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Moradabad News: छात्रा को बुर्का पहनाने की आरोपी मुस्लिम छात्राओं को नहीं मिली राहत, याचिका खारिज

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 18 Apr 2026 02:32 AM IST
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Muslim students accused of forcing a student to wear a burqa did not get relief, petition dismissed
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बिलारी में एक छात्रा को जबरन बुर्का पहनाने और उस पर इस्लाम धर्म अपनाने का दबाव बनाने के मामले में आरोपी मुस्लिम छात्राओं को राहत देने से इन्कार कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि धर्म परिवर्तन निषेध अधिनियम जैसे महत्वपूर्ण कानूनों के उद्देश्य को शुरुआती चरण में हस्तक्षेप करके विफल नहीं किया जा सकता।
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कोर्ट ने प्राथमिकी रद्द करने की मांग में दायर याचिका खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि प्रथम दृष्टया यह मामला गहन जांच के योग्य है। यह आदेश न्यायमूर्ति जेजे मुनीर और न्यायमूर्ति तरुण सक्सेना की खंडपीठ ने दिया है।
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मुरादाबाद जिले के बिलारी थाना क्षेत्र में मुस्लिम छात्राओं के खिलाफ उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम, 2021 की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज है। पीड़िता के भाई ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि कक्षा 12 में पढ़ने वाली उसकी बहन की मुस्लिम सहेलियां ट्यूशन क्लास के दौरान प्रलोभन देकर उसे धर्म परिवर्तन के लिए मजबूर कर रही थीं।
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पीड़िता ने मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए अपने बयानों में खुलासा किया कि आरोपियों ने उसे जबरन बुर्का पहनाया और मांसाहारी भोजन करने के लिए उकसाया। आरोपी मुस्लिम छात्राओं ने दर्ज प्राथमिकी को रद्द करने की मांग करते हुए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी।
याची अधिवक्ता ने दलील दी कि यह प्राथमिकी पूरी तरह से प्रतिशोध की भावना से दर्ज कराई गई है और इसमें कोई सच्चाई नहीं है। हालांकि, अदालत ने केस डायरी में मौजूद साक्ष्यों, विशेष रूप से सीसीटीवी फुटेज का संज्ञान लिया, जिसमें पीड़िता को जबरन बुर्का पहनाए जाने के दृश्य दर्ज थे।

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दूसरों पर धर्म को थोपने जैसी प्रवृत्तियां चिंताजनक : हाईकोर्ट
न्यायालय ने टिप्पणी की कि वर्तमान समय में समाज में ऐसी प्रवृत्तियां चिंताजनक हैं, जहां धर्म को दूसरों पर थोपने का प्रयास किया जाता है। पीठ ने कहा कि युवाओं को इस उम्र में अपनी शिक्षा और राष्ट्र सेवा पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए, न कि ऐसी गतिविधियों में संलिप्त होना चाहिए। कोर्ट ने कहा कि अधिनियम के तहत प्रलोभन और अनुचित प्रभाव की परिभाषा अत्यंत व्यापक है और यह जांच का विषय है कि क्या याचिकाकर्ताओं के कृत्य इन श्रेणियों में आते हैं। जांच के बीच में हस्तक्षेप करने से इन्कार करते हुए हाईकोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक के अंतरिम आदेश को वापस ले लिया है।
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