आठ दिन बाद टूटी उम्मीद: पत्थर पर खड़े होकर खिंचवा रहे थे फोटो, पैर फिसला और गंगा में बह गए थे सुशोभित, मिला शव
मोहित ने बताया कि उनके भाई सुशोभित यादव ने लखनऊ में पढ़ाई की थी। इसके बाद उनका चयन मनोविज्ञानी पद पर हो गया था। इसके बाद वह भोपाल चले गए थे। दो साल पहले ही भोपाल से गुजरात के अहमदाबाद में उनका तबादला हुआ था।
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होली पर ऋषिकेश में गंगा में डूबे मनोविज्ञानी सुशोभित यादव का शव बुधवार को मिल गया। उनके बड़े भाई मोहित यादव ने बताया कि भाई अपनी एक महिला मित्र के साथ ऋषिकेश घूम ने गए थे। वह पत्थर पर खड़े होकर फोटो खिंचवा रहे थे। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया और वो पानी में बह गए थे।
मझोला के विकासनगर लाइन पार निवासी सुशोभित यादव गुजरात के अहमदाबाद में मनोविज्ञानी के पद तैनात थे। परिवार में बड़े मोहित मेडिकल स्टोर संचालक हैं। पिता श्रीपाल सिंह यादव गन्ना विभाग में सचिव हैं और मेरठ में उनकी तैनाती है जबकि मां आशा देवी हैं।
मोहित ने बताया कि उनके भाई सुशोभित यादव ने लखनऊ में पढ़ाई की थी। इसके बाद उनका चयन मनोविज्ञानी पद पर हो गया था। इसके बाद वह भोपाल चले गए थे। दो साल पहले ही भोपाल से गुजरात के अहमदाबाद में उनका तबादला हुआ था। होली पर ऋषिकेश में घूमने गए थे। उनके साथ उनकी महिला मित्र भी थीं। महिला मित्र दिल्ली हाईकोर्ट में अधिवक्ता हैं।
ऋषिकेश में फूल चट्टी के पास दोनों पहुंचे थे। इसी दौरान सुशोभित ने अपनी मित्र से फोटो खींचने के लिए गया और खुद एक पत्थर पर खड़े हो गए। इसी दौरान उनका पैर फिसल गया था। इसके बाद वह पानी में हो गए। महिला मित्र ने शोर मचा दिया। तब तक लोग जुटे तब सुभोभित दूर बह चुके थे और उनकी आंखों से ओझल हो गए। सूचना मिलने सुभोशित के परिजन मौके पर पहुंच गए थे। पुलिस और एसडीआरएफ की टीम भी मौके पर पहुंच गई थी। काफी खोजबीन की लेकिन शव नहीं मिल पा रहा था। बुधवार को दोबारा सर्च ऑपरेशन चला गया। तब सुभोषित शव मिल गया।
सात किलोमीटर दूर मिला शव
आठ मार्च को सुभोभित ऋषिकेश फूल चट्टी के पास गंगा नदी में डूब गए थे। आठ दिन से लगातार टीमें शव की तलाश में जुटी थी। बुधवार सुशोभित यादव का शव पशुलोक बैराज में फंसा मिला है। जिस जगह मनो विज्ञानी डूबे थे। यहां से पशुलोक बैराज की दूरी सात किलोमीटर की दूरी है।
एक सप्ताह से सुबक रहे थे परिजन
गन्ना विभाग में सचिव के पद पर तैनात श्रीपाल सिंह यादव के छोटे बेटे सुशोभित यादव का होली पर घर में इंतजार किया जा रहा था। मां आशा देवी और भाभी उनके लिए विशेष पकवान बना रही थीं। पिता और भाई भी इसी इंतजार थे कि अब घर का लाडला आएगा और होली मिलेगा लेकिन इसी दौरान आए एक फोन कॉल ने होली की खंशिया मातम में बदल दी थीं। इसके बाद परिजन ऋषिकेश चल गए थे। तब से शव की तलाश करा रहे थे। बुधवार को टीम ने शव बरामद किया। इसके बाद एम्स में शव का पोस्टमार्टम किया गया। बुधवार देर रात परिजन शव लेकर घर आए तो आस पड़ोस के लोग जुट गए। परिजनों का रो रोकर बुरा हाल हो गया।
मित्र से ही शादी करना चाहते थे सुशोभित
मोहित ने बताया कि छोटे भाई की शादी की तैयारियां चल रही थीं। सुशोभित दिल्ली निवासी अपनी मित्र से ही शादी करना चाहते थे। इसे लेकर उन्होंने घर में चर्चा भी की थी। कुछ दिन बाद ही शादी की तारीख तय करनी थी लेकिन उससे पहले ही ऐसा हादसा हो गया। जिसने सभी खुशियां मातम में बदल दीं।