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ये दवा थी या कंकड़ जो घुली ही नहीं
ब्यूरो/अमर उजाला मुरादाबाद
Updated Wed, 13 Jan 2016 07:22 PM IST
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अब जरा सोचिए कि ऐसी दवाएं भला कैसे राहत दे सकती हैं। तकलीफ में हर कोई यह सोचकर दवा खाता है कि उसे जल्द राहत मिल जाएगी। लेकिन यहां तो कई टैबलेट ऐसी हैं जो बीस मिनट तक घुलती ही नहीं हैं। अब यह भला कैसे आराम पहुंचा सकती हैं।
प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान दो टैबलेट ऐसी पाईं गईं जो घुल ही नहीं पा रही थीं। इनमें एक बुखार की है तो दूसरी एसिडिटी की है। और तो और संभल से इंजेक्शन के पानी का लिया गया नमूना भी फेल हो गया। प्रदेश भर में अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर माह में दवाओं के सैंपल भरे गए थे। ड्रग विभाग ने सभी सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला को भेजे थे।
इनमें बुखार, एसिडिटी और सिर दर्द की दवाएं थीं। कई सीरप और इंजेक्शन के भी सैंपल लिए गए थे। जो दवाएं घुली नहीं हैं उनमें ओमेप्रेजोल मैग्नीशियम और डोम्पेरिडोन हैं। यह दोनों टैबलेट कैडिला फार्मास्युटिकल लिमिटेड की हैं। इनमें एक टैबलेट का सैंपल गोंडा से भरा गया था जबकि दूसरे का नमूना खीरी से लिया गया था। इसी तरह डेक्नोफेनाक सोडियम और डिक्लोजी प्लस (पैरासीटामाल) भी नहीं घुली है।
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इसकी निर्माता कंपनी जी लैबोरेटरी लिमिटेड है। सहायक आयुक्त औषधि एके जैन ने बताया कि प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट के बाद निगरानी बढ़ा दी गई है। जिस बैच की यह दवाएं थीं उसे मार्केट से वापस लिया जा रहा है। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यह टैबलेट घुल ही नहीं पा रही हैं। बीस मिनट तक भी टैबलेट नहीं घुली थी। वहीं संभल से एक स्ट्राइल वाटर इंजेक्शन का सैंपल लिया गया था। वह नमूना भी फेल आया है। गुन्नौर तहसील में एक मेडिकल स्टोर से इसका नमूना लिया गया था।
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प्रयोगशाला में परीक्षण के दौरान दो टैबलेट ऐसी पाईं गईं जो घुल ही नहीं पा रही थीं। इनमें एक बुखार की है तो दूसरी एसिडिटी की है। और तो और संभल से इंजेक्शन के पानी का लिया गया नमूना भी फेल हो गया। प्रदेश भर में अगस्त, सितंबर, अक्तूबर और नवंबर माह में दवाओं के सैंपल भरे गए थे। ड्रग विभाग ने सभी सैंपल जांच के लिए लखनऊ प्रयोगशाला को भेजे थे।
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इनमें बुखार, एसिडिटी और सिर दर्द की दवाएं थीं। कई सीरप और इंजेक्शन के भी सैंपल लिए गए थे। जो दवाएं घुली नहीं हैं उनमें ओमेप्रेजोल मैग्नीशियम और डोम्पेरिडोन हैं। यह दोनों टैबलेट कैडिला फार्मास्युटिकल लिमिटेड की हैं। इनमें एक टैबलेट का सैंपल गोंडा से भरा गया था जबकि दूसरे का नमूना खीरी से लिया गया था। इसी तरह डेक्नोफेनाक सोडियम और डिक्लोजी प्लस (पैरासीटामाल) भी नहीं घुली है।
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इसकी निर्माता कंपनी जी लैबोरेटरी लिमिटेड है। सहायक आयुक्त औषधि एके जैन ने बताया कि प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट के बाद निगरानी बढ़ा दी गई है। जिस बैच की यह दवाएं थीं उसे मार्केट से वापस लिया जा रहा है। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि यह टैबलेट घुल ही नहीं पा रही हैं। बीस मिनट तक भी टैबलेट नहीं घुली थी। वहीं संभल से एक स्ट्राइल वाटर इंजेक्शन का सैंपल लिया गया था। वह नमूना भी फेल आया है। गुन्नौर तहसील में एक मेडिकल स्टोर से इसका नमूना लिया गया था।