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तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए छह महीने का इंतजार
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मुरादाबाद। सरकारी अस्पतालों में ट्रेनिंग के लिए बी और डी फार्मा के 500 छात्र-छात्राएं वेटिंग लिस्ट में हैं। तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए छात्र-छात्राओं को तीन से छह महीने का इंतजार करना पड़ रहा है। ट्रेनिंग के लिए जिला अस्पताल में 300 और सीएमओ कार्यालय में 200 आवेदन वेटिंग में हैं। ऐसे में छात्र ट्रेनिंग के लिए दफ्तरों का चक्कर काट रहे हैं।
बी और डी फार्मा की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र उत्तर प्रदेश फार्मेसी में अपना रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इसके लिए छात्र-छात्राओं को सरकारी अस्पतालों में नब्बे दिन की ट्रेनिंग लेनी होती है। इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन हो पाता है। कोरोना संक्रमण काल में ट्रेनिंग करने वालों की भरमार हो गई है। जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए आवेदन लेकर रोजाना आठ से दस छात्र पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में 300 तो सीएचसी-पीएचसी के लिए 200 आवेदन वेटिंग में हैं। यही वजह है कि सीएमएस और सीएमओ कार्यालय में रोजाना आवेदकों की भीड़ जुट रही है। किसी को तीन तो किसी को छह महीने बाद शुरू होने वाले बैच में जगह मिल रही है। छात्र दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उन्हें बैच में जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में छात्र जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सिफारिश भी लेकर पहुंच रहे हैं।
जिला अस्पताल में एक बैच में 22 छात्र
मुरादाबाद। जिला अस्पताल के दवा स्टोर इंचार्ज एवं डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप बडोला ने बताया कि अस्पताल में एक बैच में 22 छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग कराई जाती है। करीब तीन सौ छात्रों के आवेदन वेटिंग में हैं।
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सीएचसी-पीएचसी में एक बैच में 40 छात्र
मुरादाबाद। सीएमओ अधीन संचालित दवा स्टोर के इंचार्ज एवं चीफ फार्मासिस्ट एसपी सिंह ने बताया कि सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए एक बैच में 40 छात्र शामिल किए जाते हैं। ट्रेनिंग के लिए 200 छात्रों ने आवेदन कर रखे हैं।
दूसरे जिलों से भी आ रहे छात्र
मुरादाबाद। तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए मुरादाबाद के अलावा दूसरे जिलों से भी छात्र आवेदन लेकर पहुंचे रहे हैं। संभल, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर के साथ-साथ गाजियाबाद से भी ट्रेनिंग के लिए छात्र आ रहे हैं।
पांच सौ छात्रों की ट्रेनिंग में लग जाएंगे दो साल
मुरादाबाद। जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए करीब 500 आवेदन वेटिंग में हैं। जिला अस्पताल की एक बैच में 22 और सीएचसी-पीएचसी में 40 छात्र होते हैं। इस तरह एक बैच में 62 लोगों को ही ट्रेनिंग मिल सकती है। एक बैच की ट्रेनिंग तीन महीने की होती है। ऐसे में 500 छात्रों को ट्रेनिंग चौबीस महीने में पूरी हो पाएगी।
ट्रेनिंग के लिए छात्रों की संख्या बढ़ने के ये हो सकते हैं कारण
- फार्मेसी कॉलेजों की संख्या बढ़ना
- कोरोना संक्रमण के चलते सेशन का लेट होना
- एक साथ कॉलेजों का परिणाम आना
- निजी कॉलेजों की ओर से प्रशिक्षण की सुविधा न मुहैया कराना
केस एक
मुरादाबाद। शहर के लाइनपार के रहने वाले नितिन कुमार कश्यप ने बी फार्मा किया है। पंद्रह सितंबर को जिला अस्पताल में ट्रेनिंग के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक उन्हें ट्रेनिंग के लिए डेट नहीं मिल पाई है। तीन से छह महीने बाद ट्रेनिंग के लिए बैच में जगह मिलने की उम्मीद है। नितिन रेलवे अस्पताल का भी चक्कर लगा चुके हैं।
केस दो
मुरादाबाद। मूंढापांडे क्षेत्र के रहने वाले शाकिर ने डी फार्मा किया है। हफ्तेभर पहले उन्होंने सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। उन्हें डेढ़ महीने बाद बुलाया गया है। इसके बाद बताया जाएगा कि उन्हें कब ट्रेनिंग की डेट मिलेगी।
केस तीन
मुरादाबाद। डी फार्मा की पढ़ाई पूरी करने वाले मोहम्मद सलमान कुंदरकी के रहने वाले हैं। उन्होंने कुंदरकी सीएचसी में ट्रेनिंग के लिए चार सितंबर को सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। उन्हें बताया गया कि अभी बैच में सीट खाली नहीं है। आपको बाद में बताया जाएगा। तब से वह सीएमओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।
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बी और डी फार्मा की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्र उत्तर प्रदेश फार्मेसी में अपना रजिस्ट्रेशन कराते हैं। इसके लिए छात्र-छात्राओं को सरकारी अस्पतालों में नब्बे दिन की ट्रेनिंग लेनी होती है। इसके बाद ही रजिस्ट्रेशन हो पाता है। कोरोना संक्रमण काल में ट्रेनिंग करने वालों की भरमार हो गई है। जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए आवेदन लेकर रोजाना आठ से दस छात्र पहुंच रहे हैं। जिला अस्पताल में 300 तो सीएचसी-पीएचसी के लिए 200 आवेदन वेटिंग में हैं। यही वजह है कि सीएमएस और सीएमओ कार्यालय में रोजाना आवेदकों की भीड़ जुट रही है। किसी को तीन तो किसी को छह महीने बाद शुरू होने वाले बैच में जगह मिल रही है। छात्र दफ्तरों में चक्कर काट रहे हैं। लेकिन उन्हें बैच में जगह नहीं मिल पा रही है। ऐसे में छात्र जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों की सिफारिश भी लेकर पहुंच रहे हैं।
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जिला अस्पताल में एक बैच में 22 छात्र
मुरादाबाद। जिला अस्पताल के दवा स्टोर इंचार्ज एवं डिप्लोमा फार्मासिस्ट एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष संदीप बडोला ने बताया कि अस्पताल में एक बैच में 22 छात्र-छात्राओं को ट्रेनिंग कराई जाती है। करीब तीन सौ छात्रों के आवेदन वेटिंग में हैं।
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सीएचसी-पीएचसी में एक बैच में 40 छात्र
मुरादाबाद। सीएमओ अधीन संचालित दवा स्टोर के इंचार्ज एवं चीफ फार्मासिस्ट एसपी सिंह ने बताया कि सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए एक बैच में 40 छात्र शामिल किए जाते हैं। ट्रेनिंग के लिए 200 छात्रों ने आवेदन कर रखे हैं।
दूसरे जिलों से भी आ रहे छात्र
मुरादाबाद। तीन महीने की ट्रेनिंग के लिए मुरादाबाद के अलावा दूसरे जिलों से भी छात्र आवेदन लेकर पहुंचे रहे हैं। संभल, अमरोहा, रामपुर, बिजनौर के साथ-साथ गाजियाबाद से भी ट्रेनिंग के लिए छात्र आ रहे हैं।
पांच सौ छात्रों की ट्रेनिंग में लग जाएंगे दो साल
मुरादाबाद। जिला अस्पताल और सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए करीब 500 आवेदन वेटिंग में हैं। जिला अस्पताल की एक बैच में 22 और सीएचसी-पीएचसी में 40 छात्र होते हैं। इस तरह एक बैच में 62 लोगों को ही ट्रेनिंग मिल सकती है। एक बैच की ट्रेनिंग तीन महीने की होती है। ऐसे में 500 छात्रों को ट्रेनिंग चौबीस महीने में पूरी हो पाएगी।
ट्रेनिंग के लिए छात्रों की संख्या बढ़ने के ये हो सकते हैं कारण
- फार्मेसी कॉलेजों की संख्या बढ़ना
- कोरोना संक्रमण के चलते सेशन का लेट होना
- एक साथ कॉलेजों का परिणाम आना
- निजी कॉलेजों की ओर से प्रशिक्षण की सुविधा न मुहैया कराना
केस एक
मुरादाबाद। शहर के लाइनपार के रहने वाले नितिन कुमार कश्यप ने बी फार्मा किया है। पंद्रह सितंबर को जिला अस्पताल में ट्रेनिंग के लिए आवेदन किया था। लेकिन अभी तक उन्हें ट्रेनिंग के लिए डेट नहीं मिल पाई है। तीन से छह महीने बाद ट्रेनिंग के लिए बैच में जगह मिलने की उम्मीद है। नितिन रेलवे अस्पताल का भी चक्कर लगा चुके हैं।
केस दो
मुरादाबाद। मूंढापांडे क्षेत्र के रहने वाले शाकिर ने डी फार्मा किया है। हफ्तेभर पहले उन्होंने सीएचसी-पीएचसी में ट्रेनिंग के लिए सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। उन्हें डेढ़ महीने बाद बुलाया गया है। इसके बाद बताया जाएगा कि उन्हें कब ट्रेनिंग की डेट मिलेगी।
केस तीन
मुरादाबाद। डी फार्मा की पढ़ाई पूरी करने वाले मोहम्मद सलमान कुंदरकी के रहने वाले हैं। उन्होंने कुंदरकी सीएचसी में ट्रेनिंग के लिए चार सितंबर को सीएमओ कार्यालय में आवेदन किया था। उन्हें बताया गया कि अभी बैच में सीट खाली नहीं है। आपको बाद में बताया जाएगा। तब से वह सीएमओ कार्यालय का चक्कर काट रहे हैं।