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औद्योगीकरण से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन चरम पर : प्रो. अनिल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 24 Oct 2024 04:23 AM IST
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Exploitation of natural resources has reached its peak due to industrialization: Prof. Anil
मुरादाबाद। औद्यौगीकरण की वजह से प्राकृतिक संसाधनों का दोहन चरम पर है। इसके कारण जल, जंगल और जमीन का संरक्षण एक बड़ी चुनौती है। लोग गांव छोड़कर शहरों की ओर पलायन कर रहे हैं। धरती की हरियाली खत्म हो रही है। भूमिगत जल स्तर दिन-प्रतिदिन तेजी से नीचे जा रहा है। इसे रोकने के लिए पौधे लगाकर उनका संरक्षण करना होगा। यह बातें पर्यावरणविद् डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने तीर्थंकर महावीर विश्वविद्यालय में कहीं।
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विश्वविद्यालय में इकोलॉजी एंड इकोनॉमी इन वन फुटस्टेप पर कार्यक्रम हुआ। पद्मश्री, पदमभूषण डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हम सरकार को दोषी ठहराते हैंं, जबकि सरकार के साथ धरती को स्वस्थ और सुंदर बनाने की जिम्मेदारी हम सबकी है। दुनिया में मात्र 31 फीसदी पेड़ बचे हैं। यह हमारे लिए चिंता का विषय है। इसमें भारत का आंकड़ा और चौंकाने वाला है।
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संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार भयावह पर्यावरण प्रदूषण और दूषित भोजन के चलते मानव रक्त में माइक्रोप्लास्टिक का प्रवेश हो चुका है। इस दौरान कुलपति वीसी प्रो. वीके जैन, कृषि के डीन प्रो. प्रवीन कुमार जैन, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. पंकज कुमार सिंह, प्रो. अमित कंसल आदि मौजूद रहे।
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पौधों पर देखे क्यूआर कोड
डॉ. अनिल प्रकाश जोशी ने विश्वविद्यालय परिसर में रेन वाटर हार्वेस्टिंग और सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट देखा। कृषि शोध फॉर्म में स्थित जैन वाटिका में पौधों पर क्यूआर कोड देखकर इसे अनूठी पहल बताया।

जैविक खेती को अपनाने का आह्वान
लीडरशिप टॉक में विद्यार्थियों ने कई तरह के सवाल जैसे मां गंगा को कैसे संरक्षित करें, प्राकृतिक खेती को कैसे बढ़ावा दें आदि पूछे। इस पर डॉ. अनिल जोशी ने कहा कि गंगा हमारी धमनियों में खून की तरह है। हम सबके संगठित होकर प्रयास करने पर मां गंगा को बचाया जा सकता है। केमिकल खेती का मोह छोड़ना होगा और जैविक खेती को अपनाना होगा।
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