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टांडा की पांच लाख आबादी का जिला मुख्यालय से संपर्क कटा, अस्थाई पुल टूटना शुरू
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टांडा (रामपुर)। बारिश का मौसम शुरू होते ही टांडा के लोगों की मुसीबतें बढ़ जाती हैं। दरअसल लालपुर में कोसी नदी पर स्थायी पुल न होने से ऐसी समस्या निर्मित होती है। अब मानसून की दस्तक के साथ ही कोसी नदी पर बने अस्थाई पुल को हटाया जा रहा है। इसी के साथ एक बार फिर टांडा का जिला मुख्यालय से संपर्क कट गया। अब टांडा क्षेत्र के करीब पांच लाख लोगों को रामपुर आने जाने के लिए 30 से 40 किलोमीटर की अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ेगी, जिससे लोगों पर खर्च का बोझ बढ़ जाएगा। अब दैनिक यात्री और स्थानीय लोग अपनी जान की परवाह किए बिना नदी पार कर रहे हैं।
टांडा तहसील के ग्राम लालपुर स्थित कोसी नदी पर रियासत काल में वर्ष 1932 में 490.25 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया गया था, जिससे लोगों को आवागमन में सहूलियत मिल सके। वक्त गुजरने के साथ पुल जर्जर हो गया। वर्ष 1975 में पुल से भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। वर्ष 2014 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कोसी नदी पर नए पुल के निर्माण को मंजूरी दिलाई। इसके बाद पुल के निर्माण का कार्य 20 मार्च 2016 से शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2017 में सूबे में सरकार बदल गई, जिसके बाद पुल का निर्माण कार्य बंद हो गया। वर्ष 2020 में रामपुर आए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फिर से पुल के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया और रिवाइज एस्टीमेट को मंजूरी दी। जिसके बाद सरकार ने शेष धनराशि 34.35 करोड़ रुपये भी जारी कर दी। पिछले साल ही पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो मार्च 2023 तक पूरा होना है।
वहीं, स्थाई पुल न होने के चलते प्रशासन द्वारा लोगों के आवागमन के लिए कोसी नदी पर अस्थाई पुल बना दिया जाता है, किंतु मानसून के चलते 15 जून से अस्थाई पुल को हटा दिया जाता है, जिसके बाद क्षेत्र के करीब पांच लाख लोगों का सीधे तौर पर जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। वैकल्पिक मार्गों के सहारे 30 से 40 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर जिला मुख्यालय पहुंचा जा सकता है। शुक्रवार को कोसी नदी पर बने बने अस्थाई पुल को हटाने का काम शुरू हो गया। इस काम में करीब दो दिन का समय लगेगा।
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टांडा तहसील के ग्राम लालपुर स्थित कोसी नदी पर रियासत काल में वर्ष 1932 में 490.25 मीटर लंबे पुल का निर्माण कराया गया था, जिससे लोगों को आवागमन में सहूलियत मिल सके। वक्त गुजरने के साथ पुल जर्जर हो गया। वर्ष 1975 में पुल से भारी वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया था। वर्ष 2014 में तत्कालीन नगर विकास मंत्री मोहम्मद आजम खां ने कोसी नदी पर नए पुल के निर्माण को मंजूरी दिलाई। इसके बाद पुल के निर्माण का कार्य 20 मार्च 2016 से शुरू हुआ था, लेकिन वर्ष 2017 में सूबे में सरकार बदल गई, जिसके बाद पुल का निर्माण कार्य बंद हो गया। वर्ष 2020 में रामपुर आए उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने फिर से पुल के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया और रिवाइज एस्टीमेट को मंजूरी दी। जिसके बाद सरकार ने शेष धनराशि 34.35 करोड़ रुपये भी जारी कर दी। पिछले साल ही पुल का निर्माण कार्य शुरू हुआ था, जो मार्च 2023 तक पूरा होना है।
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वहीं, स्थाई पुल न होने के चलते प्रशासन द्वारा लोगों के आवागमन के लिए कोसी नदी पर अस्थाई पुल बना दिया जाता है, किंतु मानसून के चलते 15 जून से अस्थाई पुल को हटा दिया जाता है, जिसके बाद क्षेत्र के करीब पांच लाख लोगों का सीधे तौर पर जिला मुख्यालय से संपर्क कट जाता है। वैकल्पिक मार्गों के सहारे 30 से 40 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर जिला मुख्यालय पहुंचा जा सकता है। शुक्रवार को कोसी नदी पर बने बने अस्थाई पुल को हटाने का काम शुरू हो गया। इस काम में करीब दो दिन का समय लगेगा।
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