही है। जिले में 5.50 लाख राशनकार्ड धारक हैं। इनमें 30090 अंत्योदय (गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले) तथा शेष पात्र गृहस्थी राशनकार्ड धारक हैं। इनसे जुड़े 22.90 लाख उपभोक्ता हैं। जिन्हें सरकार कोरोना काल के बाद से ही प्रति यूनिट पांच किलो मुफ्त खाद्यान्न उपलब्ध करा रही है। अभी तक जिले में कुल 22 फीसदी उपभोक्ताओं का ही सत्यापन हो सका है।
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2011 की जनगणना के आधार पर बने हैं राशनकार्ड
शासनादेश के मुताबिक शहर में रहने वाली आबादी के 64 फीसदी और ग्रामीण क्षेत्र में रहने वाले 79 फीसदी उपभोक्ताओं को ही राशनकार्ड से जोड़ा जा सकता है। जिले में जो राशनकार्ड बने हैं वे 2011 की जनगणना के आधार पर बने हैं। वर्ष 2016 में राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत राशनकार्ड बनाए गए हैं। उसके बाद से जनसंख्या में करीब 30 फीसदी वृद्धि हो चुकी है, लेकिन राशनकार्डों की संख्या नहीं बढ़ी है।

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शासन के निर्देश पर तीन महीने पहले भी उपभोक्ताओं से घोषणापत्र भरवाने का अभियान चलाया गया था। इसके तहत करीब 3000 उपभोक्ताओं का नाम निरस्त किया गया था। बायोमेट्रिक केवाईसी के माध्यम से 100 फीसदी पात्र उपभोक्ताओं का सत्यापन हो जाएगा। ये अभियान पूरे महीने चलेगा। इसके आधार पर जो नाम कम होंगे, उसके हिसाब से पात्र लोगों के राशनकार्ड बनाए जाएंगे।
- अजय प्रताप सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी
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