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Moradabad News: कड़ाके के ठंड और अपनों की चिंता बढ़ा रही अवसाद
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मुरादाबाद। कड़ाके की ठंड न सिर्फ शारीरिक बीमार ही नहीं वना रही, बल्कि यह लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर भी वार कर रही है। इसकी वजह से बिना किसी स्पष्ट कारण के उदासी और थकान महसूस होने लगती है। शीत अवसाद (विंटर डिप्रेशन) के मामले तेजी से बढ़ने लगे हैं। जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन आठ से दस मरीज अवसाद वाले आते हैं। इसमें तीन से चार मरीज शीत अवसाद वाले होते हैं।
जिला अस्पताल के क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट डॉ एस धनंजय कहते हैं कि प्रतिदिन करीब 60 से 65 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें से 10 नए मरीज अवसाद वाले होते हैं। अवसाद में भी दो तरीके के मरीज इस समय ज्यादा आ रहे हैं। एक तो पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से बढ़ने वाले तनाव से हुआ अवसाद होता है और दूसरा ठंड से होने वाला शीत अवसाद है। मरीजों में ज्यादा संख्या महिलाओं की होती है। कई बार परिवार के पालन पोषण की सामान्य चिंता अवसाद का रूप ले लेती है। इसकी वजह से मरीजों को दिनभर सुस्ती होती है या जरूरत से ज्यादा नींद आती है।
स्वभाव में चिड़चिड़ापन और किसी काम में मन न लगना, बार-बार नकारात्मक विचार आना या अकेले रहने की इच्छा। मीठा और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने की इच्छा बढ़ना भी अवसाद के लक्षणों में शामिल है।
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ध्यान रखने योग्य प्रमुख बिंदु
परिजनों से संवाद जरूरी है, परिवार और दोस्तों से बात करें, अकेलेपन से बचें।
20 से 30 मिनट तक धूप में बैठें।
घर में ही व्यायाम या योग करें।
वर्जन
यदि उदासी गहरी हो रही हो, तो तुरंत जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग में परामर्श लें। सर्दियों में होने वाला यह अवसाद एक मेडिकल कंडीशन है। सही समय पर परामर्श और जीवनशैली में बदलाव से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। एक घंटा धूप में रहें। अगर धूप नहीं है तो घर में ही सक्रियता बढ़ाएं।
डॉ एस धनंजय, क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट
जिला अस्पताल के क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट डॉ एस धनंजय कहते हैं कि प्रतिदिन करीब 60 से 65 मरीजों की ओपीडी होती है। इसमें से 10 नए मरीज अवसाद वाले होते हैं। अवसाद में भी दो तरीके के मरीज इस समय ज्यादा आ रहे हैं। एक तो पारिवारिक परिस्थितियों की वजह से बढ़ने वाले तनाव से हुआ अवसाद होता है और दूसरा ठंड से होने वाला शीत अवसाद है। मरीजों में ज्यादा संख्या महिलाओं की होती है। कई बार परिवार के पालन पोषण की सामान्य चिंता अवसाद का रूप ले लेती है। इसकी वजह से मरीजों को दिनभर सुस्ती होती है या जरूरत से ज्यादा नींद आती है।
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स्वभाव में चिड़चिड़ापन और किसी काम में मन न लगना, बार-बार नकारात्मक विचार आना या अकेले रहने की इच्छा। मीठा और ज्यादा कार्बोहाइड्रेट वाला भोजन करने की इच्छा बढ़ना भी अवसाद के लक्षणों में शामिल है।
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ध्यान रखने योग्य प्रमुख बिंदु
परिजनों से संवाद जरूरी है, परिवार और दोस्तों से बात करें, अकेलेपन से बचें।
20 से 30 मिनट तक धूप में बैठें।
घर में ही व्यायाम या योग करें।
वर्जन
यदि उदासी गहरी हो रही हो, तो तुरंत जिला अस्पताल के मानसिक स्वास्थ्य विभाग में परामर्श लें। सर्दियों में होने वाला यह अवसाद एक मेडिकल कंडीशन है। सही समय पर परामर्श और जीवनशैली में बदलाव से इसे आसानी से ठीक किया जा सकता है। एक घंटा धूप में रहें। अगर धूप नहीं है तो घर में ही सक्रियता बढ़ाएं।
डॉ एस धनंजय, क्लिनिकल साइक्लोजिस्ट