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पेड़ से बांधकर पीटे जा रहे किशोर बंदी..बूढ़े खा रहे जेल से बदतर दाल
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sat, 06 May 2017 02:27 AM IST
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minister gulabo devi inspection in moradabad
- फोटो : amar ujala
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योगी सरकार के मंत्री ताबड़तोड़ छापेमारी में जुटे हैं। इसी के तहत समाज कल्याण एवं अनुसूचित जाति/जनजाति राज्य मंत्री गुलाबो देवी शुक्रवार को दोपहर करीब एक बजे कांठ रोड स्थित बाल सुधार केंद्र (राजकीय सम्प्रेक्षण गृह, किशोर) में पहुंचीं।
इसकी जानकारी मिलते ही अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों ने बाल सुधार केंद्र की ओर दौड़ लगा दी। सुधार केंद्र में मंत्री सीधे उस कमरे में पहुंचीं जिसमें विभिन्न आरोपों में बंद किशोर रहते हैं।
मंत्री को देखकर कमरे में मौजूद किशोर और बच्चे पहले तो कुछ भयभीत हुए, लेकिन मंत्री ने जैसे ही सिर पर हाथ फेरा तो बच्चे फफक-फफक कर रोने लगे। मंत्री ने किशोरों के पीले पड़े चेहरे देखे तो पूछा कि तुम्हें खाने में क्या दिया जाता है। आरिफ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि नाश्ते में केवल एक पूरी दी जाती है।
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बच्चों के शरीर पर जख्म देखकर मंत्री बोलीं कि ये कैसे हुए तो चंदन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि बीमार होने पर केवल एक गोली दी जाती है। दवा चेक की तो मालूम हुआ कि सभी बीमारियों के लिए पैरासीटामोल की गोली देते हैं। बीमारी ठीक न होने के कारण कमरों में इंफैक्शन फैला हुआ है।
मारपीट के आरोप में बंद सोनू (बदला हुआ नाम) ने रो-रो कर बताया कि शिकायत करने पर पेड़ से बांधकर पीटा जाता है। घर से कोई परिजन मिलने आता है तो मिलने नहीं देते। परिजन पैसा देते हैं तो यहां के कर्मचारी खुद ही रख लेते हैं।
प्रदीप (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसे छोटी सी मारपीट में यहां भेज दिया गया है। बच्चों की दुर्दशा देखकर मंत्री ने सभी अधिकारियों को बुला लिया। सहायक अधीक्षक कुंवर राम ने बदहाली पर सफाई दी तो मंत्री ने जमकर फटकार लगा दी और कहा कि आप लोगों ने मजाक बना रखा है।
सरकार इतना पैसा खर्च करती है, लेकिन आप लोग सही जगह खर्च भी नहीं करते। मंत्री ने दोपहर का खाना मंगाया तो घुटे हुए चावल और जली हुई रोटियां देखीं। बच्चों ने बताया कि खाना खुद ही बनाया है। मंत्री ने पानी चेक किया तो पता चला कि आरओ खराब पड़ा है।
पीला पानी पीने को दिया जाता है। कुछ ही देर में उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी निर्मला तिवारी और जिला प्रोवेशन अधिकारी नरेश कुमार भी वहां पहुंच गए। मंत्री ने अधिकारियों को बच्चों की हालत दिखाई।
अधिकारियों ने बदहाली में सुधार के लिए कहा तो मंत्री ने कहा कि आप लोग जिम्मेदारी लेकर बैठे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मंत्री ने तत्काल वहां मौजूद अधिकारियों को हालात सुधारने के निर्देश दिए अन्यथा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
इसके बाद दोपहर करीब ढाई बजे मंत्री ने मिलन विहार स्थित वृद्धाश्रम में छापा मारा। यहां भी उस कमरे में पहुंची जहां वृद्ध महिलाएं रहती हैं। मंत्री ने उपस्थित रजिस्टर मांगा और हाजिरी लगानी शुरू कर दी। करीब एक दर्जन महिलाओं के नाम फर्जी मिले।
महिलाओं से मंत्री ने खाने की जानकारी ली तो बताया कि जेल से भी बदतर खाना दिया जाता है। मंत्री दोपहर का खाना मंगाया तो बहुत ही घटिया चावल वो भी जले हुए मिले। यहां मौजूद मैनेजर वीरा गंगवार और समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि जो खाना खुद नहीं खा सकते उसे वृद्धों को दिया जा रहा है।
रजिस्टर में दर्ज फर्जी नामों के बारे में मैनेजर वीरा गंगवार कोई जवाब नहीं दे सकीं। वीरा ने बताया कि वृद्धाश्रम का संचालन बरेली की संस्था दीपजन कल्याण समिति करती है। संस्था जो खाद्य सामग्री भेजती है वही खाने को दिया जाता है।
कुछ वृद्धों ने बताया कि कोई भी अधिकारी यहां की दुर्दशा को चेक करने नहीं आता। शिकायत करने पर यहां के कर्मचारी बुरा व्यवहार करते हैं। मंत्री ने माना कि एनजीओ के स्तर से ही गड़बड़ी की जा रही है।
क्योंकि आश्रम के संचालन के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा एनजीओ को धनराशि दी जाती है। मंत्री ने समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह को फर्जीवाडे़ की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान भाजपा नेता सुनीता शर्मा, चंद्रसैन कुमार, पराग कौशिक, अनुज कुमार, हेमंत चौधरी, हर्ष शर्मा, सुधांशु शर्मा आदि मौजूद थे।
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इसकी जानकारी मिलते ही अधिकारियों में भी हड़कंप मच गया। आनन-फानन में अधिकारियों ने बाल सुधार केंद्र की ओर दौड़ लगा दी। सुधार केंद्र में मंत्री सीधे उस कमरे में पहुंचीं जिसमें विभिन्न आरोपों में बंद किशोर रहते हैं।
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मंत्री को देखकर कमरे में मौजूद किशोर और बच्चे पहले तो कुछ भयभीत हुए, लेकिन मंत्री ने जैसे ही सिर पर हाथ फेरा तो बच्चे फफक-फफक कर रोने लगे। मंत्री ने किशोरों के पीले पड़े चेहरे देखे तो पूछा कि तुम्हें खाने में क्या दिया जाता है। आरिफ (बदला हुआ नाम) ने बताया कि नाश्ते में केवल एक पूरी दी जाती है।
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बच्चों के शरीर पर जख्म देखकर मंत्री बोलीं कि ये कैसे हुए तो चंदन (बदला हुआ नाम) ने बताया कि बीमार होने पर केवल एक गोली दी जाती है। दवा चेक की तो मालूम हुआ कि सभी बीमारियों के लिए पैरासीटामोल की गोली देते हैं। बीमारी ठीक न होने के कारण कमरों में इंफैक्शन फैला हुआ है।
मारपीट के आरोप में बंद सोनू (बदला हुआ नाम) ने रो-रो कर बताया कि शिकायत करने पर पेड़ से बांधकर पीटा जाता है। घर से कोई परिजन मिलने आता है तो मिलने नहीं देते। परिजन पैसा देते हैं तो यहां के कर्मचारी खुद ही रख लेते हैं।
प्रदीप (बदला हुआ नाम) ने बताया कि उसे छोटी सी मारपीट में यहां भेज दिया गया है। बच्चों की दुर्दशा देखकर मंत्री ने सभी अधिकारियों को बुला लिया। सहायक अधीक्षक कुंवर राम ने बदहाली पर सफाई दी तो मंत्री ने जमकर फटकार लगा दी और कहा कि आप लोगों ने मजाक बना रखा है।
सरकार इतना पैसा खर्च करती है, लेकिन आप लोग सही जगह खर्च भी नहीं करते। मंत्री ने दोपहर का खाना मंगाया तो घुटे हुए चावल और जली हुई रोटियां देखीं। बच्चों ने बताया कि खाना खुद ही बनाया है। मंत्री ने पानी चेक किया तो पता चला कि आरओ खराब पड़ा है।
पीला पानी पीने को दिया जाता है। कुछ ही देर में उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी निर्मला तिवारी और जिला प्रोवेशन अधिकारी नरेश कुमार भी वहां पहुंच गए। मंत्री ने अधिकारियों को बच्चों की हालत दिखाई।
अधिकारियों ने बदहाली में सुधार के लिए कहा तो मंत्री ने कहा कि आप लोग जिम्मेदारी लेकर बैठे हैं, लेकिन इस ओर कोई ध्यान नहीं है। मंत्री ने तत्काल वहां मौजूद अधिकारियों को हालात सुधारने के निर्देश दिए अन्यथा सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी।
इसके बाद दोपहर करीब ढाई बजे मंत्री ने मिलन विहार स्थित वृद्धाश्रम में छापा मारा। यहां भी उस कमरे में पहुंची जहां वृद्ध महिलाएं रहती हैं। मंत्री ने उपस्थित रजिस्टर मांगा और हाजिरी लगानी शुरू कर दी। करीब एक दर्जन महिलाओं के नाम फर्जी मिले।
महिलाओं से मंत्री ने खाने की जानकारी ली तो बताया कि जेल से भी बदतर खाना दिया जाता है। मंत्री दोपहर का खाना मंगाया तो बहुत ही घटिया चावल वो भी जले हुए मिले। यहां मौजूद मैनेजर वीरा गंगवार और समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह को फटकार लगाते हुए कहा कि जो खाना खुद नहीं खा सकते उसे वृद्धों को दिया जा रहा है।
रजिस्टर में दर्ज फर्जी नामों के बारे में मैनेजर वीरा गंगवार कोई जवाब नहीं दे सकीं। वीरा ने बताया कि वृद्धाश्रम का संचालन बरेली की संस्था दीपजन कल्याण समिति करती है। संस्था जो खाद्य सामग्री भेजती है वही खाने को दिया जाता है।
कुछ वृद्धों ने बताया कि कोई भी अधिकारी यहां की दुर्दशा को चेक करने नहीं आता। शिकायत करने पर यहां के कर्मचारी बुरा व्यवहार करते हैं। मंत्री ने माना कि एनजीओ के स्तर से ही गड़बड़ी की जा रही है।
क्योंकि आश्रम के संचालन के लिए समाज कल्याण विभाग द्वारा एनजीओ को धनराशि दी जाती है। मंत्री ने समाज कल्याण अधिकारी एके सिंह को फर्जीवाडे़ की जांच कर कार्रवाई के निर्देश दिए। इस दौरान भाजपा नेता सुनीता शर्मा, चंद्रसैन कुमार, पराग कौशिक, अनुज कुमार, हेमंत चौधरी, हर्ष शर्मा, सुधांशु शर्मा आदि मौजूद थे।