फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Moradabad:  husband demanded ex-gratia but officer said last date has passed

मुरादाबाद : अनुग्रह राशि के आवेदन को पहुंचे पति से बोले अधिकारी- आखिरी तारीख निकल चुकी

Thu, 08 Jul 2021 03:06 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क,मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क,मुरादाबाद Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 08 Jul 2021 03:06 AM IST
सार

अंजला के इलाज के दौरान अपनी नौकरी गंवा चुके पति अनुराग सिंह के हिस्से में तीन बेटियों की जिम्मेदारी के साथ आया है 12 लाख का कर्ज।

विज्ञापन
Moradabad:  husband demanded ex-gratia but officer said last date has passed
अंजला की बेटियां... - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सब्र की इक हद भी होती है तवज्जो दीजिए, गर्म रक्खें कब तलक नारों से दस्तरखान को। अदम गोंडवी का ये शेर शिक्षामित्र अंजला के घर की कहानी और सरकार के वादों की हकीकत को बयान करने के लिए काफी है।

विज्ञापन


अजंला, जो पंचायत चुनाव के प्रशिक्षण से संक्रमण लेकर लौटीं और 56 दिन तक कोरोना से लड़ते हुए मौत से खुद को हार बैठीं। अंजला के इलाज के दौरान अपनी नौकरी गंवा चुके पति अनुराग सिंह के हिस्से में तीन बेटियों की जिम्मेदारी के साथ आया है 12 लाख का कर्ज। इन सबसे निपटने को एक उम्मीद बंधी थी
विज्ञापन


अनुग्रह राशि की। लेकिन पत्नी की मौत के महज नौ दिन बाद अनुग्रह राशि के आवेदन के  लिए पहुंचे पति के सामने सरकारी व्यवस्था सियाहा चेहरा सामने आया जब उनसे अधिकारियों कहा- आवेदन की आखिरी तारीख निकल चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


कटघर बीच छोटा छत्ता निवासी अंजला प्राथमिक विद्यालय सैनियों वाली मिलक मझरा देवापुर विकास खंड ठाकुरद्वारा में शिक्षामित्र के पद पर कार्यरत थीं। परिवार में 13 वर्षीय दो जुड़वा बेटियां और एक दस वर्षीय बेटी है। पति अनुराग सिंह एक निजी कंपनी में नौकरी कर परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। अंजला की पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगाई गई थी। उन्होंने 13 अप्रैल को राजकीय पॉलीटेक्निक में प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद उनकी तबीयत बिगड़ने लगी। 

अनुराग सिंह ने बताया कि 21 अप्रैल को कोरोना का टेस्ट कराया गया, जिसमें वह पॉजिटिव आईं। कुछ दिन घर में ही रहीं। लेकिन तबीयत बिगड़ी तो 30 अप्रैल को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 31 मई तक वह वहां भर्ती रहीं। 31 मई को भी उन्हें खांसी और सांस लेने में तकलीफ की दिक्कत थी, लेकिन चिकित्सकों ने उन्हें डिस्चार्ज कर दिया। घर लाने के दो घंटे बाद जब ज्यादा तबीयत खराब हुई तो अंजला को दूसरे अस्पताल में भर्ती कराया गया। 

वहां पर उनका आठ जून तक उपचार चला, लेकिन स्वस्थ नहीं हो सकीं। ऑक्सीजन का स्तर गिरने की वजह से उनका आठ जून को निधन हो गया। पति की जिंदगी को बचाने के लिए भाग दौड़ में लगे अनुराग की नौकरी भी चली गई। वह निजी कंपनी में कार्यरत थे। नौकरी जाने के बाद इलाज के दौरान उन पर 12 लाख रुपये का कर्ज हो गया। इस बीच सरकार ने कोरोना से जान गंवाने वालों के लिए अनुग्रह राशि देने की घोषणा की तो थोड़ी आस बंधी। लेकिन इस बार उनका सामना उस सरकारी व्यवस्था से था जो मुर्दों से भी गवाही मांगती है। अनुराग के मुताबिक बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा संक्रमण से निधन होने वाले शिक्षकों को अनुग्रह राशि दी जा रही है। इसमें आवदेन की तारीख 15 जून थी, लेकिन बेसिक शिक्षा विभाग, विद्यालय की प्रधानाचार्य और अधिकारियों की ओर से उन्हें अंतिम तिथि नहीं बताई गई।

पत्नी की अंतिम क्रिया के बाद होने वाली अन्य रस्मों को पूरा कर 17 जून को वह आवेदन करने पहुंचे तो अधिकारियों ने यह कहकर उन्हें लौटा दिया कि अंतिम तिथि निकल चुकी है। अब वह अनुग्रह राशि के लिए दफ्तरों में भटक रहे हैं। नौकरी छूट जाने के बाद उनके पास आय का कोई साधन नहीं है। बेटियों की जिम्मेदारी के बीच उनकी जरूरतें पूरी होने की चुनौतियां हैं। शिक्षा विभाग से लेकर जिम्मेदार अधिकारियों तक उनकी सुनवाई कोई नहीं कर रहा है। उन्होंने जिलाधिकारी से भी अनुग्रह राशि दिलवाने की मांग की है।


जिम्मेदारों के बयान..
अंजना के निधन की सूचना मैंने अधिकारियों को शिक्षा विभाग के व्हॉट्सएप ग्रुप में दे दी थी। अन्य शिक्षकों के निधन की सूचना भी इसी तरह व्हॉट्सएप ग्रुप पर दी गई थी। पहले बीमारी और बाद में अधिकारियों को निधन की सूचना दी थी। अनुग्रह राशि में आवेदन के लिए परिवार को खुद ही प्रयास करने होते हैं।
- नीतू गुप्ता, प्रधानाचार्य, प्राथमिक विद्यालय सैनियों वाली मिलक मझरा देवापुर

कोरोना संक्रमण से दम तोड़ने वाले सभी शिक्षकों के परिजनों से खंड शिक्षा अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से संपर्क करने के निर्देश दिए गए थे। विभाग में अनुग्रह राशि के आवेदन के लिए पत्र जारी किया था। पंचायत चुनाव की ड्यूटी में संक्रमित होकर दम तोड़ने वाले 51 शिक्षकों के नाम सूची में हैं। यदि परिजन जानकारी न होने की बात कह रहे हैं तो यह गलत है।

- योगेंद्र कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी

बेटियों की जरूरत उठाती हैं सवाल
प्रधानाचार्य जी, क्या ये मुमकिन है कि मौत के गम में डूबे परिवार को इन सारी कागजी कार्रवाइयों का होश हो। क्या हमारी मां के साथियों को मदद के लिए आगे नहीं आना चाहिए था। - बीएसए अंकल, हां हमारे घरवालों को जानकारी नहीं थी, क्योंकि हम मम्मी के इलाज  में लगे थे और उसके बाद उनके अंतिम संस्कार में, हमें पता होता कि आखिरी तारीख 15 जून है तो अपने आंसुओं को जल्दी सुखाकर आवेदन करने आ जाते।

अनुग्रह राशि के आवेदन की आखिरी तारीख निकल गई है। इसके बावजूद वह आवेदन कर दें। मैं उनके आवेदन को शासन को भेज दूंगा ताकि उन्हें सरकारी मदद मिल सके। 
- शैलेंद्र कुमार सिंह, डीएम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed