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डैमेज कंट्रोल में जुटा रेलवे
ब्यूरो/ अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Fri, 06 Nov 2015 02:15 AM IST
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उत्तर रेलवे प्रशासन अब डैमेज कंट्रोल में जुट गया है। माल गाड़ी पलटने से पटरियां तो टूटी ही हैं, गाड़ी के चार वैगन क्षतिग्रस्त हो गए। तीन इलेक्ट्रिक वायर पोल भी टूटे हैं, जिसकी मरम्मत कराई जा रही है। खास बात यह है कि गाड़ी पलटने से लाखों रुपये की कीमत का कोयला बर्बाद हुआ है, जिसका हर्जाना पार्टी को देना होगा।
सूत्रों के मुताबिक कोयला का आक्शन कराया जाएगा, ताकि नुकसान की थोड़ी बहुत भरपाई हो सके। हादसे में कोयले से लदी माल गाड़ी के नौ डिब्बे प्लेटफार्म नंबर पांच, तीन और चार पर बिखर गए, जिसमें गार्ड वैगन भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक कोयला पंजाब के लहरा मुहब्बत पावर हाउस ले जाया जा रहा था।
एक वैगन पर करीब 60 टन कोयला लदा हुआ था। इस हिसाब से आठ वैगन में 480 टन कोयला लदा हुआ था। एक किलो कोयले की कीमत करीब पांच रुपये बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी को बर्बाद हुए कोयले की कीमत का हर्जाना देना होगा।
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ऐसे में कोशिश यही की जा रही है कि बर्बाद हुए कोयले को स्थानीय मार्केट में खपा दिया जाए, जिससे इसकी थोड़ी बहुत लागत रेलवे को मिल सके। इसके लिए आक्शन कराया जाएगा। वहीं पटरियां उखड़ने, इलेक्ट्रिक पोल टूटने और वैगन के क्षतिग्रस्त होने से भी रेलवे को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
बताया जाता है कि एकाध को छोड़कर ज्यादातर वैगन इस तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं कि उन्हें अब दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
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सूत्रों के मुताबिक कोयला का आक्शन कराया जाएगा, ताकि नुकसान की थोड़ी बहुत भरपाई हो सके। हादसे में कोयले से लदी माल गाड़ी के नौ डिब्बे प्लेटफार्म नंबर पांच, तीन और चार पर बिखर गए, जिसमें गार्ड वैगन भी शामिल है। सूत्रों के मुताबिक कोयला पंजाब के लहरा मुहब्बत पावर हाउस ले जाया जा रहा था।
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एक वैगन पर करीब 60 टन कोयला लदा हुआ था। इस हिसाब से आठ वैगन में 480 टन कोयला लदा हुआ था। एक किलो कोयले की कीमत करीब पांच रुपये बताई गई है। सूत्रों के मुताबिक पार्टी को बर्बाद हुए कोयले की कीमत का हर्जाना देना होगा।
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ऐसे में कोशिश यही की जा रही है कि बर्बाद हुए कोयले को स्थानीय मार्केट में खपा दिया जाए, जिससे इसकी थोड़ी बहुत लागत रेलवे को मिल सके। इसके लिए आक्शन कराया जाएगा। वहीं पटरियां उखड़ने, इलेक्ट्रिक पोल टूटने और वैगन के क्षतिग्रस्त होने से भी रेलवे को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है।
बताया जाता है कि एकाध को छोड़कर ज्यादातर वैगन इस तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं कि उन्हें अब दोबारा इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।