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Moradabad News: जंग से ठिठके निर्यात पर अब चौतरफा महंगाई की मार
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मुरादाबाद। अमेरिकी टैरिफ में रियायत के बाद से लय में आ रहे मुरादाबाद के निर्यात कारोबार को ताजे अंतरराष्ट्रीय हालात से बड़ा झटका लगा है। इस्राइल-अमेरिका बनाम ईरान की जंग में अन्य देशों के दखल के कारण समूचा विदेशी बाजार ठिठक गया है। नए सौदे तो दूर, पुरानी डील को अंजाम पर पहुंचाना तक संभव नहीं हो पा रहा है। ऊपर से वॉर के वार ने महंगाई की चौतरफा मार बढ़ा दी है, जिससे भविष्य में भी कारोबारी चुनौतियां कायम रहेंगी। जंग के हालात थमने के बाद भी काम-कारोबार को महंगाई की मार से उबारना आसान नहीं होगा।
निर्यातक एवं हाईलैंड एक्सपोर्ट्स के पार्टनर सतीश धीर के मुताबिक यूएई और खाड़ी देशों पर युद्ध का असर मुरादाबाद ही नहीं, हमारे देशभर के कारोबार को प्रभावित कर रहा है। यूएई भारत के बड़े आयातकों (इंपोर्टर्स) में से एक है। इस क्षेत्र में कवर होने वाले देशों में ईद की उमंग के लिहाज से पूरे रमजान माह में मुरादाबाद के डेकोरेटिव उत्पादों की बड़ी मांग रहती है, लेकिन मौजूदा परिदृश्य के कारण इस रमजान में काम का सीजन पिट गया। यूएई के बंदरगाहों पर भी हमले से माल की आवाजाही भी अटक गई है। खर्चे बढ़ गए हैं।
विस्बा गिफ्ट वेयर एक्सपोर्ट्स के एमडी मोहम्मद अजीम बताते हैं कि ताजा स्थितियों में 20 फीट के कंटेनर पर दो हजार डॉलर प्रति कंटेनर की दर से वॉर सरचार्ज लगाया जा रहा है। 40 फीट के कंटेनर पर दोगुना यानी चार हजार डॉलर प्रति कंटेनर वॉर सरचार्ज है। जंग या किसी और आपातकाल में बीमा कंपनियां प्रीमियम बढ़ा देती हैं, जिससे शिपिंग और माल ढुलाई से जुड़ी अन्य एजेंसियां फ्रेट बढ़ाती हैं। यह महंगाई आने वाले दिनों तक कारोबार को प्रभावित करेगी।
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पैरागॉन मेटल्स के एमडी एवं लघु उद्योग भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय गुप्ता जिम्मी कहते हैं कि इन दिनों सभी समुद्री और हवाई रास्ते प्रभावित होने से जहाजों को बदले रास्तों से आगे बढ़ाया जा रहा है। जहाजों की री-रूटिंग से रास्ते लंबे हो गए। इससे और ईंधन की महंगाई से ढुलाई का खर्च काफी बढ़ गया है। दूसरी ओर, तमाम कंटेनर बंदरगाहों पर या री-रूटिंग के रास्तों में फंसने से भी निर्यात लागत कई गुना बढ़ती जा रही है।
इंडियन एक्स्पो मार्ट के डायरेक्टर एवं हैंडीक्राफ्ट बोर्ड के पूर्व वाइस चेयरमैन सुधीर त्यागी का कहना है कि कारोबार के लिहाज से यह काफी चुनौतीभरा वक्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का हर खर्च काफी बढ़ गया है। निर्यात ही नहीं, आयात के माल की आवाजाही का भी संकट है। इससे निर्यात उत्पादों के लिए जरूरी कच्चा माल काफी महंगा हो गया है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो ट्रेड के लिहाज से आने वाले दिन और चिंताजनक हो सकते हैं।
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पैकिंग मेटीरियल की कीमतें भी बढ़ीं
युद्ध के हालात से पैकिंग मेटीरियल की कीमतों में भी बड़ा इजाफा हुआ है। कारोबारी बताते हैं कि थर्माकोल जो कुछ समय पहले तक 160 रुपये किलो था, वह 220 रुपये किलो की दर पर पहुंच गया है। पॉलिथीन और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजें भी 25 से 40 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। कच्चे माल की महंगाई से पीतलनगरी के निर्यातक इस जंग से पहले से ही जूझ रहे थे। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ जाने के बाद मुरादाबाद में एल्युमीनियम-पीतल के कच्चे माल की उपलब्धता न के बराबर है। विदेशों से स्क्रैप के रूप में कच्चा माल आयात न हो पाने के कारण 220 से 240 रुपये प्रति किलो वाला एल्युमीनियम 280 रुपये प्रति किलो हो गया है। अब मुरादाबादी निर्यात उत्पादों में पीतल से ज्यादा एल्युमीनियम या अन्य धातुओं का प्रयोग हो रहा है।
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निर्यातक एवं हाईलैंड एक्सपोर्ट्स के पार्टनर सतीश धीर के मुताबिक यूएई और खाड़ी देशों पर युद्ध का असर मुरादाबाद ही नहीं, हमारे देशभर के कारोबार को प्रभावित कर रहा है। यूएई भारत के बड़े आयातकों (इंपोर्टर्स) में से एक है। इस क्षेत्र में कवर होने वाले देशों में ईद की उमंग के लिहाज से पूरे रमजान माह में मुरादाबाद के डेकोरेटिव उत्पादों की बड़ी मांग रहती है, लेकिन मौजूदा परिदृश्य के कारण इस रमजान में काम का सीजन पिट गया। यूएई के बंदरगाहों पर भी हमले से माल की आवाजाही भी अटक गई है। खर्चे बढ़ गए हैं।
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विस्बा गिफ्ट वेयर एक्सपोर्ट्स के एमडी मोहम्मद अजीम बताते हैं कि ताजा स्थितियों में 20 फीट के कंटेनर पर दो हजार डॉलर प्रति कंटेनर की दर से वॉर सरचार्ज लगाया जा रहा है। 40 फीट के कंटेनर पर दोगुना यानी चार हजार डॉलर प्रति कंटेनर वॉर सरचार्ज है। जंग या किसी और आपातकाल में बीमा कंपनियां प्रीमियम बढ़ा देती हैं, जिससे शिपिंग और माल ढुलाई से जुड़ी अन्य एजेंसियां फ्रेट बढ़ाती हैं। यह महंगाई आने वाले दिनों तक कारोबार को प्रभावित करेगी।
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पैरागॉन मेटल्स के एमडी एवं लघु उद्योग भारती के प्रदेश उपाध्यक्ष अजय गुप्ता जिम्मी कहते हैं कि इन दिनों सभी समुद्री और हवाई रास्ते प्रभावित होने से जहाजों को बदले रास्तों से आगे बढ़ाया जा रहा है। जहाजों की री-रूटिंग से रास्ते लंबे हो गए। इससे और ईंधन की महंगाई से ढुलाई का खर्च काफी बढ़ गया है। दूसरी ओर, तमाम कंटेनर बंदरगाहों पर या री-रूटिंग के रास्तों में फंसने से भी निर्यात लागत कई गुना बढ़ती जा रही है।
इंडियन एक्स्पो मार्ट के डायरेक्टर एवं हैंडीक्राफ्ट बोर्ड के पूर्व वाइस चेयरमैन सुधीर त्यागी का कहना है कि कारोबार के लिहाज से यह काफी चुनौतीभरा वक्त है। अंतरराष्ट्रीय स्तर का हर खर्च काफी बढ़ गया है। निर्यात ही नहीं, आयात के माल की आवाजाही का भी संकट है। इससे निर्यात उत्पादों के लिए जरूरी कच्चा माल काफी महंगा हो गया है। अगर हालात जल्द नहीं सुधरे तो ट्रेड के लिहाज से आने वाले दिन और चिंताजनक हो सकते हैं।
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पैकिंग मेटीरियल की कीमतें भी बढ़ीं
युद्ध के हालात से पैकिंग मेटीरियल की कीमतों में भी बड़ा इजाफा हुआ है। कारोबारी बताते हैं कि थर्माकोल जो कुछ समय पहले तक 160 रुपये किलो था, वह 220 रुपये किलो की दर पर पहुंच गया है। पॉलिथीन और पैकिंग में इस्तेमाल होने वाली अन्य चीजें भी 25 से 40 प्रतिशत तक महंगी हो गई हैं। कच्चे माल की महंगाई से पीतलनगरी के निर्यातक इस जंग से पहले से ही जूझ रहे थे। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल बढ़ जाने के बाद मुरादाबाद में एल्युमीनियम-पीतल के कच्चे माल की उपलब्धता न के बराबर है। विदेशों से स्क्रैप के रूप में कच्चा माल आयात न हो पाने के कारण 220 से 240 रुपये प्रति किलो वाला एल्युमीनियम 280 रुपये प्रति किलो हो गया है। अब मुरादाबादी निर्यात उत्पादों में पीतल से ज्यादा एल्युमीनियम या अन्य धातुओं का प्रयोग हो रहा है।