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14 औद्योगिक इकाईयों पर 133 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 18 Nov 2021 12:39 AM IST
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penalty on 14 industries
मुरादाबाद। मुरादाबाद में वायु गुणवत्ता सूचकांक बहुत खराब स्थिति में चल रहा है। बुधवार सुबह एक्यूआई के स्तर में गिरावट आई और एक्यूआई ओरेंज जोन में आ गया, लेकिन शाम होते-होते फिर से वायु गुणवत्ता सूचकांक रेड जोन में आ गया। इसमें भारी कणों का गंभीर स्थिति में होना चिंता में डाल रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी ने बताया कि प्रदूषण को नियंत्रण में करने के लिए विभाग ने 14 औद्योगिक इकाईयों पर 133 करोड़ रुपये का क्षतिपूर्ति जुर्माना भी लगाया है।
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बुधवार शाम छह बजे लाजपत नगर में वायु गुणवत्ता सूचकांक 307 दर्ज किया गया, जिसमें पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 500 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर, पीएम 10 का अधिकतम स्तर 447 माइक्रो ग्राम प्रति घन मीटर दर्ज किया गया। डब्लूएचओ के मुताबिक वातावरण में पीएम 2.5 का अधिकतम स्तर 30 होना चाहिए। इस मानक के हिसाब से 16 गुणा से अधिक प्रदूषण है। नोडल इंचार्ज सीपीसीबी डॉ. अनामिका त्रिपाठी ने बताया कि वायु प्रदूषण की वजह से मुरादाबाद के हालात खराब हैं। बुजुर्ग व्यक्ति टहलने के लिए घरों से निकल नहीं पा रहे हैं।
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वातावरण में भारी कणों के बढ़ने का एक कारण है कि सफाई कर्मचारी जगह-जगह कूड़े के ढेर में आग लगा देते हैं। पार्कों के किनारे और स्कूल-कालेजों के परिसरों में भी कूड़ा जलाया जा रहा है। इसे जीवाश्म ईंधन का जलना कहते हैं। इसमें लकड़ी, सूखे पत्ते होते हैं। इसे रोकने के लिए सीसीटीवी से निगरानी होनी चाहिए। कूड़े में आग लगाने पर पांच हजार रुपये का जुर्माना है। इसके अलावा स्टेशन रोड पर भोजनालयों में कोयले की भट्ठियों पर रोटियां बनाई जाती हैं। यह भट्ठियां गैस के बजाय कोयले से जलती हैं। कूड़ा जलना और कोयले की भट्टियों को जलाने पर तुरंत रोक लगनी चाहिए।
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पार्क और स्कूल-कॉलेजों के परिसरों में डिकंपोजीशन पिट होनी चाहिए, जिसमें कूड़े को डालकर केंचुए डाल देंगे तो खाद बन जाएगी। इसके अलावा खुले निर्माण कार्य, मुख्य चौराहों पर लगने वाला जाम, अवैध पीतल भट्टियां भी वायु प्रदूषण बढ़ने का कारण हैं। पीएम 2.5 और पीएम 10 से फेफड़े और हृदय रोग होने की आशंका रहती है। हृदय में पहुंचने के बाद भारी कण रक्त में घुलकर धमनी के माध्यम से पूरे शरीर में फैल जाते हैं। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए शोध में पता चला है कि पीएम 2.5 से तंत्रिका तंत्र और दिमाग कमजोर होता है। इससे अवसाद की समस्या होती है।
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