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नवाब काजिम अली खां ने साझा कीं रामपुर रियासत से जुड़ी बातें, बोले- प्रधानमंत्री मोदी ने राजघरानों को दिया सम्मान

Mon, 22 Jun 2020 01:52 PM IST
प्राची प्रियम अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: प्राची प्रियम Updated Mon, 22 Jun 2020 01:52 PM IST
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Nawab Kazim Ali Khan of rampur province shares historical facts about early life and appreciates PM Modi
नवाब काजिम अली खां - फोटो : अमर उजाला

रामपुर रियासत के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां के पौत्र पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने रामपुर रियासत से जुड़ी बातें सोशल मीडिया के माध्यम से साझा की हैं। पूर्व मंत्री के पीआरओ काशिफ खां ने बताया कि गुजरात के दांता की राजकुमारी ख्याति सिंह के साथ एक घंटे के लाइव शो में देश-दुनिया के तमाम लोग जुड़े, जिन्होंने रामपुर के बारे में सवाल भी पूछे। 

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नवाब काजिम अली खां ने कहा कि रामपुर रियासत पूरी तरह से धर्मनिर्पेक्ष और सांप्रदायिक सौहार्द को बढ़ावा देने वाला स्टेट था। यहां के शासक नवाब को राजपुरोहित गद्दी पर बिठाते थे। यह देश की पहली ऐसी मुस्लिम रियासत थी, जिसमें परिवार के हर सदस्य की जन्मपत्री बनती थी। 
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बंटवारे के बाद रामपुर आए सिखों को रियासत ने जमीनें दीं और अपने भवन उन्हें सौंप दिए। मस्जिदें तामीर कराईं तो मंदिरों की भी आधारशिला रखी। मुस्लिम रियासत के गृह मंत्री हिंदु थे। रामपुर रियासत के शासकों द्वारा कायम भाईचारे की मिसाल देखना है तो रजा लाइब्रेरी की हामिद मंजिल देखिये। 
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इसके चार गुंबद हैं। इनमें एक मस्जिद, दूसरा मंदिर, तीसरा गुरुद्वारा और चौथा चर्च की तर्ज पर बना है। अब न रियासत रही और ही शासन, लेकिन कोशिश यही है की आपसी प्रेम और सद्भाव की परपंरा कायम रहे। 

उन्होंने कहा कि ब्रिटिश राज और उसके बाद स्वतंत्र भारत में भी राजघरानों का बेहद प्रभाव था। राजशाही के साथ जनता का समर्थन था। राजघरानों के प्रतिनिधि चुनाव जीतते थे। उनको देखने और सुनने के लिए भीड़ जुटती थी। इसीलिए सभी दलों के लीडर राजघरानों से खुद को असुरक्षित समझते थे और यही कारण है कि विलय के वक्त राजघरानों को दिए गए अधिकार छीन लिए गए। राजनीति में भी उन्हें पीछे धकेलने का प्रयास किया गया।

पूर्व मंत्री ने कहा कि रामपुर रजा लाइब्रेरी दुनियाभर में इस रियासत की पहचान है। रामपुर के नवाबों ने इल्म और अदब का ऐसा खजाना जमा किया है, जो कयामत तक लोगों को फायदा पहुंचाता रहेगा। यहां हजरत अली के हाथों से लिखा कुरान और बिस्मिल्ला से शुरू होने वाली वाल्मीकि रामायण है। हजारों पाण्डुलिपियां हैं। शोध के लिए बहुत कुछ है। 

उन्होंने कहा कि कला और संस्कृति के मामले में रामपुर का अतीत बहुत सुनहरा है। यह मिर्जा गालिब की धरती रही है। रामपुर-सहसवान घराना आज भी दुनियाभर में अपनी पहचान रखता है। दिल्ली और लखनऊ की बर्बादी के बाद रामपुर के नवाबों ने ही कलाकारों, फनकारों और अदीबों को सहारा दिया था। 

उन्होंने सवालों के जवाब में कहा कि शाही दस्तरख्वान की चर्चा के बगैर रामपुर रियासत के अतीत पर कोई भी गुफ्तगू मुकम्मल हो ही नहीं सकती। यहां के नवाब मेहमान नवाज थे। यहां दिल्ली और लखनऊ से अलग पकवान बनते थे। रामपुर में मुगलई खाने नहीं खाए जाते थे। यहां के कुक और उनका हुनर बेमिसाल था। उनके हाथों में स्वाद का जादू था और आज भी रामपुर के लोग अच्छा खाना खिलाते और खाते भी हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिया राजघरानों को मान-सम्मान 
गुजरात के दांता की राजकुमारी ख्याति सिंह के एक सवाल के जवाब में नवेद मियां ने प्रधानमंत्री मोदी की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि मैं इस चर्चा को राजनीतिक नहीं बनाना चाहता, लेकिन मैंने देखा है कि सिर्फ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही एकमात्र ऐसे नेता हैं जिन्होंने खुले मंचों और खुले मन से राजघरानों की प्रशंसा की है और उनके प्रभाव को मानते हुए मान सम्मान दिया है।

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