संभल के एक्सईएन को सात दिनों का कारावास
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राजेश कुमार पुत्र टीकाराम निवासी फत्तेहपुर सट्टा तहसील संभल ने पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम खंड संभल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। उनका कहना था कि विभाग ने बकाए का बिल जारी किए बिना ही आरसी जारी कर दी।
20-11-2006 को फोरम ने आदेश किया कि 31 मार्च 1996 से पूर्व के बकाया का बिल उपभोक्ता को जारी करे तथा मुकदमे के खर्च के तौर पर 1000 रुपये का दंड उपभोक्ता को भरा जाए। लेकिन आदेश का पालन नहीं हुआ। नौ अप्रैल 2009 को उपभोक्ता ने 5305 रुपये बकाये के जमा कर दिए। इसके बावजूद 9184 रुपये की आरसी जारी कर दी गई।
तहसील प्रशासन ने उपभोक्ता को बंदी बनाकर आरसी की धनराशि वसूल कर ली। इसके खिलाफ फोरम में दोबारा वाद दायर किया गया। इस पर विद्युत विभाग की ओर से पक्ष रखा गया कि उनसे गलती हुई है। उपभोक्ता का चेक बाद में वापस कर दिया गया।
बेंच ने कहा -
विद्युत विभाग ने फर्जी वसूली प्रमाण पत्र जारी करके अंकन राशि 9184 रुपये अवैधानिक रूप से वसूल की है। आरसी क्यों और किन कारणों से जारी की गई इसका कारण विपक्षीगण पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम खंड संभल ने स्पष्ट नहीं किया। फोरम के आदेश की अवहेलना में मामले में अपने अधिशासी अभियंता को साधारण कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई जाती है। इस संबंध में संबंधित पुलिस अधीक्षक को तुरंत गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाएं।
सुषमा जौहरी एवं सत्यवीर सिंह, बेंच सदस्य, न्यायालय जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष फोरम प्रथम, मुरादाबाद।
उपभोक्ता को इस मुकदमे की वजह से काफी तनाव झेलना पड़ा था। बकाया जमा करने के बावजूद उपभोक्ता को परेशान किया गया। हमने मजबूती से उपभोक्ता का पक्ष रखा था। जिसमें उसे न्याय देते हुए फोरम ने यह फैसला सुनाया है। किसी मामले में उपभोक्ता संरक्षण के लिए कारावास की सजा का यह मेरे संज्ञान में आया पहला मामला है। अपने आप में यह एक नजीर है।
-देवेंद्र वार्ष्णेय, अधिवक्ता, उपभोक्ता फोरम।