UPSC Result: यूपी बस ड्राइवर के बेटे मोइन का यूपीएससी में चयन, साइबर कैफे चलाकर जमा किए रुपये; ऐसे मिली सफलता
मुरादाबाद में एक रोडवेज चालक के बेटे मोइन अहमद ने सिविल सेवा की परीक्षा पास कर ली है। साल 2019 से तैयारी कर रहे थे और आखिकार चौथे प्रयास में सफलता मिल गई। कभी साइबर कैफे चलाकर सिविल सर्विस की तैयारी के लिए रुपये जाम किए थे।
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डिलारी के गांव जटपुरा निवासी रोडवेज में संविदा बस चालक के बेटे मोइन अहमद ने सिविल सेवा की परीक्षा पास कर क्षेत्र का नाम रोशन किया है। संघ लोक सेवा आयोग यूपीएससी के परिणाम में मोइन ने 296वीं रैंक हासिल की है। मोइन को यह सफलता चौथे प्रयास में मिली है। उनके घर बधाई देने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं। मोइन के पिता बली हसन संविदा पर बस चालक हैं और परिवार के पालन-पोषण का पूरा दायित्व उन पर ही है।
5 भाई बहनों में दूसरे नंबर पर है मोइन
मोइन ने बताया कि उनकी मां तसलीम जहां गृहिणी हैं। वह चार भाई और एक बहन हैं। बड़े भाई निजी कंपनी में दिल्ली में नौकरी करते हैं और मोइन दूसरे नंबर पर है। उन्होंने बताया कि उनके पापा के पास जमीन नहीं है। दादा के नाम जो जमीन है, उससे मिलने वाली धनराशि परिवार की अन्य जिम्मेदारियों को पूरा करने में खर्च हो जाती है। परिवार में तमाम आर्थिक समस्याएं हैं, लेकिन उन्हें कभी इन परिस्थितियों से डर नहीं लगा। मोइन ने बताया कि जब वह बीएससी में पढ़ाई कर रहे थे तो करियर के बारे में सोचा करते थे। आसपास की समस्याओं को देखते हुए मेरे मन में सिविल सर्विस में जाने का विचार आया, लेकिन जब कोचिंग के बारे में सोचा तो आर्थिक समस्याएं सामने आ गईं। इससे निजात पाने के लिए वर्ष 2016 में मैंने साइबर कैफे शुरू किया। वर्ष 2018 तक साइबर कैफे के माध्यम से ही मैंने कोचिंग के लिए रुपये इकट्ठा किए और वर्ष 2019 में मैं दिल्ली चला गया।
रुपये खत्म होने पर लिया ढ़ाई लाख का लोन
मोइन ने बताया कि दिल्ली में रहने के दौरान उनके पास जो बचत के रुपये थे वह खर्च हो गए थे। वहां पर रहने और तैयारी में होने वाले खर्च को पूरा करने के लिए उन्होंने ढ़ाई लाख रुपये का लोन लिया। अब तक वह एक लाख रुपये चुका चुके हैं, जबकि डेढ़ लाख रुपये का लोन अभी भी बाकी है। मोइन ने कहा कि उन्हें हमेशा से जोखिम लेने की आदत है। जब वह साइबर कैफे चला रहे थे तो प्रत्येक महीने 30 से 40 हजार रुपये तक की आमदनी होने लगी थी, लेकिन उस आमदनी से संतुष्ट होने के बजाय उसे छोड़कर दिल्ली जाना चुना।
पहले तीन प्रयास में पास नहीं हो पाया प्रिलिम्स, चौथे में हुआ चयन
मोइन ने परास्नातक (राजनीति विज्ञान) से किया और फिर नेट जेआरएफ भी राजनीति विज्ञान से किया। सिविल सर्विस की परीक्षा के समय उन्होंने मुख्य विषय राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध को चुना। पहला प्रयास तैयारी शुरू करने के तीन महीने के अंदर दिया था, इसलिए उस वक्त कुछ समझ में नहीं आया पाया। दूसरे प्रयास में बहुत ज्यादा पढ़ लिया था। परीक्षा के दौरान हर प्रश्न ऐसा लग रहा था कि मैंने पढ़ा हुआ है। इसके कारण वह प्रयास भी विफल हो गया। वर्ष 2021 में तीसरे प्रयास में पेपर में पैटर्न बेसिक रहा था, जबकि उसको छोड़कर दूसरे स्तर को पढ़ा था। चौथे प्रयास में मैंने इन दोनों कमियों को दूर करते हुए चरणबद्ध तरीके से पढ़ाई की और सफलता प्राप्त की।
परिवार के इन दो लोगों ने हमेशा किया प्रेरित
मोइन ने बताया कि दिल्ली में मेरा संपर्क अतिया फाउंडेशन के साहिल खान और 2019 बैच के आईआरएएस आसिफ यूनुस से हुआ था। जब वह विफल होते थे तो मन में निराशा के भाव आते थे। साहिल खान आध्यात्मिक प्रवृत्ति के हैं तो वे हमेशा सकारात्मक विचारों से प्रोत्साहित करते थे। वह कहते थे कि तू ईमानदारी से मेहनत कर रहा है तो अल्लाह तुझे सफलता जरूर देगा। वहीं आसिफ यूनुस पढ़ाई के प्रबंधन से संबंधित मार्गदर्शन करते थे। जो टॉपिक मैं पढ़ता था, उनको एक बार वह समझाते थे।
जानकारी एकत्र करने के लिए किया सोशल मीडिया का सदुपयोग
मोइन ने बताया कि वह प्रतिदिन सात से आठ घंटे पढ़ते थे। जब मन बोझिल होता था तो सोशल मीडिया देखता था। मेरे सभी सोशल मीडिया एप पर प्रोफाइल हैं। उस पर मैंने सभी मंत्रालयों को फॉलो किया है। ऐसे में जब भी किसी मंत्रालय की कोई योजना या अन्य गतिविधि होती है तो मुझे नोटिफिकेशन मिल जाता है और सूचनाएं एकत्र होती हैं।
पूछा सवाल-मुरादाबाद के डीएम बन जाओगे तो क्या करोगे
मोइन ने बताया कि मेरा साक्षात्कार का समय करीब 40 मिनट रहा होगा। उस दौरान मुझसे तथ्यात्मक सवालों के बजाय समझ वाले सवाल ज्यादा थे। सबसे पहला सवाल था कि यदि मुझे मुरादाबाद के जिलाधिकारी के रूप में कार्य करने का मौका मिलता है तो मैं किन-किन क्षेत्रों में कार्य करूंगा। मैंने डाटा सहित गरीब, साक्षरता, बिजली, पानी और सड़क की समस्याएं बताईं और उन्हें दूर करना अपनी प्राथमिकता बताया। मैंने स्काउट-गाइड भी किया है तो दूसरा सवाल था कि स्काउट-गाइड में रहकर मैंने क्या सीखा। इस पर मैंने बताया कि टीम बिल्डिंग, रिस्क मैनेजमेंट, सर्वधर्म समभाव मैंने सीखा है। इसके अलावा ग्लासगो और जी-20 से संबंधित सवाल थे।
एक कॉल ने बदल दी जिंदगी
मोइन का कहना है कि शाम चार बजे से पहले मेरी जिंदगी बिल्कुल सामान्य थी। मेरे पिताजी मुरादाबाद-आगरा मार्ग पर बस चलाते हैं और बुधवार सुबह उनकी ड्यूटी है। मंगलवार को अवकाश होने की वजह से मेरे पिताजी गांव में ही किसी के घर बैठे थे। मैं अपने घर सो रहा था कि तभी मेरे फोन पर आसिफ यूनुस की कॉल आई कि यूपीएससी का परिणाम आ गया है और मेरा चयन हो गया है। मुझे 296वीं रैंक मिली है। मैंने उनको शुक्रिया अदा किया। कॉल कटने के बाद फोन देखा तो कई अन्य कॉल व बधाई संदेश पड़े हुए थे। इसके बाद से मेरा सबकुछ बदल गया है। लगातार लोग मुझे शुभकामनाएं देने आ रहे हैं। इसमें कुछ नेता मुझसे मिलने घर आए हैं, जबकि कई अधिकारियों के फोन भी आए हैं। इस पल की खुशी को शब्दों में बयां कर पाना मुश्किल है।
चुनौतियों से न डरें युवा
युवाओं के लिए मेरा यही संदेश है कि अपना लक्ष्य निर्धारित करो। यदि कोई रुकावट आए तो लक्ष्य से पीछे हटने के बजाय उस समस्या का समाधान खोजने का प्रयास करो। ऐसी कोई परेशानी नहीं है, जो हमारे लक्ष्य से हमें दूर कर सके। आवश्यकता जोखिल लेने की क्षमता को बढ़ाने और हौसलों को बनाए रखने की है। सफलता जरूर मिलेगी। उन्होंने कहा कि भविष्य में ग्रामीण पृष्ठभूमि के युवाओं के लिए यूट्यूब चैनल शुरू करूंगा, ताकि तैयारी से संबंधित सही जानकारी उन तक पहुंच सके।