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Moradabad News: साढ़े साल का धरना आठ घंटे में खत्म, 28 पर मुकदमा

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 02 Mar 2025 02:27 AM IST
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One and a half year strike ends in eight hours, 28 booked
अगवानपुर। जीनस पेपर मिल के गेट पर साढ़े तीन साल से चल रहा धरना शुक्रवार को आठ घंटे तक चले हंगामे के बाद खत्म हो गया। साथ ही प्रदर्शन करने वाले 28 लोगों पर रंगदारी मांगने, धमकी देने और मारपीट के आरोप में केस दर्ज कर लिया गया। शनिवार को न कोई धरना लगा और न कोई प्रदर्शनकारी पहुंचा। दीवारों पर लिखे मिल विरोधी नारे भी साफ करके पुताई करा दी गई। प्रदर्शनकारियों के तख्त, कुर्सी और गद्दे भी गायब हो गए। इससे लगा जैसे गेट पर धरना तो दूर कभी कोई प्रदर्शनकारी नहीं आए हों।
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24 सितंबर 2021 से अगवानपुर पेपर मिल के गेट पर धरना प्रदर्शन चल रहा था। इस प्रदर्शन में मिल के पूर्व कर्मचारी बुजुर्ग महिलाएं व पुरुष शामिल थे। प्रदर्शन की अगुआई 70 वर्षीय सुधीर सक्सेना कर रहे थे। सुधीर ने बताया कि उनके कार्यकाल में पेपर मिल का नाम एडीएम एग्रो प्रोडक्ट था। जुलाई 2021 में एडीएम मिल ने 326 कमचारियों को नौकरी से निकाल दिया था।
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15 अक्तूबर को मिल की ओर से श्रम आयुक्त को लेटर देकर बताया गया कि मिल कर्मचारियों को मुआवजा देकर मिल से निकाला गया है। वहीं मिल के क्लोजर के नोटिस में दो माह तक वेतन देने का जिक्र था। 17 दिसंबर 2021 में एडीएम से बदलकर मिल का नाम कैलाश पेपर कर दिया गया। इसके बाद मिल ने नए लोग भर्ती कर लिए लेकिन पुराने वाले कर्मचारी इसके विरोध में हाईकोर्ट की शरण में चले गए।
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हाईकोर्ट के न्यायाधीश ने मिल मालिक और कर्मचारियों की वार्ता के लिए निर्देशित किया लेकिन वार्ता नहीं हो पा। जब उनकी कहीं सुनवाई नहीं हुई तो 24 सितंबर 2021 को सभी लोग मांगों को लेकर मिल के गेट कर धरने के लिए बैठ गए। साढ़े तीन साल से सभी लोग शांतिपूर्ण धरना दे रहे थे। 18 फरवरी को सुधीर ने कमिश्नर, डीएम, एसएसपी, सीओ सिविल लाइंस, प्रभारी निरीक्षक सिविल लाइंस, अगवानपुर पुलिस चौक और जीनस पेपर मिल के मालिक समेत प्रशासन को पत्र लिखा था। उन्होंने कहा था कि 25 फरवरी को उनकी मालिक से वार्ता नहीं कराई गई तो वह मिल का गेट बंद करके धरना देंगे।
वार्ता नहीं होने पर शुक्रवार को उन्होंने मिल का गेट बंद करके अन्य पूर्व कर्मचारियों के साथ धरना शुरू कर दिया। आरोप है कि पुलिस ने उनका धरना उखाड़ दिया। पुलिस सामान भी भरकर ले गई और प्रदर्शनकारियों के साथ अभद्रता की। बुजुर्ग महिलाओं को खींचकर गाड़ी में डालने का प्रयास किया। आरोप लगाया कि पुलिस मिल के मालिक से मिली हुई थी। मिल के अफसरों के कहने पर पुलिस ने हाथापाई तक की। प्रदर्शनकारी कई महिलाएं जख्मी हुई हैं। पुलिस ने बताया कि 28 लोगों पर केस दर्ज किया गया है। इसमें 17 महिलाओं और 11 पुरुषों को आरोपी बनाया गया है।




पेपर मिल के गेट पर शुक्रवार को पुलिस ने धरना बंद करा दिया। पुलिस और मिल के अधिकारियों का तर्क था कि यह धरना अवैध तरीके से चल रहा था लेकिन धरना अवैध था तो साढ़े तीन साल तक कैसे चला। पुलिस को इस धरने की जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर नजरअंदाज किया गया। पुलिस ने पेपर मिल के गेट के सामने की सभी दुकानों के शटर बंद करा दिए थे। पुलिस ने मौके पर किसी भी स्थानीय व्यक्ति को रुकने की अनुमति नहीं दी। कोई मकान की छत पर खड़ा दिखा तो उसको भी कार्रवाई का डर दिखाकर नीचे उतार दिया। इसके बाद ही पुलिस ने धरने पर बैठे लोगों से खींचतान की।


मिल के गेट पर अवैध धरना प्रदर्शन चल रहा था। कोर्ट से भी मिल प्रशासन केस जीत चुका है। इसके बाद भी अवैध मांगों को लेकर यह लोग बैठे थे। मिल प्रबंधन से रंगदारी वसूलना चाहते थे। उन्होंने जबरन मिल का गेट बंद किया। इससे उत्पादन के कार्य में बाधा आई। पुलिस को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ तहरीर दी गई थी। इस पर 28 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। - जय कुमार, कारखाना, प्रबंधक
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