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काल्पनिक प्यार किशोरों को बना रहा बीमार

Sat, 02 Apr 2016 03:10 AM IST
मोहम्मद सलाम खां/ मुरादाबाद ब्यूरो
मोहम्मद सलाम खां/ मुरादाबाद ब्यूरो Updated Sat, 02 Apr 2016 03:10 AM IST
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infatuation became sick to teenagers
love on mobile - फोटो : getty images
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केस-1

रोहित अपनी कक्षा का होनहार छात्र है। लेकिन अचानक वह पढ़ाई से जी चुराने लगा है। पिछले कुछ दिनों से वह गुमसुम रहने लगा है। उसके व्यवहार में भी बदलाव आ गया है। अभिभावक किशोर परामर्श केंद्र ले गए तो मामला प्यार मोहब्ब्त का निकला। 

 

केस -2

राहुल आजकल नशा करने लगा है। उसका व्यवहार हिंसक हो गया है। वह सही गलत में फर्क नहीं कर पा रहा है। जबकि पहले ऐसा नहीं था। उनके अंदर ये बदलाव कुछ महीनों से आया है। काउंसलर के काफी कुरेदने पर उसने अपने मन की बात बताई। इसका भी मामला अट्रैक्शन का प्यार वाला निकला।

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यह सिर्फ रोहित और राहुल का मामला नहीं है। बचपन की दहलीज लांघकर किशोरावस्था की सीढ़ियों तक पहुंचने वाले ऐसे किशोर हमारे-आपके किसी भी घर में हो सकते हैं। छात्रा का जरा सा हंसकर बोलना, फेसबुक और व्हाट्सएप पर चैटिंग के जरिए जताए गए सहानुभूति या तारीफ के शब्द उसे इस गफलत में डाल देते हैं कि वह उससे ‘सच्चा प्यार’ करती है।
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इसके बाद किशोर कल्पना की दुनिया में गोते लगाने लगता है। हार्मोन्स की अति सक्रियता, शारीरिक बदलाव, विपरीत लिंग के प्रति प्रबल आकर्षण के साथ इस उम्र के बगावती तेवर उसे असामान्य कदम भी उठाने को दुष्प्रेरित करने लगते हैं।

लेकिन जब ऐसे किशोरों का सामना हकीकत से होता है तो उनकी कल्पना का महल ढहने लगता है और वे डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं। पढ़ाई तक प्रभावित होने लगती है। वे खुद को प्यार में छला मानने लगते हैं। ऐसा समझने लगते हैं कि अपनों के समेत पूरी दुनिया ही उनकी दुश्मन हो।

कुछ नशे का सहारा लेने लगते हैं तो कुछ आत्मघाती कदम भी उठा लेते हैं। मनोविज्ञान के विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर इस उम्र में किशोरों को सही ढंग से गाइड नहीं किया गया तो यही प्रबल आकर्षण उन्हें असामान्य और बीमार बना सकता है। किशोरियों की अपेक्षा किशोरों में इस तरह की प्रवृत्ति ज्यादा देखी गई है।

 
काउंसलर नेत्रपाल सिंह बताते हैं कि किशोरावस्था में अभिभावकाें को बच्चों पर अधिक ध्यान देने की जरूरत है। इस अवस्था में किशोर खुद को डिसीजन मेकर समझने लगते हैं। साथ में पढ़ने वाली छात्रा के बात व्यवहार को प्यार मानने लगते हैं। सच्चाई सामने आने पर उन्हें झटका लगता है। ऐसे किशोर डिप्रेशन के शिकार हो जाते हैं।
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