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स्मार्ट सिटीः हवा-हवाई नहीं, धरातल दिखे काम
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
Updated Fri, 10 Jun 2016 10:51 AM IST
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स्मार्ट सिटी
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स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट पर दिल्ली में हुई बैठक में प्रस्ताव में शामिल सभी बिंदुओं पर तथ्यात्मक और मजबूती के साथ विकास की संभावनाओं पर जोर दिया। स्पष्ट दिशा-निर्देश दिए गए हैं कि विकास के हवा-हवाई बिंदुओं को शामिल नहीं किया जाए। जो भी तथ्य रखे जाएं उनके साथ उसके कागजात भी लगें ताकि धरातल पर कुछ दिखाई देता हुआ लगे।
स्मार्ट सिटी के लिए महानगर के लोगों ने वोटिंग के लिए एरिया नंबर वन को स्मार्ट बनाने के लिए वोटिंग के जरिए चुना है।
स्थानीय स्तर पर कंसलटेंट एजेंसी जेएलएल की देखरेख में प्रपोजल तैयार कर लिया गया था। आठ जून को दिल्ली में आयोजित बैठक में नगर आयुक्त संजय कुमार सिंह और स्मार्ट सिटी के प्रभारी टीएन मिश्रा लखनऊ गए। दिल्ली में स्मार्ट सिटी के प्रपोजल का टाउन प्लानरों ने बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद कई दिशा निर्देश दिए। इसमें सबसे खास यह समझाया गया कि जिस एरिया के विकास के लिए वोटिंग में चयन हुआ है, वहां के लिए विकास का जो खाका खींचा गया है, उसमें कुछ भी हवा हवाई नहीं होना चाहिए।
यदि पार्किंग के लिए जमीन चाहिए तो उसके कागजात भी लगाने होंगे। यदि कहीं जमीन को पत्राचार चल रहा है तो उस पत्राचार की प्रतिलिपि भी प्रपोजल में लगेगी। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत कोई कार्य कराया जाना है तो उसका भी प्रमाणिक विवरण दर्ज होगा।
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सभी विभागों से मांगे गए दस्तावेज
स्मार्ट सिटी के प्रपोजल को दिल्ली की बैठक के अनुरूप अपडेट करने के लिए सभी विभागों से दस्तावेज मांगे गए हैं। जैसे स्मार्ट ट्रैफिकिंग के लिए सबसे अधिक वोट हुए हैं तो स्मार्ट ट्रैफिकिंग के लिए यातायात पुलिस की ओर से अब तक किए गए कार्य और आगे किए जाने वाले कार्यों का विवरण, सुरक्षा को लेकर व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण के अलावा विकास के जो भी बिंदु प्रस्तुत किए थे उन के दस्तावेज मांगे गए हैं।
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स्मार्ट सिटी के लिए महानगर के लोगों ने वोटिंग के लिए एरिया नंबर वन को स्मार्ट बनाने के लिए वोटिंग के जरिए चुना है।
स्थानीय स्तर पर कंसलटेंट एजेंसी जेएलएल की देखरेख में प्रपोजल तैयार कर लिया गया था। आठ जून को दिल्ली में आयोजित बैठक में नगर आयुक्त संजय कुमार सिंह और स्मार्ट सिटी के प्रभारी टीएन मिश्रा लखनऊ गए। दिल्ली में स्मार्ट सिटी के प्रपोजल का टाउन प्लानरों ने बारीकी से अध्ययन किया। इसके बाद कई दिशा निर्देश दिए। इसमें सबसे खास यह समझाया गया कि जिस एरिया के विकास के लिए वोटिंग में चयन हुआ है, वहां के लिए विकास का जो खाका खींचा गया है, उसमें कुछ भी हवा हवाई नहीं होना चाहिए।
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यदि पार्किंग के लिए जमीन चाहिए तो उसके कागजात भी लगाने होंगे। यदि कहीं जमीन को पत्राचार चल रहा है तो उस पत्राचार की प्रतिलिपि भी प्रपोजल में लगेगी। पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) के तहत कोई कार्य कराया जाना है तो उसका भी प्रमाणिक विवरण दर्ज होगा।
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सभी विभागों से मांगे गए दस्तावेज
स्मार्ट सिटी के प्रपोजल को दिल्ली की बैठक के अनुरूप अपडेट करने के लिए सभी विभागों से दस्तावेज मांगे गए हैं। जैसे स्मार्ट ट्रैफिकिंग के लिए सबसे अधिक वोट हुए हैं तो स्मार्ट ट्रैफिकिंग के लिए यातायात पुलिस की ओर से अब तक किए गए कार्य और आगे किए जाने वाले कार्यों का विवरण, सुरक्षा को लेकर व्यवस्था, प्रदूषण नियंत्रण के अलावा विकास के जो भी बिंदु प्रस्तुत किए थे उन के दस्तावेज मांगे गए हैं।