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सैंपल रिपोर्ट के इंतजार में डेढ़ करोड़ की दवाएं ‘क्वारंटीन’
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मुरादाबाद। कोरोना काल में संक्रमित मरीज ही नहीं बल्कि दवाओं को भी ‘क्वारंटीन’ में रखा जाता है। यूपीएमएससीएल (उत्तर प्रदेश मेडिकल सप्लाई कारपोरेशन लिमिटेड) की ओर से सरकारी अस्पतालों को भेजी जाने वाली दवाओं का सैंपल कराया जाता है। रिपोर्ट आने तक दवाओं का वितरण नहीं किया जाता है। मुरादाबाद के ड्रग वेयर हाउस में सैंपल रिपोर्ट के इंतजार में करीब डेढ़ करोड़ की दवाएं क्वारंटीन हैं।
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद फरोख्त का सिस्टम ऑनलाइन है। दवाओं की खरीद-फरोख्त यूपी एमएससीएल करता है। जिले से ऑनलाइन डिमांड की जाती है। इसके बाद लखनऊ से दवाओं की खेप भेजी जाती है। इसके लिए हर जिले में यूपीएमएससीएल का स्टोर बनाया गया है। जिलों में दवाओं के पहुंचने के बाद उन्हें सैंपल के लिए गुणवत्ता नियंत्रण अनुभाग ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ भेजा जाता है। जब तक इन दवाओं की सैंपल की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक दवाओं का वितरण अस्पतालों को नहीं होता।
सैंपल की रिपोर्ट 21 दिनों के भीतर आ जानी चाहिए, लेकिन ऐसा कम ही होता है। अगस्त में जिले से करीब पचास दवाओं का सैंपल लखनऊ भेजा गया था। लेकिन अभी तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। इसके चलते करीब डेढ़ करोड़ की पचास दवाएं ड्रग वेयर हाउस में क्वारंटीन हैं। इन दवाओं का वितरण नहीं हो पा रहा है।
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- कारपोरेशन से आने वाली दवाओं का सैंपल कराया जाता है। ये नई व्यवस्था करीब दो महीने से चल रही है। सैंपल रिपोर्ट आने तक दवाओं को क्वारंटीन में रखा जाता है। पचास दवाओं की सैंपल पेंडिंग में है। - डीएस नेगी, इंचार्ज, ड्रग वेयर हाउस
नहीं कटेगा दवाओं का बाउचर
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई का सिस्टम पूरी तरह से ऑनलाइन है। जिन दवाओं का सैंपल भेजा जाता है, उन दवाओं को ब्लाक कर दिया जाता है। इसके चलते उन दवाओं का बाउचर नहीं कट सकता है। चाहकर भी दवाओं की सप्लाई नहीं की जा सकती है।
इन दवाओं का भेजा गया सैंपल
- ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, मानसिक रोगों से संबंधित दवाएं, स्त्री रोग से संबंधित दवाएं, डिप्रेशन, पेट दर्द, उल्टी, बेहोशी की दवा, सर्दी जुकाम, एंटी एलर्जी, दर्द, आई ड्रॉप समेत 50 दवाएं।
36 दिन बाद आई एक दवा की रिपोर्ट
-ड्रग वेयर हाउस से 17 अगस्त को तीन दवाओं का सैंपल भेजा गया था। इसमें नींद की दवा, कैल्शियम टैबलेट और कैल्शियम विटामिन डी-3 का सिरप शामिल था। करीब 36 दिन बाद 22 सितंबर को सिर्फ कैल्शियम टैबलेट की रिपोर्ट आई। बाकी दोनों दवाओं की रिपोर्ट पेंडिंग में है। वहीं, दो सितंबर को 38 दवाओं के सैंपल भेज गए हैं। 21 दिन पूरे होने के बाद भी इनकी सैंपल रिपोर्ट नहीं आई है।
सैंपल की देरी से बढ़ती है मरीजों की परेशानी
सैंपल की रिपोर्ट में देरी होने से मरीजों को परेशानी होती है। दवा होते हुए उन्हें जरूरत के समय नहीं मिल पाती। हालांकि विभाग का दावा है कि दो से तीन महीने की दवाओं का इंतजाम पहले से करके रखा जाता है। इससे पहले दवाओं की डिमांड कर दी जाती है।
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सरकारी अस्पतालों में दवाओं की खरीद फरोख्त का सिस्टम ऑनलाइन है। दवाओं की खरीद-फरोख्त यूपी एमएससीएल करता है। जिले से ऑनलाइन डिमांड की जाती है। इसके बाद लखनऊ से दवाओं की खेप भेजी जाती है। इसके लिए हर जिले में यूपीएमएससीएल का स्टोर बनाया गया है। जिलों में दवाओं के पहुंचने के बाद उन्हें सैंपल के लिए गुणवत्ता नियंत्रण अनुभाग ट्रांसपोर्ट नगर लखनऊ भेजा जाता है। जब तक इन दवाओं की सैंपल की रिपोर्ट नहीं आ जाती, तब तक दवाओं का वितरण अस्पतालों को नहीं होता।
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सैंपल की रिपोर्ट 21 दिनों के भीतर आ जानी चाहिए, लेकिन ऐसा कम ही होता है। अगस्त में जिले से करीब पचास दवाओं का सैंपल लखनऊ भेजा गया था। लेकिन अभी तक सैंपल की रिपोर्ट नहीं आई है। इसके चलते करीब डेढ़ करोड़ की पचास दवाएं ड्रग वेयर हाउस में क्वारंटीन हैं। इन दवाओं का वितरण नहीं हो पा रहा है।
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- कारपोरेशन से आने वाली दवाओं का सैंपल कराया जाता है। ये नई व्यवस्था करीब दो महीने से चल रही है। सैंपल रिपोर्ट आने तक दवाओं को क्वारंटीन में रखा जाता है। पचास दवाओं की सैंपल पेंडिंग में है। - डीएस नेगी, इंचार्ज, ड्रग वेयर हाउस
नहीं कटेगा दवाओं का बाउचर
सरकारी अस्पतालों में दवाओं की सप्लाई का सिस्टम पूरी तरह से ऑनलाइन है। जिन दवाओं का सैंपल भेजा जाता है, उन दवाओं को ब्लाक कर दिया जाता है। इसके चलते उन दवाओं का बाउचर नहीं कट सकता है। चाहकर भी दवाओं की सप्लाई नहीं की जा सकती है।
इन दवाओं का भेजा गया सैंपल
- ब्लड प्रेशर, एंटीबायोटिक, मानसिक रोगों से संबंधित दवाएं, स्त्री रोग से संबंधित दवाएं, डिप्रेशन, पेट दर्द, उल्टी, बेहोशी की दवा, सर्दी जुकाम, एंटी एलर्जी, दर्द, आई ड्रॉप समेत 50 दवाएं।
36 दिन बाद आई एक दवा की रिपोर्ट
-ड्रग वेयर हाउस से 17 अगस्त को तीन दवाओं का सैंपल भेजा गया था। इसमें नींद की दवा, कैल्शियम टैबलेट और कैल्शियम विटामिन डी-3 का सिरप शामिल था। करीब 36 दिन बाद 22 सितंबर को सिर्फ कैल्शियम टैबलेट की रिपोर्ट आई। बाकी दोनों दवाओं की रिपोर्ट पेंडिंग में है। वहीं, दो सितंबर को 38 दवाओं के सैंपल भेज गए हैं। 21 दिन पूरे होने के बाद भी इनकी सैंपल रिपोर्ट नहीं आई है।
सैंपल की देरी से बढ़ती है मरीजों की परेशानी
सैंपल की रिपोर्ट में देरी होने से मरीजों को परेशानी होती है। दवा होते हुए उन्हें जरूरत के समय नहीं मिल पाती। हालांकि विभाग का दावा है कि दो से तीन महीने की दवाओं का इंतजाम पहले से करके रखा जाता है। इससे पहले दवाओं की डिमांड कर दी जाती है।