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डिजीटाइजेशन : एचआईएमएस के जरिए आनलाइन प्रणाली से जुड़ेंगे रेलवे के अस्पताल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Tue, 29 Dec 2020 03:26 AM IST
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railway use dizititation in hospital
मुरादाबाद। रेलवे के सभी अस्पतालों में अब डॉक्टर के अपॉइंटमेंट से लेकर रोगी की जांच और दवा की पूरी प्रक्रिया आनलाइन की जाएगी। मुरादाबाद मंडल समेत देशभर के सभी रेल चिकित्सालय एचआईएमएस यानी अस्पताल प्रबंधन और सूचना प्रणाली से जोड़े जाएंगे। सोमवार को नई दिल्ली स्थित उत्तर रेलवे के केंद्रीय अस्पताल से इसकी शुरूआत की जा चुकी है।
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सोमवार को रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष और सीईओ वीके यादव ने नई दिल्ली समेत उत्तर रेलवे के विभिन्न मंडल अस्पतालों के लिए एचआईएमएस प्रणाली का शुभारंभ किया। फरवरी 2021 तक मुुरादाबाद मंडल में रेलवे की स्वास्थ्य इकाइयों में भी यह प्रणाली अपनाई जाएगी। इस प्रणाली के जरिए डॉक्टर और मरीज से जुड़ा सारा विवरण ऑनलाइन उपलब्ध रहेगा। सेवानिवृत्त उम्मीद कार्ड धारक रेल कर्मियों के साथ सभी रेलवे लाभार्थियों को इसका लाभ मिलेगा। डॉक्टर को दिखाने के लिए रोगी को रेलवे के अस्पताल में आकर ऑनलाइन पंजीकरण कराना होगा। डॉक्टर मरीज की बीमारी को समझने के बाद दवाओं के लिए पर्चा लिखकर मरीज को नहीं देंगे बल्कि सीधे फार्मेसी को भेजेंगे। साथ ही मरीज को भी अपनी दवाओं की जानकारी एसएमएस के माध्यम से प्राप्त हो जाएगी। इसके अलावा जांच से लेकर अन्य अस्पताल में रेफर करने की प्रकिया भी ऑनलाइन होगी। रोगी को कोई फार्म भरना नहीं पड़ेगा।
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यह है एचआईएमएस प्रणाली
उम्मीद कार्ड वाला रोगी पंजीकरण डेस्क पर आकर ऑनलाइन पंजीकरण कराएगा। वह अपनी बीमारी से संबंधित जानकारी देगा जोकि डॉक्टर को भेजी जाएगी। यदि रोगी के पास यूएमआईडी (उम्मीद) आईडी नहीं है, तो उसे एक वैकल्पिक कियोस्क पर जाना होगा जहां अस्थायी आईडी बनाई जाएगी। इस अस्थायी आईडी का उपयोग अपना टोकन प्राप्त करने के लिए किया जाएगा।
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मरीज को देखने से पहले डॉक्टर उसका नंबर दर्ज करेंगे या उसका कार्ड स्कैन करेंगे। इससे रोगी के सभी मेडिकल रिकॉर्ड डॉक्टर के कंप्यूटर पर उपलब्ध हो जाएंगे। डॉक्टर रोगी को देखने के बाद यदि कोई जांच बताते हैं तो जांच संबंधी जानकारी सीधे लैब में जाएगी और किसी भी फॉर्म को भरने की जरूरत नहीं होगी।
रोगी की जांच के नमूनों में बार कोड़ लगे होंगे और जांच रिपोर्ट सीधे मोबाइल पर भेज दी जाएगी। इसी प्रकार डॉक्टर द्वारा सुझाई गई दवा का विवरण सीधे दवा वितरक के पास जाएगा। पर्ची बनाने की आवश्यकता नहीं होगी। यदि लिखी गई दवा उपलब्ध नहीं है तो वह स्थानीय खरीद अनुभाग को निर्देशित करेंगे। रोगी को एसएमएस से जानकारी मिलेगी कि उसका पर्चा भरा जा चुका है और दवा तैयार है। डॉक्टर मरीज को आवश्यकतानुसार अन्य विभागों या बाहर के अस्पतालों में भी रेफर कर सकता है।
मरीज और उसकी बीमारी से संबंधित सारा विवरण पीडीएफ या जेपीईजी फार्मेट में ईएमआर के रूप में अपलोड किया जाएगा और डॉक्टर के पास भविष्य के लिए यह सेव रहेगा।

एचआईएस के जरिए स्वास्थ्य संबंधी सुविधाओं की मॉनिटरिंग उच्च स्तर से की जाएगी। पंजीकरण के बाद रोगी को उपचार के लिए बार-बार चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। ओपीडी डॉक्टर हर वार्ड में बिस्तर की स्थिति रियल टाइम आधार पर जान सकेंगे और इसके बाद मरीज को भर्ती की सलाह दे सकेंगे। इससे रेलवे लाभार्थियों को फायदा होगा और सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी।
- जगदीश चंद्र, सीएमएस मंडल रेल चिकित्सालय
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