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Moradabad News: इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की बैठक में जीएसटी का मुद्दा छाया रहा
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मुरादाबाद। डिस्ट्रिक्ट इनकम टैक्स बार एसोसिएशन की बैठक में जीएसटी कानूनों का मुद्दा छाया रहा। अधिवक्ताओं ने जीएसटी कौंसिल की तरफ से कारोबारियों को दी गई राहत के बारे में चर्चा की। बताया कि समय से टैक्स से बचने के लिए जीएसटी और इनकम टैक्स का भुगतान करना आवश्यक है।
रामगंगा विहार स्थित एक रेस्टोरेंट में एसोसिएशन की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक के दौरान अधिवक्ता शिशिर गुप्ता ने जीएसटी कौंसिल के निर्णयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार हटाया गया है। ईमानदार करदाता के लिए यह सबसे बड़ी राहत है। मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। अब छोटे विवादों में आपराधिक कार्रवाई का जोखिम कम होगा।
सामान्य जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर दस हजार रुपये किया गया
अधिवक्ताओं ने बताया कि देर से रिटर्न भरने, अनजाने में गलती करने या भुगतान में देरी करने वाले करदाताओं को सिर्फ़ टैक्स, ब्याज और अनुपातिक जुर्माना देना होगा। इन मामलों में कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। यदि टैक्स की मांग दस हजार रुपये से कम है, तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। नोटिस से पहले करदाता को सूचना दी जाएगी। उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अधिवक्ता गौरव गुप्ता ने ब्याज माफी योजना के बारे में अवगत कराया। बताया कि मूल बकाया राशि जमा करने पर बकाए की कुल राशि के आधार पर ब्याज माफी का लाभ मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारियों को पहले बकाया मूलधन, ब्याज और अर्थदंड की गणना कर ऑनलाइन जमा करना होगा। डिमांड गलत होने पर अपील करने का अधिकार होगा। अधिवक्ता क्षितिज शर्मा ने बताया कि आरसीएम के मामलों में कर देयता की सही पहचान, समय पर कर भुगतान, आवश्यक अभिलेखों का रखरखाव, आईटीसी का नियमानुसार दावा करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक की अध्यक्षता राजीव कुमार रस्तोगी और संचालन अतुल सक्सेना ने किया। इस दौरान उपदेश चंद्र अग्रवाल,राकेश कुमार शर्मा ,विकास गोयल,नीरज भटनागर, अतुल सक्सेना,शाहिद हुसैन,प्रवीण रावत, हरिशंकर पाल आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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रामगंगा विहार स्थित एक रेस्टोरेंट में एसोसिएशन की बैठक शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक के दौरान अधिवक्ता शिशिर गुप्ता ने जीएसटी कौंसिल के निर्णयों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। बताया कि सीजीएसटी एक्ट की धारा 69 के तहत गिरफ्तारी का अधिकार हटाया गया है। ईमानदार करदाता के लिए यह सबसे बड़ी राहत है। मुकदमा शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये कर दी गई है। अब छोटे विवादों में आपराधिक कार्रवाई का जोखिम कम होगा।
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सामान्य जुर्माना 25 हजार रुपये से घटाकर दस हजार रुपये किया गया
अधिवक्ताओं ने बताया कि देर से रिटर्न भरने, अनजाने में गलती करने या भुगतान में देरी करने वाले करदाताओं को सिर्फ़ टैक्स, ब्याज और अनुपातिक जुर्माना देना होगा। इन मामलों में कोई आपराधिक कार्रवाई नहीं होगी। यदि टैक्स की मांग दस हजार रुपये से कम है, तो कोई कारण बताओ नोटिस जारी नहीं किया जाएगा। नोटिस से पहले करदाता को सूचना दी जाएगी। उन्हें अपनी बात रखने का मौका मिलेगा। अधिवक्ता गौरव गुप्ता ने ब्याज माफी योजना के बारे में अवगत कराया। बताया कि मूल बकाया राशि जमा करने पर बकाए की कुल राशि के आधार पर ब्याज माफी का लाभ मिलेगा। योजना का लाभ लेने के लिए व्यापारियों को पहले बकाया मूलधन, ब्याज और अर्थदंड की गणना कर ऑनलाइन जमा करना होगा। डिमांड गलत होने पर अपील करने का अधिकार होगा। अधिवक्ता क्षितिज शर्मा ने बताया कि आरसीएम के मामलों में कर देयता की सही पहचान, समय पर कर भुगतान, आवश्यक अभिलेखों का रखरखाव, आईटीसी का नियमानुसार दावा करना अत्यंत आवश्यक है। बैठक की अध्यक्षता राजीव कुमार रस्तोगी और संचालन अतुल सक्सेना ने किया। इस दौरान उपदेश चंद्र अग्रवाल,राकेश कुमार शर्मा ,विकास गोयल,नीरज भटनागर, अतुल सक्सेना,शाहिद हुसैन,प्रवीण रावत, हरिशंकर पाल आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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