{"_id":"65a70ba5af56028b9302df16","slug":"musafirkhana-opened-after-48-days-on-court-orders-moradabad-news-c-15-1-mbd1014-325052-2024-01-17","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: कोर्ट के आदेश पर 48 दिन बाद खुला मुसाफिरखाना","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: कोर्ट के आदेश पर 48 दिन बाद खुला मुसाफिरखाना
विज्ञापन
मुरादाबाद।
हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे स्टेशन के सामने मौजूद इस्लामिया मुसाफिरखाने को नगर निगम ने खोल दिया। नगर निगम ने गृहकर बकाया के आरोप में 23 नवंबर को मुसाफिरखाना को सील कर दिया था।
नगर निगम की तरफ से सीलबंद की कार्रवाई होने पर मुसाफिरखाना कमेटी के लोगों ने पहले स्थानीय अधिकारियों से गुहार लगाई। कोई राहत नहीं मिलने पर कमेटी के लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट से मुसाफिरखाना के पक्ष में निर्णय आया। इस मामले में कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए नगर निगम की टीम ने मंगलवार को मुसाफिरखाना को खोल दिया। ताला खुलने की जानकारी मिलने पर काफी लोगों ने खुशी जताई है।
इस बारे में मुसाफिरखाना के मैनेजर शाकिर उर्रहमान ने बताया कि यह मुसाफिरखाना गरीबों की सेवा के लिए सदियों पहले बनाया गया था। नगर निगम की तरफ जारी टैक्स के मामले में उन्होंने सात लाख रुपये जमा कर दिया था। अब छह लाख रुपये बाकी है लेकिन नगर निगम टैक्स को बढ़ाकर बता रहा है। कोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई को सही नहीं माना है। कमेटी के लोगों के प्रयास से हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया है। इस मामले में कमेटी से जुड़े इकरामुल शम्सी, अफीफ , महबूब अख्तर शम्सी ने काफी भागदौड़ की थी।
विज्ञापन
विज्ञापन
हाईकोर्ट के आदेश पर रेलवे स्टेशन के सामने मौजूद इस्लामिया मुसाफिरखाने को नगर निगम ने खोल दिया। नगर निगम ने गृहकर बकाया के आरोप में 23 नवंबर को मुसाफिरखाना को सील कर दिया था।
नगर निगम की तरफ से सीलबंद की कार्रवाई होने पर मुसाफिरखाना कमेटी के लोगों ने पहले स्थानीय अधिकारियों से गुहार लगाई। कोई राहत नहीं मिलने पर कमेटी के लोगों ने हाईकोर्ट की शरण ली। कोर्ट से मुसाफिरखाना के पक्ष में निर्णय आया। इस मामले में कोर्ट के आदेश का पालन करने के लिए नगर निगम की टीम ने मंगलवार को मुसाफिरखाना को खोल दिया। ताला खुलने की जानकारी मिलने पर काफी लोगों ने खुशी जताई है।
विज्ञापन
इस बारे में मुसाफिरखाना के मैनेजर शाकिर उर्रहमान ने बताया कि यह मुसाफिरखाना गरीबों की सेवा के लिए सदियों पहले बनाया गया था। नगर निगम की तरफ जारी टैक्स के मामले में उन्होंने सात लाख रुपये जमा कर दिया था। अब छह लाख रुपये बाकी है लेकिन नगर निगम टैक्स को बढ़ाकर बता रहा है। कोर्ट ने नगर निगम की कार्रवाई को सही नहीं माना है। कमेटी के लोगों के प्रयास से हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में निर्णय दिया है। इस मामले में कमेटी से जुड़े इकरामुल शम्सी, अफीफ , महबूब अख्तर शम्सी ने काफी भागदौड़ की थी।
विज्ञापन