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Moradabad News: दो हजार करोड़ के हस्तशिल्प निर्यात पर ईयूडीआर का अभी नहीं होगा वार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Wed, 23 Oct 2024 04:29 AM IST
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EUDR will not attack handicraft exports worth two thousand crores yetEUDR will not attack handicraft exports worth two thousand crores yet
मुरादाबाद। मुरादाबाद के करीब दो हजार करोड़ से अधिक के लकड़ी हस्तशिल्प निर्यात पर ईयूडीआर कानून का वार अभी एक साल के लिए टल गया है। ईयूडीआर कानून अब 31 दिसंबर 2025 के बाद लागू होगा। इससे यूरोपीय देशों में लकड़ी के सामानों को निर्यात करने वाले शहर के छोटे-बड़े साै से अधिक निर्यातकों को बड़ी राहत मिली है। अगर ईयूडीआर कानून लागू होता तो छोटे निर्यातकों के कारोबार पर संकट आ सकता था।
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हस्तशिल्प निर्यात से जिले के छोटे-बड़े करीब 2400 निर्यातक जुड़े हैं। जिले से हर साल औसतन 8000 से 9000 करोड़ रुपये का निर्यात होता है। वहीं साै से अधिक निर्यातक ऐसे हैं, जो पीतल के बने उत्पादों के साथ-साथ लकड़ी के उत्पादों का भी यूरोपीय देशों में निर्यात करते हैं। जिले की कुल निर्यात में लकड़ी हस्तशिल्प की हिस्सेदारी करीब तीस फीसदी है। यूरोपीय संघ वन-कटान-मुक्त विनियमन (ईयूडीआर) कानून 31 दिसंबर 2024 को लागू होने वाला था, लेकिन हाल ही में हुई यूरोपीय संघ की बैठक में इस कानून को 31 दिसंबर 2025 तक के लिए स्थगित कर दिया गया। क्योंकि बैठक के दौरान अमेरिका और चीन ने इस कानून का पालन करने से मना कर दिया। क्योंकि इस कानून के लागू होने के बाद निर्यातकों को आम व बबूल की लकड़ी से बने उत्पाद निर्यात करने में परेशानी का सामना करना पड़ता। इसके चलते मुरादाबाद के लकड़ी के हस्तशिल्प निर्यातक असमंजस में थे। इस कानून के लागू नहीं होने से जिले के निर्यातकों को काफी राहत मिली है। मुरादाबाद जिले से कुल निर्यात का 30 प्रतिशत हस्तशिल्प उत्पाद केवल लकड़ी का किया जाता है। इसमें बबूल, आम, शीशम की लकड़ी आदि के हस्तशिल्प उत्पाद शामिल हैं।
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कानून में ये हैं प्रावधान

- ईयूडीआर कानून के तहत निर्यातक को उत्पाद के साथ चेन ऑफ कस्टडी व एफएससी सर्टिफिकेट भी देना होगा। इसके तहत जंगल या लकड़ी, पार्टिकल बोर्ड, प्राईवुड, कार्टन आदि से बने हस्तशिल्प उत्पाद की वैधता की जांच के बाद ही यूरोप में एंट्री मिल सकती थी। इसके लिए निर्यातक को पेड़ के जियो टैग के साथ अन्य कागजात तैयार कराना अनिवार्य है।
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एक साल के लिए राहत

- एमएचईए अध्यक्ष नवेदुर्रहमान ने बताया कि ईयूडीआर लागू हो जाने से जिले के निर्यातकों को काफी समस्याओं का सामना करना पड़ता। लेकिन अब इसे एक साल के लिए टाल दिया गया है। इससे लकड़ी का सामान निर्यात करने वालों को राहत मिलेगी।

इन यूरोपीय देश में होता है निर्यात

- मुरादाबाद से फ्रांस, जर्मनी, आयरलैंड, इटली, हंगरी, पुर्तगाल, रोमानिया, स्पेन, स्वीडन आदि यूरोपीय देशों में लकड़ी के हस्तशिल्प उत्पादों का निर्यात किया जाता है।



- अमेरिका और चीन ने ईयूडीआर कानून का विरोध किया। इसके कारण इस कानून को यूरोपीय देशों द्वारा लागू नहीं किया गया। अगर यह कानून लागू हो जाता तो हर पेड़ का जियो टैगिंग देना असंभव हो जाता।- तीव्र गुप्ता, डायरेक्टर, सीएल गुप्ता एक्सपोर्ट्स एलटीडी


- मैं एल्यूमिनियम के साथ लकड़ी के हस्तशिल्प उत्पाद को निर्यात करता हूं। शीशम के हस्तशिल्प उत्पाद के लिए कुछ कागजात बनवाने ही पड़ते हैं। कानून लागू होने पर पेड़ की जियो टैगिंग कर वेरिफाई करने के लिए काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ता।- अमित चौधरी, डायरेक्टर, आईकॉन इंटरनेशनल
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