{"_id":"5aa04fe94f1c1b45438b5d5d","slug":"the-children-coming-into-the-grip-of-the-virus","type":"story","status":"publish","title_hn":"बच्चों को सता रहा रेस्पिरेटर सिंक्शियल वायरस","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
बच्चों को सता रहा रेस्पिरेटर सिंक्शियल वायरस
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Thu, 08 Mar 2018 02:17 AM IST
विज्ञापन
वायरस की चपेट में आ रहे बच्चे
- फोटो : net image
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ठंड का मौसम समाप्त होने के बाद गर्मी शुरू हो गई है। लेकिन मौसम के संक्रमण का दौर है। बदलते तापमान के अनुसार हमारी शरीर अभी तापमान के अनुसार ढल नहीं पा रहा है। यही कारण है कि इन दिनों लोग अधिक बीमार पड़ रहे हैं। बदलते तापमान का सबसे अधिक दुष्प्रभाव बच्चों पर पड़ रहा है। बच्चे इन दिनों रेस्पिरेटर सिंक्शियल (आरएसवी) की गिरफ्त में बड़ी आसानी से आ रहे हैं। इससे बच्चों को बुखार, खांसी, जुकाम के साथ ही निमोनिया हो रहा है।
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और बाल रोेग विशेषज्ञ डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि इन दिनों अस्पताल में बीमार बच्चे अधिक संख्या में आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे आरएसवी या रोटा वायरस की गिरफ्त में हैं। आरएसवी से बच्चों को वायरल निमोनिया हो जाता है वहीं रोटा वायरस से बच्चे डायरिया से पीड़ित हो रहे हैं।
उन्हाेंने बताया कि बदलते मौसम और तापमान के कारण यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। यह वायरस शून्य से पांच साल के बच्चों पर अटैक करते हैं। बच्चों को बुखार, खांसी जुकाम या दस्त होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। लापरवाही बरतने पर बच्चे निमोनिया से पीड़ित हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों का खास ध्यान रखने की जरूरत है। बच्चों को अभी ठंड से बचाने की जरूरत है।
विज्ञापन
विज्ञापन
जिला अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और बाल रोेग विशेषज्ञ डा. राजेंद्र कुमार ने बताया कि इन दिनों अस्पताल में बीमार बच्चे अधिक संख्या में आ रहे हैं। इनमें से अधिकांश बच्चे आरएसवी या रोटा वायरस की गिरफ्त में हैं। आरएसवी से बच्चों को वायरल निमोनिया हो जाता है वहीं रोटा वायरस से बच्चे डायरिया से पीड़ित हो रहे हैं।
विज्ञापन
उन्हाेंने बताया कि बदलते मौसम और तापमान के कारण यह वायरस अधिक सक्रिय हो जाते हैं। यह वायरस शून्य से पांच साल के बच्चों पर अटैक करते हैं। बच्चों को बुखार, खांसी जुकाम या दस्त होने पर तुरंत डाक्टर को दिखाना चाहिए। लापरवाही बरतने पर बच्चे निमोनिया से पीड़ित हो सकते हैं। ऐसे में बच्चों का खास ध्यान रखने की जरूरत है। बच्चों को अभी ठंड से बचाने की जरूरत है।
विज्ञापन