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पुलिस टीम पर हमले में दोषी को सात साल की कैद
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मुरादाबाद। सिविल लाइंस के 18 साल पुराने पुलिस टीम पर हमले के मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ग्यारह इंतखाब आलम की अदालत ने मुलजिम जितेंद्र उर्फ अशोक को दोषी करार देते हुए सात साल की कैद की सजा सुनाई है, जबकि तेरह हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया है।
सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मधु रानी चौहान ने बताया कि 17 अगस्त 2001 में सिविल लाइंस थाने में सब इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने आरोपी जितेंद्र उर्फ अशोक निवासी आदर्श कालोनी समेत 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया गया कि हरियाणा के यमुना नगर जनपद की पुलिस वांछित आरोपी जितेंद्र की तलाश में आई थी। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र को उसके घर आदर्श नगर से गिरफ्तार कर लिया था। इसी दौरान भीड़ आई और आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। आरोपियों ने पुलिस टीम पर हमला किया था। जिसमें सब इंस्पेक्टर अरविंद कुमार समेत सात पुलिस कर्मी जख्मी हो गए थे। पुलिस ने इस केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद मुलजिमों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जितेंद्र उर्फ अशोक की फाइल की सुनवाई एडीजे ग्यारह इंतखाब आलम की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी मधु रानी चौहान ने पक्ष रखा और मुलजिम जितेंद्र को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम जितेंद्र को दोषी करार देते हुए सात साल की कैद और तेरह हजार का अर्थदंड लगाया है। इस केस से संबंधित अन्य आरोपियों की फाइलें दूसरी अदालतों में विचाराधीन हैं।
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सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता मधु रानी चौहान ने बताया कि 17 अगस्त 2001 में सिविल लाइंस थाने में सब इंस्पेक्टर अरविंद कुमार सिंह ने आरोपी जितेंद्र उर्फ अशोक निवासी आदर्श कालोनी समेत 22 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कराया था। जिसमें बताया गया कि हरियाणा के यमुना नगर जनपद की पुलिस वांछित आरोपी जितेंद्र की तलाश में आई थी। पुलिस ने आरोपी जितेंद्र को उसके घर आदर्श नगर से गिरफ्तार कर लिया था। इसी दौरान भीड़ आई और आरोपी को पुलिस हिरासत से छुड़ा लिया था। आरोपियों ने पुलिस टीम पर हमला किया था। जिसमें सब इंस्पेक्टर अरविंद कुमार समेत सात पुलिस कर्मी जख्मी हो गए थे। पुलिस ने इस केस की तफ्तीश पूरी करने के बाद मुलजिमों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जितेंद्र उर्फ अशोक की फाइल की सुनवाई एडीजे ग्यारह इंतखाब आलम की अदालत में चली। जिसमें सरकार की ओर से एडीजीसी मधु रानी चौहान ने पक्ष रखा और मुलजिम जितेंद्र को कड़ी से कड़ी सजा दिलाने को दलीलें दीं। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मुलजिम जितेंद्र को दोषी करार देते हुए सात साल की कैद और तेरह हजार का अर्थदंड लगाया है। इस केस से संबंधित अन्य आरोपियों की फाइलें दूसरी अदालतों में विचाराधीन हैं।
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