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बंद कंपनी में फर्श पर बन रही थीं दवाएं
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 16 Feb 2018 02:34 AM IST
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बंद कंपनी में बन रही थीं दवाएं
- फोटो : net image
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ड्रग अफसरों ने अधोमानक दवा बनाने संबंधी 68 तरह की अनियमितता मिलने पर जिस दवा कंपनी को नवंबर में बंद किया था, वह बृहस्पतिवार को धड़ल्ले से चलती मिली। डीएलओ के नेतृत्व में पांच जिलों की टीम ने कंपनी पर छापामारी की। अफसरों ने मौके पर दवा निर्माण होते पाया। करीब 20 लाख रुपये का दवा बनाने का सामान और तैयार दवा बरामद की गई हैं। इसके अलावा अधिकारियों को लाखों रुपये की दवा बिक्री का रिकार्ड मिला है। टीम को देखकर आठ-दस कर्मचारी भाग गए, जबकि तीन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। कंपनी को सील कर मालिक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई है।
महानगर के गलशहीद क्षेत्र में प्रिंस रोड पर डीके फार्मा टेबलेट के नाम से दवा कंपनी को अफसरों ने नवंबर में बंद करा दिया था। निरीक्षण में यह कंपनी 68 मानकों पर फेल पाई गई थी। ड्रग अफसरों के अनुसार यहां निर्मित दवाएं अधोमानक मिली थीं। उसके बाद कंपनी को नोटिस देकर बंद करा दिया गया था। कंपनी मालिक ने निर्धारित समय में नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसके बाद 19 दिसंबर को कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। अधिकारी लगातार सील लगाने के लिए कंपनी पर जाते रहे, लेकिन वहां पर मालिक के न मिलने से सील नहीं लगाई जा सकी। बृहस्पतिवार दोपहर अफसरों को जानकारी मिली कि कंपनी में दवाओं का निर्माण किया जा रहा है।
उसके बाद पांच जिलों के ड्रग अफसरों की टीम ने डीएलओ आरपी पांडे के नेतृत्व में छापामारी की। टीम को देखकर कंपनी का मालिक और आठ-दस कर्मचारी भाग निकले। तीन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। टीम को मौके पर मशीन चलती मिलीं। इनसे दवाओं का निर्माण किया जा रहा था। मौके से करीब 20 लाख रुपये का दवा बनाने का सामान बरामद किया। कंपनी में पांच तरह की तैयार दवाएं बरामद कीं। इनके सैंपल लेकर जांच को भेज दिए गए हैं। कंपनी के रिकार्ड को जब्त कर लिया गया है। इनमें दो कैशमीमों हैं। अधिकारियों के अनुसार लाखों रुपये की दवाओं की बिक्री कंपनी द्वारा बंदी के दौरान बनाकर की गई। अधिकारियों ने कंपनी मालिक राकेश कुमार ढाल को नामजद कर रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कंपनी को साल कर दिया गया है।
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महानगर के गलशहीद क्षेत्र में प्रिंस रोड पर डीके फार्मा टेबलेट के नाम से दवा कंपनी को अफसरों ने नवंबर में बंद करा दिया था। निरीक्षण में यह कंपनी 68 मानकों पर फेल पाई गई थी। ड्रग अफसरों के अनुसार यहां निर्मित दवाएं अधोमानक मिली थीं। उसके बाद कंपनी को नोटिस देकर बंद करा दिया गया था। कंपनी मालिक ने निर्धारित समय में नोटिस का जवाब नहीं दिया। इसके बाद 19 दिसंबर को कंपनी का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया। अधिकारी लगातार सील लगाने के लिए कंपनी पर जाते रहे, लेकिन वहां पर मालिक के न मिलने से सील नहीं लगाई जा सकी। बृहस्पतिवार दोपहर अफसरों को जानकारी मिली कि कंपनी में दवाओं का निर्माण किया जा रहा है।
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उसके बाद पांच जिलों के ड्रग अफसरों की टीम ने डीएलओ आरपी पांडे के नेतृत्व में छापामारी की। टीम को देखकर कंपनी का मालिक और आठ-दस कर्मचारी भाग निकले। तीन को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। टीम को मौके पर मशीन चलती मिलीं। इनसे दवाओं का निर्माण किया जा रहा था। मौके से करीब 20 लाख रुपये का दवा बनाने का सामान बरामद किया। कंपनी में पांच तरह की तैयार दवाएं बरामद कीं। इनके सैंपल लेकर जांच को भेज दिए गए हैं। कंपनी के रिकार्ड को जब्त कर लिया गया है। इनमें दो कैशमीमों हैं। अधिकारियों के अनुसार लाखों रुपये की दवाओं की बिक्री कंपनी द्वारा बंदी के दौरान बनाकर की गई। अधिकारियों ने कंपनी मालिक राकेश कुमार ढाल को नामजद कर रिपोर्ट दर्ज करा दी है। कंपनी को साल कर दिया गया है।
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