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Moradabad News: ऑनलाइन कारोबार की मार... पांच साल में आधा रह गया कपड़ा व्यापार
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मुरादाबाद। ऑनलाइन खरीदारी के बढ़ते चलन और ग्राहकों की घटती खरीद क्षमता की वजह से पिछले पांच साल में कपड़ों का कारोबार करीब 50 प्रतिशत तक घट गया। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि जिले में रिटेल की करीब 150 दुकानें बंद हो चुकी हैं। जिससे थोक कारोबार प्रभावित हुआ है। कारोबार घटने के कारण थोक व्यापारियों को लगभग चार हजार कर्मचारियों की छंटनी भी करनी पड़ी। कई पुराने कारोबारी अपना दशकों पुराना व्यवसाय बंद कर दूसरे काम करने को मजबूर हो गए हैं।
गंज बाजार, कोठीवाल नगर, चौमुखापुल, मालवीय नगर, गलशहीद, इंदिरा चौक, मंडी चौक, ईदगाह, भट्ठी मोहल्ला और बुध बाजार में करीब एक हजार थोक कपड़ा कारोबारी हैं। यहां से चंदौसी, बिलारी, कुंदरकी, भोजपुर, कांठ, रामपुर, मिलक, बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में रिटेल व्यापारियों को रेडीमेड और सिले हुए कपड़ों की आपूर्ति की जाती है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कम कीमत और घर बैठे डिलीवरी की सुविधा मिलने से स्थानीय बाजारों में बिक्री लगातार घट रही है। इसका सीधा असर थोक कारोबारियों के ऑर्डर पर पड़ रहा है।
संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक कत्याल ने बताया कि पिछले पांच साल में जिले के करीब 150 रिटेलर दुकानें बंद कर चुके हैं। कई छोटे दुकानदारों ने थोक बाजार से माल मंगाना ही बंद कर दिया है। पहले जिन प्रतिष्ठानों में आठ से 10 कर्मचारी काम करते थे, वहां अब दो या तीन कर्मचारी ही रह गए हैं। थोक व्यापारियों को लगभग चार हजार कर्मचारियों की छंटनी भी करनी पड़ी। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में और भी व्यापारी कारोबार समेटने को मजबूर होंगे।
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चौमुखापुल पर फड़ लगाकर कारोबार कर रहे अजीत सहगल बताते हैं कि उनकी यहां करीब 20 साल पुरानी रेडीमेड कपड़ों की दुकान थी। लगातार बिक्री घटने और घाटा बढ़ने के कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। इसी तरह कारोबारी लवी ढल ने भी नुकसान के चलते अपनी रेडीमेड कपड़ों की दुकान बंद कर दी। वहीं वैरायटी रेडीमेड के संचालक को एक साल में करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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कपड़ा कारोबारी बोले
-पिछले पांच साल में मुझे करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भोजपुर, बिलारी, कांठ और नूरपुर के करीब 20 रिटेलरों ने दुकानें बंद कर दी हैं। इससे थोक कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। ऑनलाइन कारोबार के कारण बिक्री में 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। -दीपक कत्याल, कपड़ा कारोबारी
-ऑनलाइन कारोबार के कारण पिछले पांच वर्षों में कारोबार आधा रह गया है। कई ग्राहक दुकान पर कपड़ा पसंद करते हैं, लेकिन ऑनलाइन कीमत देखने के बाद खरीदारी नहीं करते। इससे बिक्री लगातार प्रभावित हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में कारोबार और घट जाएगा। -कुश मेहंदीरत्ता, कपड़ा कारोबारी
-ऑनलाइन कारोबार ने पारंपरिक व्यापार को चौपट कर दिया है। कीमतें कम करने के बावजूद ग्राहक नहीं आ रहे हैं। दुकानदार टैक्स और अन्य खर्च उठाते हैं। लगातार बिक्री घटती जा रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। -रितेश कुमार विग, कपड़ा कारोबारी
-हर साल कपड़ा कारोबार घट रहा है। पहले जितना कारोबार आसानी से हो जाता था। अब आठ से 10 लाख रुपये की बिक्री करना भी मुश्किल हो गया है। कई व्यापारियों ने कपड़े का कारोबार छोड़कर दूसरे व्यवसाय शुरू कर दिए हैं। ऑनलाइन बिक्री पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। -पंकज विग, कपड़ा कारोबारी
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गंज बाजार, कोठीवाल नगर, चौमुखापुल, मालवीय नगर, गलशहीद, इंदिरा चौक, मंडी चौक, ईदगाह, भट्ठी मोहल्ला और बुध बाजार में करीब एक हजार थोक कपड़ा कारोबारी हैं। यहां से चंदौसी, बिलारी, कुंदरकी, भोजपुर, कांठ, रामपुर, मिलक, बिलासपुर और आसपास के क्षेत्रों में रिटेल व्यापारियों को रेडीमेड और सिले हुए कपड़ों की आपूर्ति की जाती है। कपड़ा व्यापारियों का कहना है कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर कम कीमत और घर बैठे डिलीवरी की सुविधा मिलने से स्थानीय बाजारों में बिक्री लगातार घट रही है। इसका सीधा असर थोक कारोबारियों के ऑर्डर पर पड़ रहा है।
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संयुक्त व्यापार मंडल उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ उपाध्यक्ष दीपक कत्याल ने बताया कि पिछले पांच साल में जिले के करीब 150 रिटेलर दुकानें बंद कर चुके हैं। कई छोटे दुकानदारों ने थोक बाजार से माल मंगाना ही बंद कर दिया है। पहले जिन प्रतिष्ठानों में आठ से 10 कर्मचारी काम करते थे, वहां अब दो या तीन कर्मचारी ही रह गए हैं। थोक व्यापारियों को लगभग चार हजार कर्मचारियों की छंटनी भी करनी पड़ी। उनका कहना है कि यदि यही स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में और भी व्यापारी कारोबार समेटने को मजबूर होंगे।
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चौमुखापुल पर फड़ लगाकर कारोबार कर रहे अजीत सहगल बताते हैं कि उनकी यहां करीब 20 साल पुरानी रेडीमेड कपड़ों की दुकान थी। लगातार बिक्री घटने और घाटा बढ़ने के कारण उन्हें दुकान बंद करनी पड़ी। इसी तरह कारोबारी लवी ढल ने भी नुकसान के चलते अपनी रेडीमेड कपड़ों की दुकान बंद कर दी। वहीं वैरायटी रेडीमेड के संचालक को एक साल में करीब 10 लाख रुपये का नुकसान हुआ है।
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कपड़ा कारोबारी बोले
-पिछले पांच साल में मुझे करीब एक करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। भोजपुर, बिलारी, कांठ और नूरपुर के करीब 20 रिटेलरों ने दुकानें बंद कर दी हैं। इससे थोक कारोबार पर बड़ा असर पड़ा है। ऑनलाइन कारोबार के कारण बिक्री में 50 प्रतिशत तक गिरावट आई है। -दीपक कत्याल, कपड़ा कारोबारी
-ऑनलाइन कारोबार के कारण पिछले पांच वर्षों में कारोबार आधा रह गया है। कई ग्राहक दुकान पर कपड़ा पसंद करते हैं, लेकिन ऑनलाइन कीमत देखने के बाद खरीदारी नहीं करते। इससे बिक्री लगातार प्रभावित हो रही है। यदि यही स्थिति रही तो आने वाले समय में कारोबार और घट जाएगा। -कुश मेहंदीरत्ता, कपड़ा कारोबारी
-ऑनलाइन कारोबार ने पारंपरिक व्यापार को चौपट कर दिया है। कीमतें कम करने के बावजूद ग्राहक नहीं आ रहे हैं। दुकानदार टैक्स और अन्य खर्च उठाते हैं। लगातार बिक्री घटती जा रही है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म से मुकाबला करना मुश्किल हो गया है। -रितेश कुमार विग, कपड़ा कारोबारी
-हर साल कपड़ा कारोबार घट रहा है। पहले जितना कारोबार आसानी से हो जाता था। अब आठ से 10 लाख रुपये की बिक्री करना भी मुश्किल हो गया है। कई व्यापारियों ने कपड़े का कारोबार छोड़कर दूसरे व्यवसाय शुरू कर दिए हैं। ऑनलाइन बिक्री पर सरकार को रोक लगानी चाहिए। -पंकज विग, कपड़ा कारोबारी