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कम फीस, आसान दाखिला...छात्रों को खींच लाया यूक्रेन
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भारत की तुलना में यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में एजुकेशन काफी सस्ती है। न तो दाखिले के लिए कोई कंप्टीशन और न ही नंबर प्रतिशत का दबाव है। यही वजह है कि देश के विभिन्न प्रदेशों के छात्र यूक्रेन में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे हैं। फिलहाल यूक्रेन में फंसे जिले के छात्रों के परिजन उनकी सलामती और वतन वापसी की दुआ कर रहे हैं।
देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस काफी अधिक है। अस्सी लाख से लेकर एक करोड़ तक फीस है। ये फीस हर अभिभावक वहन नहीं कर सकता है। इसके विपरीत यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई करीब 40 फीसदी कम है। इसके अलावा दाखिले के लिए कोई टेस्ट भी नहीं होता है। नंबर प्रतिशत भी दाखिले में आड़े नहीं आता है। कम फीस अभिभावकों की जेबों पर पड़ने वाले बोझ को कम कर देता है। दाखिले की आसान प्रक्रिया छात्रों की राहें भी आसान कर कर देती है। अभिभावक अधिक खर्च और छात्र कंप्टीशन से बच जाते हैं। यही दोनों वजह छात्रों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जैसे देशों में में खींच ले जाती है।
देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई अधिक महंगी है। यहां सत्तर से अस्सी लाख खर्च होते हैं। वह भी बहुत अच्छे मेडिकल कॉलेज नहीं होते हैं। यूक्रेन में चालीस से पचास लाख में ही पढ़ाई हो जाती है। - प्रदीप सक्सेना, अभिभावक
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देश में निजी मेडिकल कॉलेज की तुलना में यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में एजुकेशन सस्ती है। फीस में करीब दोगुने का अंतर है। नीट जैसी परीक्षा भी नहीं देनी होती है। नंबरों का भी कोई दबाव नहीं होता है। - डॉ. पल्लव अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ
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देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की फीस काफी अधिक है। अस्सी लाख से लेकर एक करोड़ तक फीस है। ये फीस हर अभिभावक वहन नहीं कर सकता है। इसके विपरीत यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई करीब 40 फीसदी कम है। इसके अलावा दाखिले के लिए कोई टेस्ट भी नहीं होता है। नंबर प्रतिशत भी दाखिले में आड़े नहीं आता है। कम फीस अभिभावकों की जेबों पर पड़ने वाले बोझ को कम कर देता है। दाखिले की आसान प्रक्रिया छात्रों की राहें भी आसान कर कर देती है। अभिभावक अधिक खर्च और छात्र कंप्टीशन से बच जाते हैं। यही दोनों वजह छात्रों को एमबीबीएस की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जैसे देशों में में खींच ले जाती है।
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देश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की पढ़ाई अधिक महंगी है। यहां सत्तर से अस्सी लाख खर्च होते हैं। वह भी बहुत अच्छे मेडिकल कॉलेज नहीं होते हैं। यूक्रेन में चालीस से पचास लाख में ही पढ़ाई हो जाती है। - प्रदीप सक्सेना, अभिभावक
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देश में निजी मेडिकल कॉलेज की तुलना में यूक्रेन के मेडिकल कॉलेजों में एजुकेशन सस्ती है। फीस में करीब दोगुने का अंतर है। नीट जैसी परीक्षा भी नहीं देनी होती है। नंबरों का भी कोई दबाव नहीं होता है। - डॉ. पल्लव अग्रवाल, नेत्र रोग विशेषज्ञ