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हमें हल्के में न लें, तलबी पर नहीं पहुंचे तो करा देंगे सस्पेंड
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Thu, 06 Oct 2016 01:27 AM IST
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आरटीआई पर आयोजित वर्कशाप / ट्रेनिंग प्रोग्राम में आए मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने अफसरों को हिदायत दी है कि आरटीआई में मांगी गई सूचनाओं को वक्त से दें। जिन अफसरों को आयोग तलब करे वो वक्त से आयोग के समक्ष हाजिर हों, आयोग को हल्के में न लें। तलब करने पर जो अफसर आयोग के समक्ष पेश नहीं होंगे उन्हें शासन को रिपोर्ट देकर निलंबित करा दिया जाएगा।
राज्य सरकार द्वारा तीन दिसंबर 2015 को जारी किए गए सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के नियमों व प्रावधानों को समझाने के लिए राज्य सूचना आयोग की ओर से बुधवार को सर्किट हाउस में मंडल भर के जन सूचना अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कैंप / वर्कशाप का आयोजन किया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि आरटीआई गुड गर्वनेंस का क्रांतिकारी कदम है, जिसने आम आदमी को बहुत मजबूत बना दिया है। ताकि आम आदमी भी शासन- प्रशासन से सवाल पूछ सके। उन्हाेंने कहा कि सूचना का अधिकार नियमावली 2015 विस्तृत नियमावली है। जिसमें प्रक्रिया के शुरू से लेकर अंत तक सबकुछ स्पष्ट किया गया है। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि कई बार देखा जाता है कि आयोग द्वारा तलब किए जाने पर अधिकारी आयोग में नहीं पहुंचते हैं। ऐसे अधिकारियों के निलंबन के लिए अब सीधे शासन को लिखा जाएगा।
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उन्हाेंने कहा कि आरटीआई पर अधिकारी बिंदुवार जवाब दें और विलंब का कारण स्पष्ट करें। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि आरटीआई का मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति का काम होना चाहिए। अधिक से अधिक सूचनाएं दी जानी चाहिए। कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू ने कहा कि आरटीआई के ज्यादातर मामलों का निस्तारण जिला स्तर पर ही हो जाना चाहिए।
आवेदकों को उदार होकर गुणवत्ता पूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने कहा कि न्याय दिलाने का सबसे सशक्त माध्यम आरटीआई ही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजेश मैथानी ने कहा कि अधिक से अधिक बताएं, कम से कम छुपाएं। कार्यक्रम में एसएसपी नितिन तिवारी, के साथ ही मंडलभर के पुलिस - प्रशासनिक व अन्य विभागाें के अधिकारी उपस्थित थे।
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राज्य सरकार द्वारा तीन दिसंबर 2015 को जारी किए गए सूचना का अधिकार नियमावली 2015 के नियमों व प्रावधानों को समझाने के लिए राज्य सूचना आयोग की ओर से बुधवार को सर्किट हाउस में मंडल भर के जन सूचना अधिकारियों के लिए प्रशिक्षण कैंप / वर्कशाप का आयोजन किया गया।
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कार्यशाला का शुभारंभ करते हुए मुख्य सूचना आयुक्त जावेद उस्मानी ने कहा कि आरटीआई गुड गर्वनेंस का क्रांतिकारी कदम है, जिसने आम आदमी को बहुत मजबूत बना दिया है। ताकि आम आदमी भी शासन- प्रशासन से सवाल पूछ सके। उन्हाेंने कहा कि सूचना का अधिकार नियमावली 2015 विस्तृत नियमावली है। जिसमें प्रक्रिया के शुरू से लेकर अंत तक सबकुछ स्पष्ट किया गया है। मुख्य सूचना आयुक्त ने कहा कि कई बार देखा जाता है कि आयोग द्वारा तलब किए जाने पर अधिकारी आयोग में नहीं पहुंचते हैं। ऐसे अधिकारियों के निलंबन के लिए अब सीधे शासन को लिखा जाएगा।
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उन्हाेंने कहा कि आरटीआई पर अधिकारी बिंदुवार जवाब दें और विलंब का कारण स्पष्ट करें। राज्य सूचना आयुक्त हाफिज उस्मान ने कहा कि आरटीआई का मतलब है कि प्रत्येक व्यक्ति का काम होना चाहिए। अधिक से अधिक सूचनाएं दी जानी चाहिए। कमिश्नर एल वेंकटेश्वर लू ने कहा कि आरटीआई के ज्यादातर मामलों का निस्तारण जिला स्तर पर ही हो जाना चाहिए।
आवेदकों को उदार होकर गुणवत्ता पूर्ण सूचनाएं उपलब्ध कराई जाएं। जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर ने कहा कि न्याय दिलाने का सबसे सशक्त माध्यम आरटीआई ही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम में राजेश मैथानी ने कहा कि अधिक से अधिक बताएं, कम से कम छुपाएं। कार्यक्रम में एसएसपी नितिन तिवारी, के साथ ही मंडलभर के पुलिस - प्रशासनिक व अन्य विभागाें के अधिकारी उपस्थित थे।