{"_id":"578f68a74f1c1b7244c4b4d7","slug":"halima-is-admitted-in-district-hospital-last-one-year","type":"story","status":"publish","title_hn":"अस्पताल में भर्ती हलीमा का बजरंगी भाईजान कौन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अस्पताल में भर्ती हलीमा का बजरंगी भाईजान कौन
रंजीत ठाकुर /अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Wed, 20 Jul 2016 05:34 PM IST
विज्ञापन
हादसा
- फोटो : demo
फिल्म बजरंगी भाई जान में अपने घर से बिछड़ गई मुन्नी को तो बजरंगी भाई जान ने तमाम मुसीबतों के बावजूद उसके घर पहुंचा दिया था, लेकिन जिला अस्पताल में एक साल से अपने घर जाने को बेचैन हलीमा की मदद को कोई बजरंगी भाई जान आगे नहीं आ रहा।
जिला अस्पताल में 30 जून 2015 की रात एक महिला को दुर्घटना के बाद बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया था। दुर्घटना में महिला का एक पैर फैक्चर हो गया था। डॉक्टरों ने उसकी हड्डी जोड़ने की कोशिश की लेकिन वह चलने में कामयाब नहीं हो पाई। महिला आज भी जिला अस्पताल के महिला हड्डी वार्ड में बेड नंबर 8 पर भर्ती है। डाक्टरों ने उसे डिस्चार्ज तो कर दिया लेकिन महिला यहां से कहीं गई नहीं।
महिला ने बताया कि उसका नाम हलीमा है। वह हैदराबाद के मोकिला गांव की रहने वाली है। वह वह ट्रेन से अपने किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी। गलती से ट्रेन से मुरादाबाद पहुंच गई थी। यहां रेलवे स्टेशन के बाहर आने के बाद उसका एक्सीडेंट हो गया था। उसके पिता का नाम गोरे मियां और मां का नाम अमीना है। उसके दो बहन और दो भाई हैं। दो साल पहले पति गुजर गया। उसका ससुराल हैदराबाद के कोंडापुर गांव में है। इसके अलावा उसे और कुछ याद नहीं है। अस्पताल में हलीमा वाकर के सहारे चलती है। उसने बताया कि मदद नहीं मिलने के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही है। वह जाना चाहती है, लेकिन कोई मददगार मिल जाए।
विज्ञापन
बेटे की आती है याद
हलीमा ने बताया कि उसका एक बेटा भी है। वह अब पांच साल का हो गया होगा। उसकी बहुत याद आती है। उससे मिलने के लिए अब वह अपने घर जाना चाहती है। उसके बेटे का नाम दस्तगीर है।
पिता ने भी छोड़ा साथ
पति की मौत के बाद वह अपने मायके आकर रहने लगी थी। कुछ समय बाद ही उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। पिता अपने नई पत्नी के साथ हैदाराबाद जाकर बस गए। गांव में हलीमा उसकी मां और भाई-बहन रह गये।
नारी निकेतन में नहीं जाना चाहती
हलीमा ने बताया कि उसे किसी तरह अपने घर जाना है। उसे बेटे से मिलना है। वह किसी संस्था या आश्रम में नहीं जाना चाहती। उसे उसका परिवार खोज रहा होगा। लेकिन अभी तक उसकी मदद को कोई भी नहीं आया। पैसे के अभाव और चल नहीं पाने के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही है। अन्य मरीजों की मदद से उसके पास कुछ कपड़े और जरूरत की कुछ चीजें हैं।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में 30 जून 2015 की रात एक महिला को दुर्घटना के बाद बेहोशी की हालत में भर्ती कराया गया था। दुर्घटना में महिला का एक पैर फैक्चर हो गया था। डॉक्टरों ने उसकी हड्डी जोड़ने की कोशिश की लेकिन वह चलने में कामयाब नहीं हो पाई। महिला आज भी जिला अस्पताल के महिला हड्डी वार्ड में बेड नंबर 8 पर भर्ती है। डाक्टरों ने उसे डिस्चार्ज तो कर दिया लेकिन महिला यहां से कहीं गई नहीं।
विज्ञापन
महिला ने बताया कि उसका नाम हलीमा है। वह हैदराबाद के मोकिला गांव की रहने वाली है। वह वह ट्रेन से अपने किसी रिश्तेदार के घर जा रही थी। गलती से ट्रेन से मुरादाबाद पहुंच गई थी। यहां रेलवे स्टेशन के बाहर आने के बाद उसका एक्सीडेंट हो गया था। उसके पिता का नाम गोरे मियां और मां का नाम अमीना है। उसके दो बहन और दो भाई हैं। दो साल पहले पति गुजर गया। उसका ससुराल हैदराबाद के कोंडापुर गांव में है। इसके अलावा उसे और कुछ याद नहीं है। अस्पताल में हलीमा वाकर के सहारे चलती है। उसने बताया कि मदद नहीं मिलने के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही है। वह जाना चाहती है, लेकिन कोई मददगार मिल जाए।
विज्ञापन
बेटे की आती है याद
हलीमा ने बताया कि उसका एक बेटा भी है। वह अब पांच साल का हो गया होगा। उसकी बहुत याद आती है। उससे मिलने के लिए अब वह अपने घर जाना चाहती है। उसके बेटे का नाम दस्तगीर है।
पिता ने भी छोड़ा साथ
पति की मौत के बाद वह अपने मायके आकर रहने लगी थी। कुछ समय बाद ही उसके पिता ने दूसरी शादी कर ली। पिता अपने नई पत्नी के साथ हैदाराबाद जाकर बस गए। गांव में हलीमा उसकी मां और भाई-बहन रह गये।
नारी निकेतन में नहीं जाना चाहती
हलीमा ने बताया कि उसे किसी तरह अपने घर जाना है। उसे बेटे से मिलना है। वह किसी संस्था या आश्रम में नहीं जाना चाहती। उसे उसका परिवार खोज रहा होगा। लेकिन अभी तक उसकी मदद को कोई भी नहीं आया। पैसे के अभाव और चल नहीं पाने के कारण वह अपने घर नहीं जा पा रही है। अन्य मरीजों की मदद से उसके पास कुछ कपड़े और जरूरत की कुछ चीजें हैं।