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Moradabad News: एमडीए की पुरानी संपत्तियां हो रहीं खंडहर...नहीं पड़ रही जिम्मेदारों की नजर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 21 Feb 2026 02:19 AM IST
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MDA's old properties are turning into ruins...responsible people are not paying attention
मुरादाबाद। एमडीए द्वारा दो दशकों के दौरान करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गईं योजनाओं के फ्लैट खंडहर हो रहे हैं, उनकी चिंता किसी को नहीं है। अफसरों की लापरवाही के कारण ही कई पुराने प्रोजेक्ट कबाड़ हो चुके हैं।
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एमडीए बोर्ड की बैठक में पुरानी योजनाओं पर चर्चा की गई है, कई की कीमतें फ्रीज कर दी गईं तो कुछ की कीमतों में 10 से 20 फीसदी तक कमी लाने के प्रस्ताव पर मोहर लगी है लेकिन अब तक उससे आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी है। पुरानी योजनाओं के अधिकतर लोगों को एमडीए से यही शिकायत है कि फ्लैट या प्लॉट बेचने के बाद मूलभूत सुविधाओं की निरंतरता बनाए रखने पर एमडीए ध्यान नहीं देता। अब नई योजना में पंजीकरण शुरू हो गया है, इस योजना में सेंट्रल पार्क, नक्षत्रशाला जैसे कई आकर्षण व शिक्षण संस्थान विकसित करने की बात कही जा रही है, यह तो भविष्य ही बताएगा कि यह योजना लोगों को पसंद आएगी या पुरानी योजनाओं जैसा ही इसका भी हश्र होगा।
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फोटो-1002
कम आय वालों का सपना हुआ जर्जर
- एमडीए की कम आय वर्ग (एलआईजी) के लिए करीब एक दशक पहले नया मुरादाबाद के सेक्टर 15 ए में करीब 200 दो रूम वाले फ्लैट तैयार किए गए लेकिन सात तो आवंटित ही नहीं हो सके, इससे पहले वह खंडहर होने लगे हैं। हालांकि इनका आवंटन अभी भी प्रथम पावक-प्रथम आवक के तौर पर किया जाना प्रस्तावित है। यह आवास जर्जर हो चुके हैं, इनके पास डंपिंग ग्राउंड बना लिया गया है। यही कारण है कि यहां कोई आवंटी रहता ही नहीं है. कुछ ने किराए पर दे दिया है। पिछले दिनों यहां एमडीए के उपाध्यक्ष ने निरीक्षण भी किया था, कूड़ा हटाने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन स्थिति एक महीने बाद भी जस की तस ही है। न तो कूड़ा हटा है और न ही फ्लैट को सही किया गया है।
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फोटो-1003
आवंटन से पहले ही खंडहर हुई सोनकपुर योजना
- करोड़ों रुपये खर्च करके एमडीए ने करीब 15 साल पहले सोनकपुर आवासीय योजना को विकसित किया। कांठ रोड से सटी हुई अच्छी लोकेशन पर 100 से अधिक फ्लैट बन गए लेकिन आज तक एक भी फ्लैट आवंटित नहीं हो सका। प्रति फ्लैट कीमत भी 14 लाख रुपये रखी गई थी। यहां का मामला कोर्ट में चला गया, जिसके कारण आवंटन नहीं हो सका। इसके बाद एमडीए ने इस योजना की देखरेख ही नहीं की, परिणाम यह हुआ कि करोड़ों की लागत से बने आवास खंडहर हो गए। यदि इनकी देखरेख व मरम्मत आदि होती रहती तो यह करोड़ों की संपत्ति बर्बाद न होती, अब इन फ्लैट को नई योजना में शामिल करने की तैयारी है।

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फोटो-1004
अरावली इन्क्लेव के 40 फीसदी फ्लैट खाली
-कमजोर आर्य वर्ग के लिए ही एमडीए ने एक दशक पहले मझोला में गाटा संख्या 750 पर 612 तीन मंजिला फ्लैट वाला अरावली इन्क्लेव विकसित किया गया था। शुरुआत दौर में ही कुछ तो आवंटित हुए लेकिन 40 फीसदी फ्लैट खाली रह गए। जिनका आवंटन आज तक नहीं हो सका। यहां भी देखरेख के अभाव में यह फ्लैट खंडहर हो गए। यह इन्क्लेव मझोला फल एवं सब्जी मंडी के निकट ही है, इसके बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अभाव रहा, जिसके कारण लोगों ने यहां रहने में रुचि नहीं दिखाई, जबकि ग्राउंड फ्लोर पर फ्लैट की कीमत 5.29 लाख व फर्स्ट फ्लोर व सेकेंड फ्लोर पर फ्लैट की कीमत इससे कम है।
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- सभी नपुरानी योजनाओं को लेकर बोर्ड की बैठक में चर्चा हुई है। उसी के आधार पर कार्यवाही की जाएगी।
- अनुभव सिंह, उपाध्यक्ष एमडीए।
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