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महिला अस्पताल समेत चार सीएचसी में मरीजों का इलाज होगा ऑनलाइन
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मुरादाबाद। महिला अस्पताल समेत जिले के चार सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं ऑनलाइन करने की तैयारी है। इन सरकारी अस्पतालों में पर्चा बनाने से लेकर परामर्श और जांच रिपोर्ट सब कंप्यूटर स्क्रीन पर होंगी। दो महीने में ये सेवाएं शुरू हो जाएंगी। बुधवार को ई-सुश्रुत योजना के तहत डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया।
प्रदेश सरकार जिला और ब्लॉक स्तरीय सरकारी अस्पतालों में भी ऑनलाइन सेवा शुरू कर चाहती है। ताकि पर्चा बनाने से लेकर, जांच, चिकित्सकीय परामर्श अब कुछ पेपरलेस हो। इसके लिए ई-सुश्रुत योजना के तहत बुधवार को सीएमओ डॉ. एमसी गर्ग की अध्यक्षता में कार्यालय सभागार में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जहां सी-डैक के जरिए ऑनलाइन सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक रघुवीर सिंह ने बताया कि पहले चरण में कांठ, ठाकुरद्वारा, मूंढापांडे और बिलारी के ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोग्राम मैनेजर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट, फॉर्मासिस्ट को प्रशिक्षित किया गया। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सिस्टम आ गए हैं। सेटअप चालू होते ही नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन पर्चा बनाया जाएगा। इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों का भी रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज नहीं होगा। कंप्यूटर के जरिए ही मरीज के भर्ती और रेफर करने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। दो महीने के भीतर ये व्यवस्था लागू हो जाएगी।
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प्रदेश सरकार जिला और ब्लॉक स्तरीय सरकारी अस्पतालों में भी ऑनलाइन सेवा शुरू कर चाहती है। ताकि पर्चा बनाने से लेकर, जांच, चिकित्सकीय परामर्श अब कुछ पेपरलेस हो। इसके लिए ई-सुश्रुत योजना के तहत बुधवार को सीएमओ डॉ. एमसी गर्ग की अध्यक्षता में कार्यालय सभागार में प्रशिक्षण का आयोजन किया गया। जहां सी-डैक के जरिए ऑनलाइन सेवाओं का प्रशिक्षण दिया गया।
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जिला कार्यक्रम प्रबंधक रघुवीर सिंह ने बताया कि पहले चरण में कांठ, ठाकुरद्वारा, मूंढापांडे और बिलारी के ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर, ब्लॉक कम्युनिटी प्रोग्राम मैनेजर, डेटा एंट्री ऑपरेटर, लैब असिस्टेंट, फॉर्मासिस्ट को प्रशिक्षित किया गया। इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सिस्टम आ गए हैं। सेटअप चालू होते ही नई व्यवस्था के तहत ऑनलाइन पर्चा बनाया जाएगा। इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों का भी रजिस्टर में रिकॉर्ड दर्ज नहीं होगा। कंप्यूटर के जरिए ही मरीज के भर्ती और रेफर करने की प्रक्रिया को पूरा किया जाएगा। दो महीने के भीतर ये व्यवस्था लागू हो जाएगी।
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