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ट्रैक की खराब सेहत दे रही हादसों को निमंत्रण
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Sun, 26 Jun 2016 11:33 AM IST
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खराब रेलवे ट्रैक
- फोटो : demo
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मंडल में ट्रेन एक्सीडेंट की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। इन हादसों के लिए कई कारण जिम्मेदार हैं। सबसे अधिक महत्वपूर्ण कारण ट्रैक मेंटीनेंस के प्रति बरती जा ही सुस्ती है। इसको लेकर पिछले दिनों मुख्यालय से भी चर्चा हुई। जिसमें डीआरएम ने मेंटीनेंस के लिए अधिक समय की मांग की। अभी मंडल में ट्रैक के बडे़ हिस्सों को बदलने कई स्थान पर उसकी मरम्मत की जरूरत है। लेकिन मुख्यालय से समय देने बहुत अधिक समय देने को तैयार नहीं है। हालत ये है कि पिछले साल मिलने वाले ब्लाक तक पेंडिंग पड़े हुए हैं।
उत्तर रेलवे के पांच मंडलाें में ट्रेनों के समयबद्ध संचालन में सबसे पीछे चल रहा है। इसे सुधारने के लिए मुख्यालय भी दबाव बना रहा है। लेकिन मंडल मुख्यालय ट्रेनों को समय से चलाने के साथ ही सुरक्षित संचालन पर जोर दे रहा है। इसके लिए मंडल ब्लाक की मांग बढ़ी है। लेकिन मुख्यालय मंडल का मांग को नजरअंदाज कर रहा है। हालत यह है कि पिछले साल मांगे गए ब्लाक अभी तक नहीं मिल पाएं। जिसके चलते ट्रैक मेंटीनेंस में सुधार नहीं हो पा रहा है।
यही कारण है कि मंडल के 2700 किमी लंबे ट्रैक पर 100 से अधिक स्थान पर कासन लगाए जाते हैं। लेकिन इसमें बदलाव नहीं हो पाने के कारण न तो गाड़ियां रफ्तार पकड़ पा रही हैं और सफर असुरक्षित बन रहा है। चनहेटी के पास हुआ हादसा भी कुछ ऐसी ही कहानी कह रहा है।
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मुख्यालय से ट्रैक मेंटीनेंस के लिए लगातार ब्लाक की डिमांड भेजी जा रही है। लेकिन वे समय देने को तैयार नहीं है। मुरादाबाद में ट्रैक की स्थिति उत्तर रेलवे के सभी मंडलों में सबसे ज्यादा खराब है। ऐसे में उसकी तुलना उनसे नहीं की जानी चाहिए। एक बाद ट्रैक की मरम्मत हो जाए तो गाड़ियां सुरक्षित और समय पर चलेंगी। - प्रमोद कुमार, डीआरएम
मरम्मत के लिए लेना पड़ेगा ब्लाक
मुरादाबाद। मंडल में ट्रैक मेंटीनेंस के लिए बड़ी बड़ी मशीनें भी आई हैं। इसमें टीटीएम (ट्रैक ट्रैंपिंग मशीन), बीसीएम (बैलास स्क्रीनिंग मशीन) और ट्रैक रिन्युअल मशीन शामिल हैं। इन मशीनों को चलाने के लिए बड़े ब्लाक चाहिए। बड़े ब्लाक देने से गाड़ियां भी लेट होंगी। जिसके चलते इन मशीनों का भी प्रयोग नहीं हो पा रहा और पटरियां की भी जान निकलती जा रही है।
आठ साल से स्वीकृत कार्य नहीं हुए शुरू
मुरादाबाद। मंडल में 22 छोटे स्टेशनों पर लूप लाइन बिछाने का काम होना है। इसके लिए स्वीकृति भी 2008 से मिल हुई है। लेकिन बड़े ब्लाक लेने के कारण ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी के कारण कोई इन कामों में हाथ डालने को तैयार नहीं है। अब अगर इन सभी कामों को पूरा किया जाता है तो पूरा साल गाड़ियां समय से नहीं चल पाएंगी।
दो साल से ब्लाक का इंतजार
मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय बजट में स्वीकृति और और मंडल के लिए आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए मुख्यालय से ब्लाक मांगता है। इसके लिए पूरी प्लानिंग के साथ लिस्ट स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दी जाती है। लेकिन वहां भी लिस्ट धूल फांकती रहती है। हालत यह है कि दो साल पहले मांगे गए ब्लाक को स्वीकृति का इंतजार है।
यात्रियों की जान खतरे में
मुरादाबाद। एक मई को दिल्ली फैजाबाद एक्सप्रेस का हादसा भी ट्रैक टूटने के कारण ही हुआ था। इसमें सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। गनीमत रही कि ट्रेन की रफ्तार कम थी और स्थिति यात्रियों के पक्ष में रहीं। इस हादसे के बाद रेलवे को भी सोच बदलने को मजबूर होना पड़ा।
उत्तर रेलवे के पांच मंडलाें में ट्रेनों के समयबद्ध संचालन में सबसे पीछे चल रहा है। इसे सुधारने के लिए मुख्यालय भी दबाव बना रहा है। लेकिन मंडल मुख्यालय ट्रेनों को समय से चलाने के साथ ही सुरक्षित संचालन पर जोर दे रहा है। इसके लिए मंडल ब्लाक की मांग बढ़ी है। लेकिन मुख्यालय मंडल का मांग को नजरअंदाज कर रहा है। हालत यह है कि पिछले साल मांगे गए ब्लाक अभी तक नहीं मिल पाएं। जिसके चलते ट्रैक मेंटीनेंस में सुधार नहीं हो पा रहा है।
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यही कारण है कि मंडल के 2700 किमी लंबे ट्रैक पर 100 से अधिक स्थान पर कासन लगाए जाते हैं। लेकिन इसमें बदलाव नहीं हो पाने के कारण न तो गाड़ियां रफ्तार पकड़ पा रही हैं और सफर असुरक्षित बन रहा है। चनहेटी के पास हुआ हादसा भी कुछ ऐसी ही कहानी कह रहा है।
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मुख्यालय से ट्रैक मेंटीनेंस के लिए लगातार ब्लाक की डिमांड भेजी जा रही है। लेकिन वे समय देने को तैयार नहीं है। मुरादाबाद में ट्रैक की स्थिति उत्तर रेलवे के सभी मंडलों में सबसे ज्यादा खराब है। ऐसे में उसकी तुलना उनसे नहीं की जानी चाहिए। एक बाद ट्रैक की मरम्मत हो जाए तो गाड़ियां सुरक्षित और समय पर चलेंगी। - प्रमोद कुमार, डीआरएम
मरम्मत के लिए लेना पड़ेगा ब्लाक
मुरादाबाद। मंडल में ट्रैक मेंटीनेंस के लिए बड़ी बड़ी मशीनें भी आई हैं। इसमें टीटीएम (ट्रैक ट्रैंपिंग मशीन), बीसीएम (बैलास स्क्रीनिंग मशीन) और ट्रैक रिन्युअल मशीन शामिल हैं। इन मशीनों को चलाने के लिए बड़े ब्लाक चाहिए। बड़े ब्लाक देने से गाड़ियां भी लेट होंगी। जिसके चलते इन मशीनों का भी प्रयोग नहीं हो पा रहा और पटरियां की भी जान निकलती जा रही है।
आठ साल से स्वीकृत कार्य नहीं हुए शुरू
मुरादाबाद। मंडल में 22 छोटे स्टेशनों पर लूप लाइन बिछाने का काम होना है। इसके लिए स्वीकृति भी 2008 से मिल हुई है। लेकिन बड़े ब्लाक लेने के कारण ट्रेनों के संचालन में होने वाली देरी के कारण कोई इन कामों में हाथ डालने को तैयार नहीं है। अब अगर इन सभी कामों को पूरा किया जाता है तो पूरा साल गाड़ियां समय से नहीं चल पाएंगी।
दो साल से ब्लाक का इंतजार
मुरादाबाद। मंडल मुख्यालय बजट में स्वीकृति और और मंडल के लिए आवश्यक कार्यों को पूरा करने के लिए मुख्यालय से ब्लाक मांगता है। इसके लिए पूरी प्लानिंग के साथ लिस्ट स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेज दी जाती है। लेकिन वहां भी लिस्ट धूल फांकती रहती है। हालत यह है कि दो साल पहले मांगे गए ब्लाक को स्वीकृति का इंतजार है।
यात्रियों की जान खतरे में
मुरादाबाद। एक मई को दिल्ली फैजाबाद एक्सप्रेस का हादसा भी ट्रैक टूटने के कारण ही हुआ था। इसमें सैकड़ों यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई थी। गनीमत रही कि ट्रेन की रफ्तार कम थी और स्थिति यात्रियों के पक्ष में रहीं। इस हादसे के बाद रेलवे को भी सोच बदलने को मजबूर होना पड़ा।