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ध्रुव अपहरण कांड : प्रेमी से बेटे का अपहरण करवाने की आरोपी शिखा की जमानत नामंजूर
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मुरादाबाद। प्रेमी से बेटे ध्रुव को अगवा करवाने वाली महिला शिखा का जमानत प्रार्थना पत्र कोर्ट ने नामंजूर कर दिया। आरोपी महिला को मुख्य केस में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है, लेकिन दूसरे केस में अदालत ने जमानत नामंजूर कर दी।
मझोला थानाक्षेत्र के लाइन पार रामलीला मैदान के पास रहने वाले गौरव कुमार के पांच साल के बेटे ध्रुव को सात अगस्त 2020 को अगवा कर लिया गया था। इसके बाद आरोपियों ने इंटरनेट कॉल के जरिए गौरव से तीस लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। पुलिस के घेराबंदी करने पर आरोपियों ने बच्चे को गाजियाबाद में छोड़ दिया था। पुलिस ने बच्चे को बरामद करने के बाद परिवार की सुपुर्दगी में दे दिया था। इस मामले में पुलिस ने ध्रुव की मां शिखा और तेलंगाना निवासी अशफाक और इमरान खान को गिरफ्तार किया था।
पुलिस ने दावा किया था कि शिखा और अशफाक के प्रेम संबंध थे। दोनों की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी। शिखा ने प्रेमी के साथ घर बसाने के लिए अपने बेटे का अपहरण कराया था। इस मामले में पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। पुलिस ने शिखा के खिलाफ एक और केस दर्ज किया था। जिसमें धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। बेटे के अपहरण के मामले में शिखा को जमानत मिल चुकी है।
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दूसरे केस में शिखा ने अपने अधिवक्ता के जरिये अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश न्यू कोर्ट पंकज जायवाल की अदालत में हुई। जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसने किसी भी सिम का दुरुपयोग नहीं किया। संबंधित मूल अपराध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद से जमानत स्वीकार हो चुकी है। मूल अपराध के अतिरिक्त अन्य कोई मुकदमा शिखा के खिलाफ लंबित नहीं है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नाहर सिंह त्यागी ने तर्क दिया कि आरोपी महिला शिखा ने अनुचित रूप से कृष्ण गोपाल शर्मा के फोटो व आईडी का दुरुपयोग करते हुए मोबाइल नंबर एक्टिवेट कराया। जिसका प्रयोग बच्चे के अपहरण में किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों में अभियुक्त की अपराध में संलिप्तता, अपराध को कारित करने की प्रवृत्ति एवं अपराध को दृष्टिगत रखते हुए जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। अदालत ने शिखा की जमानत नामंजूर कर दी है।
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मझोला थानाक्षेत्र के लाइन पार रामलीला मैदान के पास रहने वाले गौरव कुमार के पांच साल के बेटे ध्रुव को सात अगस्त 2020 को अगवा कर लिया गया था। इसके बाद आरोपियों ने इंटरनेट कॉल के जरिए गौरव से तीस लाख रुपये की फिरौती मांगी गई थी। पुलिस के घेराबंदी करने पर आरोपियों ने बच्चे को गाजियाबाद में छोड़ दिया था। पुलिस ने बच्चे को बरामद करने के बाद परिवार की सुपुर्दगी में दे दिया था। इस मामले में पुलिस ने ध्रुव की मां शिखा और तेलंगाना निवासी अशफाक और इमरान खान को गिरफ्तार किया था।
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पुलिस ने दावा किया था कि शिखा और अशफाक के प्रेम संबंध थे। दोनों की दोस्ती फेसबुक के जरिए हुई थी। शिखा ने प्रेमी के साथ घर बसाने के लिए अपने बेटे का अपहरण कराया था। इस मामले में पुलिस ने तीनों को कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेज दिया था। पुलिस ने शिखा के खिलाफ एक और केस दर्ज किया था। जिसमें धोखाधड़ी व अन्य धाराओं में केस दर्ज किया था। बेटे के अपहरण के मामले में शिखा को जमानत मिल चुकी है।
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दूसरे केस में शिखा ने अपने अधिवक्ता के जरिये अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया था। इस प्रार्थना पत्र की सुनवाई अपर सत्र न्यायाधीश न्यू कोर्ट पंकज जायवाल की अदालत में हुई। जिसमें बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया था कि उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है। उसने किसी भी सिम का दुरुपयोग नहीं किया। संबंधित मूल अपराध में उच्च न्यायालय इलाहाबाद से जमानत स्वीकार हो चुकी है। मूल अपराध के अतिरिक्त अन्य कोई मुकदमा शिखा के खिलाफ लंबित नहीं है। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नाहर सिंह त्यागी ने तर्क दिया कि आरोपी महिला शिखा ने अनुचित रूप से कृष्ण गोपाल शर्मा के फोटो व आईडी का दुरुपयोग करते हुए मोबाइल नंबर एक्टिवेट कराया। जिसका प्रयोग बच्चे के अपहरण में किया गया था। दोनों पक्षों को सुनने के बाद अदालत ने कहा कि समस्त तथ्यों एवं परिस्थितियों में अभियुक्त की अपराध में संलिप्तता, अपराध को कारित करने की प्रवृत्ति एवं अपराध को दृष्टिगत रखते हुए जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त किए जाने योग्य है। अदालत ने शिखा की जमानत नामंजूर कर दी है।