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Moradabad News: शराब का बढ़ता दौर, युवाओं के दिमाग को कर रहा कमजोर

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 03 Apr 2023 01:44 AM IST
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Growing trend of alcohol, weakening the mind of the youth
मुरादाबाद। कभी पार्टी तो कभी तनाव को दूर करने के नाम पर युवाओं का शराब पीना आम हो गया है। कुछ स्टेट्स सिंबल मानकर शराब शुरू करते हैं और फिर लत बन जाती है। शराब का बढ़ता दौर युवाओं के दिमाग को कमजोर कर रहा है। यहयुवाओं के लिए यह खतरे की घंटी है। चिकित्सकों का कहना है कि अल्कोहल का दिमाग पर असर डिमेंशिया (याद न रहने की बीमारी) के खतरे तक पहुंचा देता है।
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चिकित्सकों का कहना है कि ओपीडी में दस में से दो ऐसे मरीज आ रहे हैं, जिनको याददाश्त या एकाग्रता की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन मानसिक समस्याओं से संबंधित करीब 60 मरीज आते हैं। चिकित्सकों का कहना है कि लोगों में जागरूकता का अभाव है। खासकर युवाओं को लगता है कि सप्ताह में दो-तीन बार शराब पीने से स्वास्थ्य को कोई खतरा नहीं होता है, जबकि शराब का दिमाग पर दुष्प्रभाव शराब की मात्रा से नहीं, बल्कि डि्रकिंग पैटर्न से अधिक पड़ता है। शराब पीकर होश गंवाने वाले युवाओं को फॉरगेट फुलनेस बीमारी होती है। यह डिमेंशिया का पहला चरण है। इसमें युवाओं को चीजों को भूलने और नया कुछ याद करने में बहुत परेशानी होती है।
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केस नंबर एक
कांशीराम नगर निवासी 26 वर्षीय युवक को अकेले रहना ज्यादा पसंद था। जब भी वह किसी से मिलता था तो उसे बेचैनी होने लगती थी, क्योंकि वह बातों को याद नहीं रख पाता था। काउंसिलिंग में चिकित्सकों को पता चला कि उसके पिता शराब पीते हैं। वह रात में उनकी बोतल से ही शराब पीने लगा था और इसका दुष्प्रभाव उसकी एकाग्रता पर पड़ा था। पिछले छह महीने से जिला अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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केस नंबर दो
नवीन नगर निवासी 29 वर्षीय युवक ने बताया कि वह दिल्ली में ब्रांच मैनेजर के पद पर तैनात है। वहां पर बिजनेस से संबंधित पार्टी में शराब का सेवन आम बात हो गई थी। पिछले दो वर्ष से उसे चीजों को रखकर भूलने की समस्या हो गई। शुरुआत में उसे लगा कि कोरोना संक्रमण काल में नौकरी को लेकर हुए तनाव की वजह से ऐसा हो रहा है, लेकिन जब यह परेशानी बढ़ी तो चिकित्सक को दिखाया। तब पता चला कि शराब की वजह से उसे समस्या हुई है। पिछले एक वर्ष से उसका उपचार चल रहा है।

लक्षण
लोगों के नाम को लेकर असमंजस में रहना, चश्मा, पेन, चाबी आदि जैसी चीजों को रखकर भूल जाना, पैसों का हिसाब न लगा पाना, नई जानकारी याद न रहना, छोटे-छोटे काम करने में घबराना, अकेले रहना पसंद करना आदि।


वर्जन...
युवाओं में बढ़ती इस बीमारी को फॉरगेट फुलनेस बीमारी कहा जाता है। यह डिमेंशिया का शुरुआती चरण है। पिछले दिनों कई ऐसे मामले आए जहां पर अन्य परिजन उपचार के लिए आए और काउंसिलिंग में पता चला कि उनके बेटे या पति शराब के आदी हैं और उनको यह परेशानी है। इसके बाद दोनों की काउंसिलिंग की गई। यह दिनचर्या बदलने से और पौष्टिक तत्वों के सेवन से इसे सुधारा जा सकता है।

डाॅ. एस धनंजय, क्लीनिकल साइकोलॉजिस्ट, जिला अस्पताल


15 से 25 वर्ष की उम्र में डिमेंशिया के खतरे के केस बढ़े हैं। दस में से दो से तीन ऐसे केस प्रतिदिन आ रहे हैं। नशा के कारणों में अपने एक बड़ी पीढ़ी को नशा करते देखना, दोस्तों के दबाव में आना, सोशल मीडिया में नशा के बढ़ते चलन से प्रभावित होना, हॉस्टल में अकेले रहना या माता-पिता के कामकाजी होने से बच्चों के साथ समय व्यतीत न करना पड़ा आदि हैं। यह उम्र दिमाग के विकास की होती है, लेकिन शराब की वजह से विकास रुक जाता है।
डॉ. निमिष गुप्ता, मनोरोग विशेषज्ञ
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