सपा सांसद ने किया तीन तलाक का विरोध, बोले- सरकार को धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए
लोकसभा में तीन तलाक बिल को लेकर एक बार फिर बहस छिड़ गई है। केंद्र सरकार ने गुरुवार को तीसरी बार लोकसभा में इस बिल को पेश किया है। तीन तलाक बिल पर मुरादाबाद लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी के सांसद एसटी हसन ने सदन से बाहर आकर बिल के विरोध में बयान दिया। उन्होंने कहा कि मैं इस बिल के खिलाफ हूं। सरकार को किसी भी धर्म के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए।
ST Hasan, SP MP: I'm against Triple Talaq bill. Govt shouldn't interfere with internal matter of any religion. A small sect, followers of Abu Hanifa, practices Triple Talaq. Decision should be left with girl&her parents,if nikah receipt states they're(boy's side)followers of sect pic.twitter.com/EWcOPFE0p0
— ANI (@ANI) July 25, 2019विज्ञापन
उन्होंने कहा कि मुसलमानों का एक छोटा सा फिरका है जो हजरत अबू हनीफा को मानते हैं। सिर्फ यही फिरका एक साथ तीन तलाक को भी मानता है। इसलिए ऐसे मामलों में फैसला लड़की और उसके परिजनों के ऊपर छोड़ देना चाहिए कि वे अबू हनीफा को मानने वालों के यहां शादी करना चाहते हैं या नहीं।
ST Hasan, SP MP on Triple Talaq Bill: The criminality clause provides for 3-year-imprisonment & remuneration from man to the wife, how will he provide remuneration if he is in jail? A Muslim will go to jail for 3 years and others for 1 year, is this justice? https://t.co/TguF2keKiG
— ANI (@ANI) July 25, 2019
हसन ने कहा कि कानून के मुताबिक तीन तलाक देने वाले पुरुष को तीन साल की सजा देने का प्रवधान है। यदि आप किसी पुरुष को तीन तलाक पर तीन साल की सजा देते हैं तो फिर जेल में रहते हुए वह परिवार को गुजारा भत्ता कैसे देगा। क्या यह गलत नहीं है। यदि हिंदू और ईसाई पुरुषों को ऐसे मामले में महज एक साल की सजा का प्रावधान है तो फिर मुस्लिमों को तीन वर्ष की सजा क्यों।