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स्कूल में छात्राओं को परीक्षा से रोका, अभिभावकों ने किया हंगामा
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कपनी बाग स्थित सेंट मेरी सीनियर सेकेंडरी स्कूल में बच्चो की फीस नही जमा होने से परीक्षा देने से र?
- फोटो : CITY
मुरादाबाद। सेंट मेरीज सीनियर सेकेंड्री स्कूल कंपनी बाग में बुधवार को स्कूल प्रशासन ने फीस के लिए करीब 25 छात्राओं को परीक्षा में बैठने से रोक दिया। सूचना पाकर स्कूल पहुंचे अभिभावकों की शिक्षकों से खूब नोंकझोंक हुई। अभिभावकों का आरोप है कि छात्राओं ने रोते हुए फोन किया था। कुछ अभिभावकों ने बताया कि छह से नौ माह तक फीस जमा है, इसके बावजूद स्कूल प्रशासन मनमानी कर रहा है। प्रधानाचार्य का कहना है कि अभिभावकों ने पहले आकर समस्या को नहीं बताया था, इसलिए छात्राओं को रोका था। वहीं शिक्षकों ने अभिभावकों पर अभद्रता करने का आरोप लगाया।
बुधवार सुबह प्रतिदिन की तरह छात्राएं परीक्षा देने के लिए स्कूल आईं थीं, लेकिन शिक्षिकाओं ने 25 छात्राओं को परीक्षा में नहीं बैठने दिया। अभिभावकों का कहना है कि छात्राओं ने रोते हुए अभिभावकों को स्कूल के फैसले से अवगत कराया तो वह जिस हालत में थे, उसी हालात में स्कूल पहुंचे। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि छह से नौ माह तक की फीस जमा होने के बावजूद छात्राओं को रोका जा रहा है। शिक्षिकाओं से वार्ता करने पर वह पुलिस बुलाने की धमकी देती हैं। जब अभिभावकों ने मार्च माह में पूरे साल की फीस जमा करने का लिखित में आश्वासन दिया, तब उनकी बेटियों को परीक्षा कक्ष में भेजा गया।
फीस में नहीं है कोई छूट
अभिभावकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में उनके व्यापार चौपट हो गए हैं। इसकी वजह से वह आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं। शिक्षिकाएं एक साथ पूरे साल की फीस जमा करने को कह रही हैं, लेकिन फीस में कोई छूट नहीं दे रही हैं। यदि उनके पास समस्या नहीं होती तो वह पहले ही फीस जमा कर चुके होते। अब एक साथ पूरे साल की फीस भरना उनके लिए बहुत मुश्किल है। अभिभावक संघ के सदस्य रासु ठाकुर ने कुछ माह की फीस में छूट देने की मांग की तो स्कूल प्रशासन ने फीस में छूट देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
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वर्जन...
मैं मशीन पर काम कर रहा था। मेरी बेटी ने रोते हुए मुझे फोन किया था। मैंने अपनी बेटी की छह माह की फीस जमा की है। बुधवार को गणित विषय की परीक्षा थी। फीस जमा करने का आश्वासन देने के बाद उसे परीक्षा में बैठाया है।
- सुरेंद्र सिंह, अभिभावक
मेरी बेटी की नौ माह की फीस जमा थी। इसके बावजूद उसे परीक्षा में बैठने से रोक दिया था। अब मैंने पूरे वर्ष की फीस जमा की है। इसके बाद मेरी बेटी को परीक्षा में बैठने दिया है। जब मैंने शिक्षिकाओं से बात की तो उन्होंने पुलिस बुलाकर मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी।
- अमित गुप्ता, अभिभावक
मेरी जुड़वा बेटियां कक्षा सात में पढ़ती हैं। मेरी बेटी की पहले तीन माह की फीस जमा थी। मंगलवार को मैंने छह माह की फीस जमा की थी। अब तक कुल नौ माह की फीस जमा हो चुकी है। मंगलवार की फीस को उन्होंने अपने सिस्टम पर अपडेट नहीं किया था और मेरी बेटियों को परीक्षा से रोक दिया। स्कूल आकर जब मैंने उन्हें जानकारी दी, तब परीक्षा में बैठाया है।
- अशोक कुमार, अभिभावक
मेरी बेटी कक्षा सात में है। उसकी अब तक की छह माह की फीस जमा है। उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। इसकी वजह से वह रो रही थी। स्कूल में मैंने लिखित में मार्च माह में फीस जमा करने का आश्वासन दिया है, तब परीक्षा में बैठने दिया है। स्कूल को कुछ फीस माफ करनी चाहिए।
- विकास दिवाकर, अभिभावक
मेरी कपड़े की दुकान है। लॉकडाउन और उसके बाद भी काम ठप रहा था। अब ग्राहक आना शुरू हुए थे तो अन्य लोगों के रुपये दिए हैं। इसलिए एक भी महीने की फीस नहीं जमा कर पाया था। सुबह जब मैं साढ़े आठ बजे अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने आया था तब गेटकीपर ने दोपहर एक बजे तक फीस जमा करने की बात कही थी। बाद में बेटी ने फोन पर उसे परीक्षा में न बैठने की जानकारी दी। अब मार्च माह में पूरे साल की फीस जमा करने का लिखित आश्वासन लिया है, तब उसे परीक्षा में बैठाया है।
- मोहम्मद सुहेल खान, अभिभावक।
यदि किसी अभिभावक को परेशानी है तो वह हमसे आकर मिल सकता है। मैं स्वयं अभिभावकों से मिलती हूं। कुछ अभिभावकों को फीस में मदद भी की है। ज्यादातर अभिभावक पूरे साल में हमसे नहीं मिले हैं, इसलिए छात्राओं को रोका था। बाद में सभी को परीक्षा में बैठाया है। अभिभावक समूह में आकर हंगामा कर रहे थे। अपनी और अन्य शिक्षिकाओं की सुरक्षा के लिए मैंने पुलिस को फोन किया था। एफआईआर दर्ज कराने की बात झूठ है। अभिभावकों को समय दिया जा रहा है कि वह फीस जमा कर दें। मुरादाबाद के सबसे कम फीस हमारे स्कूल की है। हमें भी शिक्षकों को वेतन देना है। इसलिए फीस में छूट नहीं दी जा सकती है।
- सिस्टर प्रिया, प्रधानाचार्य, सेंटमेरीज सीनियर सेकेंड्री स्कूल।
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बुधवार सुबह प्रतिदिन की तरह छात्राएं परीक्षा देने के लिए स्कूल आईं थीं, लेकिन शिक्षिकाओं ने 25 छात्राओं को परीक्षा में नहीं बैठने दिया। अभिभावकों का कहना है कि छात्राओं ने रोते हुए अभिभावकों को स्कूल के फैसले से अवगत कराया तो वह जिस हालत में थे, उसी हालात में स्कूल पहुंचे। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि छह से नौ माह तक की फीस जमा होने के बावजूद छात्राओं को रोका जा रहा है। शिक्षिकाओं से वार्ता करने पर वह पुलिस बुलाने की धमकी देती हैं। जब अभिभावकों ने मार्च माह में पूरे साल की फीस जमा करने का लिखित में आश्वासन दिया, तब उनकी बेटियों को परीक्षा कक्ष में भेजा गया।
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फीस में नहीं है कोई छूट
अभिभावकों का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल में उनके व्यापार चौपट हो गए हैं। इसकी वजह से वह आर्थिक समस्या का सामना कर रहे हैं। शिक्षिकाएं एक साथ पूरे साल की फीस जमा करने को कह रही हैं, लेकिन फीस में कोई छूट नहीं दे रही हैं। यदि उनके पास समस्या नहीं होती तो वह पहले ही फीस जमा कर चुके होते। अब एक साथ पूरे साल की फीस भरना उनके लिए बहुत मुश्किल है। अभिभावक संघ के सदस्य रासु ठाकुर ने कुछ माह की फीस में छूट देने की मांग की तो स्कूल प्रशासन ने फीस में छूट देने से स्पष्ट इनकार कर दिया।
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मैं मशीन पर काम कर रहा था। मेरी बेटी ने रोते हुए मुझे फोन किया था। मैंने अपनी बेटी की छह माह की फीस जमा की है। बुधवार को गणित विषय की परीक्षा थी। फीस जमा करने का आश्वासन देने के बाद उसे परीक्षा में बैठाया है।
- सुरेंद्र सिंह, अभिभावक
मेरी बेटी की नौ माह की फीस जमा थी। इसके बावजूद उसे परीक्षा में बैठने से रोक दिया था। अब मैंने पूरे वर्ष की फीस जमा की है। इसके बाद मेरी बेटी को परीक्षा में बैठने दिया है। जब मैंने शिक्षिकाओं से बात की तो उन्होंने पुलिस बुलाकर मेरे खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी।
- अमित गुप्ता, अभिभावक
मेरी जुड़वा बेटियां कक्षा सात में पढ़ती हैं। मेरी बेटी की पहले तीन माह की फीस जमा थी। मंगलवार को मैंने छह माह की फीस जमा की थी। अब तक कुल नौ माह की फीस जमा हो चुकी है। मंगलवार की फीस को उन्होंने अपने सिस्टम पर अपडेट नहीं किया था और मेरी बेटियों को परीक्षा से रोक दिया। स्कूल आकर जब मैंने उन्हें जानकारी दी, तब परीक्षा में बैठाया है।
- अशोक कुमार, अभिभावक
मेरी बेटी कक्षा सात में है। उसकी अब तक की छह माह की फीस जमा है। उसे परीक्षा में नहीं बैठने दिया गया था। इसकी वजह से वह रो रही थी। स्कूल में मैंने लिखित में मार्च माह में फीस जमा करने का आश्वासन दिया है, तब परीक्षा में बैठने दिया है। स्कूल को कुछ फीस माफ करनी चाहिए।
- विकास दिवाकर, अभिभावक
मेरी कपड़े की दुकान है। लॉकडाउन और उसके बाद भी काम ठप रहा था। अब ग्राहक आना शुरू हुए थे तो अन्य लोगों के रुपये दिए हैं। इसलिए एक भी महीने की फीस नहीं जमा कर पाया था। सुबह जब मैं साढ़े आठ बजे अपनी बेटी को स्कूल छोड़ने आया था तब गेटकीपर ने दोपहर एक बजे तक फीस जमा करने की बात कही थी। बाद में बेटी ने फोन पर उसे परीक्षा में न बैठने की जानकारी दी। अब मार्च माह में पूरे साल की फीस जमा करने का लिखित आश्वासन लिया है, तब उसे परीक्षा में बैठाया है।
- मोहम्मद सुहेल खान, अभिभावक।
यदि किसी अभिभावक को परेशानी है तो वह हमसे आकर मिल सकता है। मैं स्वयं अभिभावकों से मिलती हूं। कुछ अभिभावकों को फीस में मदद भी की है। ज्यादातर अभिभावक पूरे साल में हमसे नहीं मिले हैं, इसलिए छात्राओं को रोका था। बाद में सभी को परीक्षा में बैठाया है। अभिभावक समूह में आकर हंगामा कर रहे थे। अपनी और अन्य शिक्षिकाओं की सुरक्षा के लिए मैंने पुलिस को फोन किया था। एफआईआर दर्ज कराने की बात झूठ है। अभिभावकों को समय दिया जा रहा है कि वह फीस जमा कर दें। मुरादाबाद के सबसे कम फीस हमारे स्कूल की है। हमें भी शिक्षकों को वेतन देना है। इसलिए फीस में छूट नहीं दी जा सकती है।
- सिस्टर प्रिया, प्रधानाचार्य, सेंटमेरीज सीनियर सेकेंड्री स्कूल।