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Moradabad News: तेंदुए कैद होंगे, ग्रामीण खौफ से आजाद...बस पिंजरा दिला दें माननीय

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 27 Aug 2026 01:54 AM IST
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Leopards will be caged, villagers freed from fear... Honourable Sir, just provide the cages.
मुरादाबाद। वन विभाग के एक अनुमान के मुताबिक मुरादाबाद जिले में 100 तेंदुए हैं। ठाकरद्वारा और कांठ क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावित है। अकेले ठाकुरद्वारा के 36 गांव ऐसे हैं जहां तेंदुआ देखा जा रहा है। जबकि कांठ क्षेत्र के 27 गांवों में आए दिन तेंदुआ पहुंच रहा है। वहीं डिलारी और भोजपुर के भी 37 गांव दहशत में है। हालांकि 7 अगस्त से 25 अगस्त के बीच वन विभाग 10 तेंदुए पिंजरों में कैद भी कर चुका है लेकिन हमले फिर भी हो रहे हैं। वन विभाग के पास केवल 48 पिंजरे हैं जबकि 50 की और जरूरत है। अब वन विभाग जनप्रतिनिधियों से पिंजरा दिलाने की मांग कर रहा है। एक पिंजरे पर करीब एक लाख 20 हजार की लागत आएगी। डीएफओ ने इसके लिए सभी विधायक और सांसदों को पत्र भेजे हैं।
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इस समय मुरादाबाद जिला आदमखोर तेंदुओं की दहशत में है। कोई दिन ही ऐसा बीत रहा होगा जब तेंदुआ कहीं हमला न करता हो। हर दिन हंगामे हो रहे हैं। जहां भी तेंदुए का हमला होता है वहां वन विभाग पिंजरा लगा देता है। लेकिन तेंदुआ प्रभावित गांवों की संख्या 100 है और विभाग के पास पिंजरे केवल 48 हैं। ग्रामीण गांवों में पिंजरा लगाने की मांग को लेकर प्रदर्शन करते हैं तो वन कर्मी एक स्थान का पिंजरा हटाकर दूसरी जगह लगा देते हैं। जहां से पिंजरा हटाया जाता है वहां के ग्रामीण हंगामा शुरू कर देते हैं। वह कहते हैं कि उनके यहां तेंदुआ आबादी तक पहुंच रहा है। डीएफओ डॉ. विनय कुमार सिंह के मुताबिक, जिला प्रशासन की ओर से चार पिंजरे उपलब्ध कराए गए हैं, जबकि तीन पिंजरे शुगर मिलों ने दिए हैं। शासन से भी 50 पिंजरों की मांग की गई है, लेकिन नए पिंजरे तैयार होकर मिलने में समय लग सकता है। इसी वजह से स्थानीय स्तर पर संसाधन जुटाने की कोशिश की जा रही है। कांठ, मुरादाबाद देहात, बढ़ापुर, बिजनौर और ठाकुरद्वारा के विधायकों के साथ ही सांसद रुचि वीरा को भी पत्र भेजा जा रहा है। कांठ रेंज के 12 गांवों में भी पिंजरे लगाए गए हैं। इनमें कुछ पिंजरे पड़ोसी जिलों से उधार लेकर लगाए हैं। वन विभाग का कहना है कि तेंदुओं की लगातार मौजूदगी वाले गांवों में निगरानी के साथ पिंजरों की संख्या बढ़ाना जरूरी है।
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तेंदुए को ट्रैंक्युलाइजर से पकड़ना गन्ने के खेतों में मुश्किल
सात अगस्त से 25 अगस्त तक वन विभाग ने 10 तेंदुए पकड़े हैं। ये सभी विभाग की ओर से लगाए गए पिंजरों में फंसे हैं। वहीं, पीलीभीत टाइगर रिजर्व और आगरा की एसओएस टीम अब तक तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज कर पकड़ने में सफल नहीं हो सकी हैं। इन टीमों के पास ट्रैंक्युलाइजर गन और थर्मल ड्रोन हैं। ड्रोन से तेंदुए की मौजूदगी का पता लगाया जा रहा है, लेकिन गन्ने के खेतों में उसे बेहोश करने में तकनीकी दिक्कत आ रही है। वन विभाग के अनुसार धान के खेत या खुले क्षेत्र में तेंदुए को ट्रैंक्युलाइज करना अपेक्षाकृत आसान होता है। गन्ने के खेतों में गन्ने की लंबी पत्तियों के कारण निशाना सटीक लगना मुश्किल है। ऐसे में डार्ट लगने की संभावना बेहद कम रहती है। तेंदुओं को पकड़ने के लिए वन विभाग ने बिजनौर से दो और ट्रैंक्युलाइजर गन मंगाई हैं।
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