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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Kanth railway gate Incident

कांठ रेलवे फाटक हादसा:  सदमे में बच्ची, अब मां-बाप का नाम बदला 

Sun, 24 Jul 2016 11:05 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Sun, 24 Jul 2016 11:05 AM IST
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Kanth railway gate Incident
हादसा - फोटो : अमर उजाला
 कांठ में रेलवे फाटक के पास मिली घायल बच्ची ने शनिवार को घटना के 6 दिन बाद दूसरी बार अपने मां-पिता का नाम बताया। इस बार बच्ची ने इनका नाम अलग बताया है। जबकि घटना के दूसरे दिन बच्ची ने अपना नाम राखी बताया था। जबकि मां का नाम सीता और पिता का नाम बलजीत बताया था। उसने उसका गांव का नाम स्योहारा है। लेकिन पुलिस को यहां इस नाम से कोई नहीं मिला। 
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 वहीं शनिवार को स्टाफ नर्स को बच्ची ने बताया कि उसकी मां का नाम अनीता और पिता का नाम प्रदीप है। इस बार बच्ची ने गांव का नाम नहीं बताया। कांठ थाना पुलिस और रेलवे पुलिस 17 जुलाई को हुए हादसे के बाद से ही मृत महिला, ढाई साल के बच्चे और घटना में बच गई राखी के परिजनों की तलाश कर रही है। 6 दिन बीत जाने के बाद भी अभी तक पुलिस को इस संबंध में कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। घटना में बच गई बच्ची जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती है। घटना में बच्ची का एक हाथ और पैर फैक्चर हो गया था। 
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ये है घटना
17 जुलाई को सुबह सवा सात बजे कांठ थाना के सामने अमरोहा मार्ग स्थित रेलवे क्रासिंग के पास एक महिला दो बच्चों के साथ बहुत देर से चक्कर लगा रही थी। इस दौरान यहां से एक मालगाड़ी को आता देख महिला आत्महत्या करने के इरादे से मालगाड़ी के आगे आ गई। वहां मौजूद लोगों ने उसे रोकने की कोशिश की थी। लेकिन महिला नहीं रूकी। इस घटना में महिला, ढाई साल के बच्चे की मौत हो गई थी। वहीं बच्ची राखी घायल हो गई थी। इस घटना के बाद राखी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था0। 
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शॉक में है राखी
जिला अस्पताल के डाक्टरों ने बताया कि राखी शॉक में है। इसी कारण को चुप रहती है। राखी कुछ भी पूछने पर कभी कभार ही जवाब देती है। शनिवार को बड़ी मुश्किल से उसने अपने मां और पिता का नाम बताया। गांव का नाम पूछने पर बच्ची चुप रही। 

नर्स कर रही बच्ची की देखभाल   
 राखी के साथ हुए हादसे के बारे में सुन कर स्टाफ नर्स उसकी देखरेख में कोई कसर नहीं छोड़तीं। राखी जो भी मांगती है, उसे स्टाफ नर्स अपने-अपने स्तर से पूरा कर रही हैं। राखी के पास खिलौनों की भी कोई कमी नहीं है। इसी लाड़-प्यारका परिणाम है कि बिल्कुल चुप रहने वाली राखी अब मुस्कुराने लगी है। 


 इस तरह का हादसा होता देखने वालों को एक्यूट पोर्ट ट्रोमीटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और अगर हादसा अपनों के साथ हो तो एक्यूट ग्रीफ एक्शन भी हो जाता है। इसमें भावनाएं व्यक्त करने की क्षमता समाप्त हो जाती है। व्यक्ति गुम हो जाता है। यह स्थित एक से दो सप्ताह तक रहती है। इसके बाद उसके दिमाग में घटना का दृश्य घूमने लगता है। ऐसे में उसे भावनात्मक सहयोग की जरूरत पड़ती है। 
डॉ. नीरज गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ 
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