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लॉक डाउन में भूखे प्यासे सैकड़ों किमी की दूरी तय करने को मजबूर श्रमिक

Fri, 27 Mar 2020 03:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Fri, 27 Mar 2020 03:59 AM IST
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Groups of people on the way to their home in moradabad
रुद्रपुर जा रहे लोगों से पूछताछ... - फोटो : अमर उजाला

लॉकडाउन के दौरान इन दिनों सड़कों पर लोगों के जत्थे नजर आ रहे हैं। लोग पैदल की गुजर रहे हैं। हाथों में बैग और इनके कंधे पर छोटे छोटे बच्चे बैठे हैं। ये लोग कोरोना वायरस के खौफ में बंद की गई फैक्टरियों के श्रमिक और उनके परिजन हैं।

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बिहार और पूर्वांचल के जनपदों के अलावा गाजियाबाद, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब और हरियाणा के साथ साथ हरिद्वार, देहरादून आदि शहरों में रहकर मेहनत मजदूरी कर अपने और अपने परिवार का पालन पोषण करते हैं। लेकिन लॉक डाउन में फैक्टियां बंद होने से इनके सामने रोजी रोटी का संकट पैदा हो गया। इनके पास न तो काम बचा और न ही खाने पीने का सामान खरीदने के लिए पैसे। अब ये सभी अपने घरों को पलायन करने को मजबूर हैं। लोग पैदल ही भूखे प्यारे सैकड़ों किलोमीटर की दूरी तय रहे हैं।
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मुरादाबाद में दिल्ली रोड हो या कांठ रोड। इन सड़कों से गुजरने वाले लोगों का दर्द झकझोर देने वाला है। बिहार के भागलपुर निवासी विजय मंडल का कहना है कि वह परिवार के साथ हरिद्वार में रहकर मेहनत मजदूरी कर गुजर बसर कर रहे थे। कोरोना की वजह से ठेकेदार ने मकान निर्माण बंद करा दिया। उन्हें बिना पैसे दिए ही ठेकेदार चला गया। उसने फोन भी बंद कर लिया।
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हमारे सामने खाने पीने का संकट हो गया। लोगों से मदद मांगी तो उन्होंने भी हाथ खड़े कर दिए। घर लौटने के सिवा हमारे सामने कोई अन्य विकल्प ही नहीं बचा। सीतापुर के रहने वाले राजू ने बताया कि वह दिल्ली में मजदूरी करते थे। लॉक डाउन बंद होने की वजह वहां पुलिस वाले कहीं रुकने नहीं दे रहे हैं। बसें और ट्रेनें बंद हैं। जिसकी वजह से वह अपने घर पैदल ही लौट रहे हैं।

बिहार के मोतिहारी निवासी फुरकान का कहना है कि वह दिल्ली में ठेला चलाते हैं। लॉक डाउन की वजह से सब कुछ बंद हो गया। न काम मिल रहा और न ही कुछ पाने पीने को मिल रहा है। पुलिस की लाठियां खाने से अचछा है घर की चले जाएं। बलरामपुर निवासी गोपाल दास के परिवार में पांच सदस्य हैं। उनका कहना है कि वह गाजियाबाद में छोले भठूरे के ठेला लगाते थे।

सब कुछ बंद होने के बाद वह अपने घर लौट रहे हैं। उन्होंने बताया गया कि वह रोज दूसरों को खाना खिलाते थेए लेकिन अब वह खुद ही दो दिन से भूखे हैं। भूखे प्यारे ही पैदल ही चल रहे हैं। कुछ दिन में पहुंच ही जाएंगे।
दूसरे शहरों में फंसे लोगों को घर तक पहुंचने का मिले मौका
लॉक डाउन चौदह अप्रैल तक रहेगा। ऐसे में सबसे बड़ी समस्या उन लोगों के सामने है, जो अपने घरों से दूर दूसरों के घर में रुके हैं। प्रशासन की ओर से इन लोगों को उनके घर तक पहुंचने का मौका मिलना चाहिए। लाइन पार निवासी एक परिवार पिछले पांच दिन से दिल्ली में फंसा है। वो घर आने का प्रयास कर रहा है। लेकिन दिल्ली पुलिस उन्हें घरों में वापस कर देती है। ऐसे ही तमाम लोग दिल्ली व दूसरे जनपदों में फंसे हुए हैं।

ये लोग भी लौट रहे थे घर
शाहजहापुर निवासी कल्लू, वीरपाल, अनिल और शिव शंकर देहरादून में काम करते हैं। ये सभी काम बंद होने की वजह से घर लौटने लगे। बिहार के मोतिहारी निवासी विक्रम पाल छह माह से पंजाब में काम कर रहा था। पंद्रह दिन पहले वह वह छत से गिरकर घायल हो गया था। उसका हाथ टूट गया है। वह लोगों से चंदा कर अपने घर लौट रहा है। लखीमपुर निवासी अनिल, मुकेश, सुनील और राजपाल हरिद्वार में मजदूरी करते थे। पैदल ही अपने घर जा रहे हैं।

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