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मौत देख ली..यह तो नया जन्म है
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Mon, 17 Apr 2017 02:28 AM IST
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रामपुर में राज्यरानी एक्सप्रेस के 9 डिब्बे पटरी से उतरे
- फोटो : self
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‘सुबह का वक्त था। राज्य रानी एक्सप्रेस ट्रेन अपनी सामान्य गति से दौड़ रही थी। कुछ यात्री अपनी सीटों पर बैठे थे। कोई फोन पर बात कर रहा था तो किसी ने अपनी सीट को ही अपना बिस्तर बना रखा था। अचानक तेजी से झटका लगा और बोगी में धूल भर गई। आंखों के सामने अंधेरा सा छा गया।
यात्री एक दूसरे के ऊपर जा गिरे। बस चीख पुकार की आवाज ही सुनाई दे रही थी। ऐसा लगा अब जिंदगी नहीं बच पाएगी। यानी मौत तो साफ देख ली हमने..ऊपर वाले की कृपा रही कि कुछ क्षणों बाद खुद को जीवित पाया। हमारा नया जन्म है यह तो।’
ये लफ्ज उन यात्रियों के हैं। जिन्होंने शनिवार सुबह मौत को बहुत करीब से देखा। इन के चेहरे से हादसे की दहशत साफ नजर आ रही थी। किसी ने ईश्वर की कृपा से जिंदगी बचने की दुआ की तो किसी ने दूसरा जन्म लेना बताया।
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सिविल लाइंस के लोकोशेड पुल निवासी हरि शाहू ने बताया कि सुबह वह राज रानी ट्रेन से रामपुर के लिए सवार हुए थे। ट्रेन अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी। कोसी पुल के पास पहुंचते ही ट्रेन में अचानक झटका लगा और बोगी में धूल भर गई।
अपनी सीट से कब उछला इसका मुझे पता ही नहीं चल पाया। कुछ समय के लिए सांसे थम सी गई थीं। रामगंगा विहार निवासी देवराज ने बताया कि जिस तरह से हादसा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि अब जिंदगी नहीं बच पाएगी। रामगंगा विहार निवासी निर्मला तो हादसे की कहानी बयां करते वक्त रोने लगीं।
आंसू पोछते हुए बोलीं, कि वह खिड़की की बगल में सीट पर बैठी थी। अचानक ट्रेन पलट गई और तेज आवाज सुनवाई दी और चिंगारी उठी। इसके बाद आंखों के आगे अंधेरा छा गया था। गाजियाबाद के मोदी नगर निवासी कुसुम तिवारी ने बताया कि हादसे के समय वह अपनी बहन की बेटी की शादी में शाहजहांपुर जा रही थी।
कुसुम के साथ उनकी बेटी प्रीति और साक्षी भी मौजूद थी। डी-तीन कोच में सवार कुसुम ने बताया कि कुछ देर पहले ही उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बात की थी। इसके बाद फोन कट गया। उन्होंने मोबाइल बैग में रख लिया था।
अचानक तेज आवाज के साथ झटका लगाना शुरू हो गया। इसी बीच किसी ने ट्रेन पलटने का शोर मचा दिया। प्रीति ने हादसे के बाद दोनों बिछड़ गई थी। काफी देर के बाद दोनों को ढूंढ पाई। मो. सादिक ने बताया कि वह मुरादाबाद से सवार हुआ था। हादसा जबरदस्त था।
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यात्री एक दूसरे के ऊपर जा गिरे। बस चीख पुकार की आवाज ही सुनाई दे रही थी। ऐसा लगा अब जिंदगी नहीं बच पाएगी। यानी मौत तो साफ देख ली हमने..ऊपर वाले की कृपा रही कि कुछ क्षणों बाद खुद को जीवित पाया। हमारा नया जन्म है यह तो।’
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ये लफ्ज उन यात्रियों के हैं। जिन्होंने शनिवार सुबह मौत को बहुत करीब से देखा। इन के चेहरे से हादसे की दहशत साफ नजर आ रही थी। किसी ने ईश्वर की कृपा से जिंदगी बचने की दुआ की तो किसी ने दूसरा जन्म लेना बताया।
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सिविल लाइंस के लोकोशेड पुल निवासी हरि शाहू ने बताया कि सुबह वह राज रानी ट्रेन से रामपुर के लिए सवार हुए थे। ट्रेन अपनी सामान्य गति से आगे बढ़ रही थी। कोसी पुल के पास पहुंचते ही ट्रेन में अचानक झटका लगा और बोगी में धूल भर गई।
अपनी सीट से कब उछला इसका मुझे पता ही नहीं चल पाया। कुछ समय के लिए सांसे थम सी गई थीं। रामगंगा विहार निवासी देवराज ने बताया कि जिस तरह से हादसा हुआ था। ऐसा लग रहा था कि अब जिंदगी नहीं बच पाएगी। रामगंगा विहार निवासी निर्मला तो हादसे की कहानी बयां करते वक्त रोने लगीं।
आंसू पोछते हुए बोलीं, कि वह खिड़की की बगल में सीट पर बैठी थी। अचानक ट्रेन पलट गई और तेज आवाज सुनवाई दी और चिंगारी उठी। इसके बाद आंखों के आगे अंधेरा छा गया था। गाजियाबाद के मोदी नगर निवासी कुसुम तिवारी ने बताया कि हादसे के समय वह अपनी बहन की बेटी की शादी में शाहजहांपुर जा रही थी।
कुसुम के साथ उनकी बेटी प्रीति और साक्षी भी मौजूद थी। डी-तीन कोच में सवार कुसुम ने बताया कि कुछ देर पहले ही उन्होंने अपने बेटे से फोन पर बात की थी। इसके बाद फोन कट गया। उन्होंने मोबाइल बैग में रख लिया था।
अचानक तेज आवाज के साथ झटका लगाना शुरू हो गया। इसी बीच किसी ने ट्रेन पलटने का शोर मचा दिया। प्रीति ने हादसे के बाद दोनों बिछड़ गई थी। काफी देर के बाद दोनों को ढूंढ पाई। मो. सादिक ने बताया कि वह मुरादाबाद से सवार हुआ था। हादसा जबरदस्त था।