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Moradabad News: बुनियादी सुविधाओं को भी तरस रही आबादी, अंधेरा, गंदगी और मच्छरों का आतंक
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मुरादाबाद। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बनी शाहपुर तिगड़ी कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवार बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं। कॉलोनी के लोगों ने निगम से लेकर महापौर कार्यालय तक बार-बार गुहार लगाई लेकिन अब तक उनकी समस्याओं का निस्तारण नहीं हुआ है। नतीजे के रूप में कॉलोनी के लोगों को बिना स्ट्रीट लाइट और गंदगी के बीच ही रहना पड़ रहा है।
कॉलोनी के लोगों का कहना है कि यहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। रात में घना अंधेरा होने से चोरी, आपराधिक घटनाओं, सांप निकलने एवं अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। स्थानीय निवासी रेवाधर भगत ने बताया कि कॉलोनी में अब लगभग 788 लोग स्थायी रूप से रह रहे हैं लेकिन स्ट्रीट लाइट न होने से रात का समय बेहद असुरक्षित हो जाता है।
उनका कहना है कि सिर्फ रोशनी की ही समस्या नहीं बल्कि कॉलोनी मूलभूत सेवाओं से भी वंचित है। पिछले वर्ष जनवरी के महीने में ही एमडीए ने इस कॉलोनी को नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया था। इसके बावजूद सफाई, सीवर और कूड़ा उठान जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई नहीं होने से गंदगी और बदबू फैलती रहती है। सड़क और गलियों में कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं। वहीं एंटी लार्वा आदि का छिड़काव भी कभी नहीं किया जाता है जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। शिकायत करने पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने के बाद नगर निगम के कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए कॉलोनी में आते हैं। कुछ देर के लिए आकर फोटो खींचकर चले जाते हैं लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
क्या बोले पीड़ित
कॉलोनी में करीब आठ सौ लोग रहते हैं। लेकिन न तो रोशनी की व्यवस्था है और न ही कोई अन्य सुविधाएं। महिलाओं और बच्चों को शाम के बाद घर से बाहर जाने देने पर भी डर लगा रहता है। - उत्कर्ष गुप्ता
कभी भी सफाई नहीं होती है। गंदा पानी सड़कों पर बहता है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। शिकायत करने के बावजूद कुछ असर नहीं होता है। - गौरव सक्सेना
सड़क व गलियों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। नियमित कूड़ा उठान नहीं हो रहा है। बदबू और गंदगी से बच्चे बीमार हो रहे हैं। अधिकारियों और महापौर सबसे शिकायत की जा चुकी है। - मोहित सारस्वत
कॉलोनी में कोई भी पार्क नहीं है। न तो बच्चों को खेलने के लिए मैदान मिलता है न बुजुर्गों को टहलने के लिए कोई जगह। जबकि कहा गया था कि कॉलोनी में पार्क बनाया जाएगा। - राजीव शर्मा
दवाओं का छिड़काव नहीं होता है। मच्छरों का पूरी कॉलोनी में आतंक है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर हमेशा बना रहता है। छोटे बच्चे अक्सर बुखार की चपेट में आ जाते हैं। - राम अग्रवाल
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कॉलोनी के लोगों का कहना है कि यहां प्रकाश की कोई व्यवस्था नहीं है। रात में घना अंधेरा होने से चोरी, आपराधिक घटनाओं, सांप निकलने एवं अन्य दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है। स्थानीय निवासी रेवाधर भगत ने बताया कि कॉलोनी में अब लगभग 788 लोग स्थायी रूप से रह रहे हैं लेकिन स्ट्रीट लाइट न होने से रात का समय बेहद असुरक्षित हो जाता है।
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उनका कहना है कि सिर्फ रोशनी की ही समस्या नहीं बल्कि कॉलोनी मूलभूत सेवाओं से भी वंचित है। पिछले वर्ष जनवरी के महीने में ही एमडीए ने इस कॉलोनी को नगर निगम को हस्तांतरित कर दिया था। इसके बावजूद सफाई, सीवर और कूड़ा उठान जैसी बुनियादी व्यवस्थाएं भी अब तक शुरू नहीं हो पाई हैं।
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स्थानीय लोगों का कहना है कि नालियों की सफाई नहीं होने से गंदगी और बदबू फैलती रहती है। सड़क और गलियों में कूड़े के ढेर पड़े रहते हैं। वहीं एंटी लार्वा आदि का छिड़काव भी कभी नहीं किया जाता है जिससे बीमारियों का खतरा बना रहता है। शिकायत करने पर भी समस्या जस की तस बनी हुई है। लोगों का आरोप है कि जनसुनवाई पोर्टल पर शिकायत करने के बाद नगर निगम के कर्मचारी सिर्फ औपचारिकता निभाने के लिए कॉलोनी में आते हैं। कुछ देर के लिए आकर फोटो खींचकर चले जाते हैं लेकिन स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाता।
क्या बोले पीड़ित
कॉलोनी में करीब आठ सौ लोग रहते हैं। लेकिन न तो रोशनी की व्यवस्था है और न ही कोई अन्य सुविधाएं। महिलाओं और बच्चों को शाम के बाद घर से बाहर जाने देने पर भी डर लगा रहता है। - उत्कर्ष गुप्ता
कभी भी सफाई नहीं होती है। गंदा पानी सड़कों पर बहता है। बरसात के दिनों में हालात और भी बदतर हो जाते हैं। शिकायत करने के बावजूद कुछ असर नहीं होता है। - गौरव सक्सेना
सड़क व गलियों में कूड़े के ढेर लगे हुए हैं। नियमित कूड़ा उठान नहीं हो रहा है। बदबू और गंदगी से बच्चे बीमार हो रहे हैं। अधिकारियों और महापौर सबसे शिकायत की जा चुकी है। - मोहित सारस्वत
कॉलोनी में कोई भी पार्क नहीं है। न तो बच्चों को खेलने के लिए मैदान मिलता है न बुजुर्गों को टहलने के लिए कोई जगह। जबकि कहा गया था कि कॉलोनी में पार्क बनाया जाएगा। - राजीव शर्मा
दवाओं का छिड़काव नहीं होता है। मच्छरों का पूरी कॉलोनी में आतंक है। डेंगू और मलेरिया जैसी बीमारियों का डर हमेशा बना रहता है। छोटे बच्चे अक्सर बुखार की चपेट में आ जाते हैं। - राम अग्रवाल