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ऑनलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा से शिक्षक-विद्यार्थियों में असमंजस
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मुरादाबाद। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने वार्षिक प्रयोगात्मक परीक्षा ओपन बुक पद्यति के आधार पर कराने का निर्णय लिया है। इसके लिए लिखित में दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए हैं, लेकिन इस माध्यम से शिक्षक और विद्यार्थी संतुष्ट नहीं हैं। उनका कहना है कि संसाधनों की समस्या के अलावा नई प्रक्रिया का अभ्यास न होने की वजह से ऑनलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा देने में समस्या आ सकती है। इसलिए ऑफलाइन माध्यम से प्रयोगात्मक परीक्षा कराने के लिए विश्वविद्यालय से अनुरोध किया जाएगा।
विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक परीक्षा करने और ऑनलाइन भेजने के लिए 24 घंटे का समय दिया जाएगा। इसके बाद 24 घंटे का समय कालेज को मूल्यांकन और अंक अपलोड करने के लिए दिया जाएगा। प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए निर्धारित कुल अंकों में से 30 फीसदी अंक महाविद्यालय द्वारा प्रयोगशाला रिकॉर्ड और उपस्थिति के आधार पर दिए जाएंगे। शेष 70 फीसदी अंक ओपन बुक पद्यति के आधार पर दिए जाने वाले असाइनमेंट के दिए जाएंगे। इस नई प्रक्रिया को समझने के लिए विद्यार्थियों ने शिक्षकों से मॉक टेस्ट कराने की मांग की है।
मेरे साथ के कुछ छात्र हैं, उनके एंड्रायड फोन नहीं हैं। कालेज में ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हुई है तो प्रयोगात्मक परीक्षाओं का आयोजन बहुत मुश्किल हो जाएगा। इस वर्ष चार या पांच प्रैक्टीकल ही हो पाए थे। पहले सप्ताह में दो से तीन कक्षाएं लगती थीं, लेकिन इस वर्ष तो 15 दिन पर एक कक्षा मुश्किल से लगी है। ऑनलाइन पैटर्न समझ में नहीं आएगा। ऑफलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए।
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- निखिल आर्य, बीएससी अंतिम वर्ष
मेरे साथ की करीब दस छात्राएं ऐसी हैं, जिनके पास एंड्राएड फोन नहीं हैं। इसलिए ऑफलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा हो तो ज्यादा बेहतर रहेगा। बीए द्वितीय वर्ष में कोरोना संक्रमण की वजह से प्रयोगात्मक परीक्षा नहीं हो सकी थी। प्रथम वर्ष में प्रैक्टीकल हुआ था और यह पद्यति मुझे समझ में आई थी। यदि शिक्षक पहले मॉक टेस्ट का आयोजन करेंगे तो काफी हद तक हमें राहत मिल सकेगी।
- अंशु सिंह, बीए अंतिम वर्ष भूगोल
ऑफलाइन में विद्यार्थियों का समूह बनाकर प्रयोगात्मक परीक्षाएं करवाई जाती हैं। इसी आधार पर शिक्षक सवाल पूछते हैं, लेकिन ऑनलाइन में व्यक्तिगत वार्तालाप होगा तो चुनौती रहेगी। पहले परीक्षा से पहले प्रयोगात्मक परीक्षा होती थी, लेकिन इस वर्ष अभी तक तारीख की घोषणा नहीं की है। शिक्षकों को ऑनलाइन क्लिप जारी करनी चाहिए, ताकि उसके आधार पर हम समझ सकें और उसी के आधार पर प्रयोगात्मक परीक्षा दे सकें।
- शेखर पाल, बीएससी अंतिम वर्ष
यह बोले शिक्षक...
शिक्षकों में अभी असमंजस है, क्योंकि दिशा-निर्देश काफी जटिल है। बहुत से विद्यार्थियों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों से संपर्क करना मुश्किल है। इसके अलावा यदि कोई विद्यार्थी 24 घंटे में असाइनमेंट नहीं भेज पाया तो वह अनुपस्थित हो जाएगा। इसलिए हमारा सुझाव था कि भले ही एक घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा कराते है और एक बैच को एक दिन के बजाय दो दिन में करा लेते। यदि विद्यार्थी मुख्य परीक्षा देने आ सकते हैं तो प्रयोगात्मक परीक्षा देने भी आ सकता है। ऑफलाइन परीक्षा कराने का विश्वविद्यालय से अनुरोध किया जाएगा।
- डॉ. योगेंद्र सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, केजीके कालेज
मोबाइल अब शिक्षा का हिस्सा बन गया है। अभी कोरोना संक्रमण का कुछ पता नहीं है कि परिस्थितियां कब तक सही होंगी। इसलिए विद्यार्थियों को खुद को अपडेट रखना पड़ेगा। कुछ विद्यार्थियों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। उनके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अलग से समय निर्धारित करना चाहिए, जिससे वह अलग से प्रयोगात्मक परीक्षा दे सकें। इसके अलावा मॉक टेस्ट या वीडिया क्लिप आदि दिए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को जानकारी मिल जाए कि कैसे प्रयोगात्मक परीक्षा देनी है।
- डॉ. जेके पाठक, एसोसिएट प्रोफेसर, जंतु विज्ञान विभाग, हिंदू कॉलेज
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विश्वविद्यालय द्वारा जारी किए गए दिशा-निर्देशों के अनुसार विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक परीक्षा करने और ऑनलाइन भेजने के लिए 24 घंटे का समय दिया जाएगा। इसके बाद 24 घंटे का समय कालेज को मूल्यांकन और अंक अपलोड करने के लिए दिया जाएगा। प्रयोगात्मक परीक्षाओं के लिए निर्धारित कुल अंकों में से 30 फीसदी अंक महाविद्यालय द्वारा प्रयोगशाला रिकॉर्ड और उपस्थिति के आधार पर दिए जाएंगे। शेष 70 फीसदी अंक ओपन बुक पद्यति के आधार पर दिए जाने वाले असाइनमेंट के दिए जाएंगे। इस नई प्रक्रिया को समझने के लिए विद्यार्थियों ने शिक्षकों से मॉक टेस्ट कराने की मांग की है।
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मेरे साथ के कुछ छात्र हैं, उनके एंड्रायड फोन नहीं हैं। कालेज में ऑनलाइन पढ़ाई नहीं हुई है तो प्रयोगात्मक परीक्षाओं का आयोजन बहुत मुश्किल हो जाएगा। इस वर्ष चार या पांच प्रैक्टीकल ही हो पाए थे। पहले सप्ताह में दो से तीन कक्षाएं लगती थीं, लेकिन इस वर्ष तो 15 दिन पर एक कक्षा मुश्किल से लगी है। ऑनलाइन पैटर्न समझ में नहीं आएगा। ऑफलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा का आयोजन किया जाना चाहिए।
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- निखिल आर्य, बीएससी अंतिम वर्ष
मेरे साथ की करीब दस छात्राएं ऐसी हैं, जिनके पास एंड्राएड फोन नहीं हैं। इसलिए ऑफलाइन प्रयोगात्मक परीक्षा हो तो ज्यादा बेहतर रहेगा। बीए द्वितीय वर्ष में कोरोना संक्रमण की वजह से प्रयोगात्मक परीक्षा नहीं हो सकी थी। प्रथम वर्ष में प्रैक्टीकल हुआ था और यह पद्यति मुझे समझ में आई थी। यदि शिक्षक पहले मॉक टेस्ट का आयोजन करेंगे तो काफी हद तक हमें राहत मिल सकेगी।
- अंशु सिंह, बीए अंतिम वर्ष भूगोल
ऑफलाइन में विद्यार्थियों का समूह बनाकर प्रयोगात्मक परीक्षाएं करवाई जाती हैं। इसी आधार पर शिक्षक सवाल पूछते हैं, लेकिन ऑनलाइन में व्यक्तिगत वार्तालाप होगा तो चुनौती रहेगी। पहले परीक्षा से पहले प्रयोगात्मक परीक्षा होती थी, लेकिन इस वर्ष अभी तक तारीख की घोषणा नहीं की है। शिक्षकों को ऑनलाइन क्लिप जारी करनी चाहिए, ताकि उसके आधार पर हम समझ सकें और उसी के आधार पर प्रयोगात्मक परीक्षा दे सकें।
- शेखर पाल, बीएससी अंतिम वर्ष
यह बोले शिक्षक...
शिक्षकों में अभी असमंजस है, क्योंकि दिशा-निर्देश काफी जटिल है। बहुत से विद्यार्थियों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। ऐसे में विद्यार्थियों से संपर्क करना मुश्किल है। इसके अलावा यदि कोई विद्यार्थी 24 घंटे में असाइनमेंट नहीं भेज पाया तो वह अनुपस्थित हो जाएगा। इसलिए हमारा सुझाव था कि भले ही एक घंटे की प्रयोगात्मक परीक्षा कराते है और एक बैच को एक दिन के बजाय दो दिन में करा लेते। यदि विद्यार्थी मुख्य परीक्षा देने आ सकते हैं तो प्रयोगात्मक परीक्षा देने भी आ सकता है। ऑफलाइन परीक्षा कराने का विश्वविद्यालय से अनुरोध किया जाएगा।
- डॉ. योगेंद्र सिंह, एसोसिएट प्रोफेसर, भूगोल विभाग, केजीके कालेज
मोबाइल अब शिक्षा का हिस्सा बन गया है। अभी कोरोना संक्रमण का कुछ पता नहीं है कि परिस्थितियां कब तक सही होंगी। इसलिए विद्यार्थियों को खुद को अपडेट रखना पड़ेगा। कुछ विद्यार्थियों के पास एंड्रायड फोन नहीं है। उनके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अलग से समय निर्धारित करना चाहिए, जिससे वह अलग से प्रयोगात्मक परीक्षा दे सकें। इसके अलावा मॉक टेस्ट या वीडिया क्लिप आदि दिए जाने चाहिए, ताकि विद्यार्थियों को जानकारी मिल जाए कि कैसे प्रयोगात्मक परीक्षा देनी है।
- डॉ. जेके पाठक, एसोसिएट प्रोफेसर, जंतु विज्ञान विभाग, हिंदू कॉलेज