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अपने पुराने स्वरूप में लौटेगी रामगंगा नदी : मंडलायुक्त
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मुरादाबाद। रामगंगा नदी किनारे हुए अवैध कब्जे, अतिक्रमण को लेकर मंडलायुक्त ने नगर निगम, सिंचाई सहित कई विभागीय अधिकारियों के साथ वर्चुअल मीटिंग कर नाराजगी जताई। उन्होंने संबंधित विभागों से सर्वे कर नदी किनारे अपनी जमीन पर हुए अवैध कब्जों का रिकॉर्ड तैयार बनाने व निशानदेही करने के निर्देश दिए। जिलाधिकारी से कहा कि संबंधित विभागीय अधिकारियों की बैठक कर अवैध कब्जे हटाने की कार्ययोजना तैयार कर उन्हें भेजी जाए। मंडलायुक्त ने कहा कि नदी को पुराने स्वरूप में लाने के लिए इस मसले पर तीन चरणों में काम होगा।
मंडलायुक्त आंजनेय कुमार की वर्चुअल बैठक में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह भी शामिल रहे। इसके अलावा नगर आयुक्त संजय चौहान सहित सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण विभाग, राजस्व विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। मंडलायुक्त ने विभागीय अधिकारियों से इस बात पर नाराजगी जताई कि रामगंगा नदी किनारे अवैध कब्जे हो रहे हैं, पशुओं का जमावड़ा है। गंदगी पसरी है। गोबर नदी में बहाया जाता है। इससे नदी का असतित्व ही खतरे में है, लेकिन इन सब के बावजूद संबंधित विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। बकौल मंडलायुक्त नगर आयुक्त ने बताया कि निगम ने अतिक्रमण हटाया था। कई अवैध मकान को ध्वस्त किया गया था, लेकिन कुछ लोगों ने फिर कब्जा कर लिया।
मंडलायुक्त के अनुसार, उन्हें लगा कि नदी किनारे अतिक्रमण को लेकर विभाग गंभीर नहीं है, इसलिए अब इसे लेकर गंभीरता से काम होगा। यहां पर 2012 में बाढ़ आ चुकी हैं। पिछले साल भी पानी काफी आगे तक आ गया था। मंडलायुक्त ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से कहा कि वे संबंधित विभागों से रामगंगा नदी किनारे एक सर्वे कराकर यह रिकॉर्ड तैयार कराएं कि वहां किस विभाग की कितनी जमीन पर अवैध कब्जे हैं। उन्हें चिह्नित कर वहां पर पक्के निशान लगाए जाएं।
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इसके बाद जिलाधिकारी सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करें और अवैध कब्जे हटाने की कार्ययोजना तैयार कर उन्हें भेजें। मंडलायुक्त ने बताया कि रामगंगा किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए तीन चरणों में काम करना होगा। पहला अवैध अतिक्रमण का चिह्नांकन और कब्जे हटाना, दूसरा रामगंगा में गंदगी और ई-कचरा आदि डालने वालों पर कार्रवाई और इसके बाद रामगंगा के स्वरूप को कायम कर उसे पुर्नजीवित करने पर काम होगा।
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मंडलायुक्त आंजनेय कुमार की वर्चुअल बैठक में जिलाधिकारी शैलेंद्र कुमार सिंह भी शामिल रहे। इसके अलावा नगर आयुक्त संजय चौहान सहित सिंचाई, बाढ़ नियंत्रण विभाग, राजस्व विभाग के अधिकारी भी इसमें शामिल हुए। मंडलायुक्त ने विभागीय अधिकारियों से इस बात पर नाराजगी जताई कि रामगंगा नदी किनारे अवैध कब्जे हो रहे हैं, पशुओं का जमावड़ा है। गंदगी पसरी है। गोबर नदी में बहाया जाता है। इससे नदी का असतित्व ही खतरे में है, लेकिन इन सब के बावजूद संबंधित विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहे। बकौल मंडलायुक्त नगर आयुक्त ने बताया कि निगम ने अतिक्रमण हटाया था। कई अवैध मकान को ध्वस्त किया गया था, लेकिन कुछ लोगों ने फिर कब्जा कर लिया।
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मंडलायुक्त के अनुसार, उन्हें लगा कि नदी किनारे अतिक्रमण को लेकर विभाग गंभीर नहीं है, इसलिए अब इसे लेकर गंभीरता से काम होगा। यहां पर 2012 में बाढ़ आ चुकी हैं। पिछले साल भी पानी काफी आगे तक आ गया था। मंडलायुक्त ने बताया कि उन्होंने जिलाधिकारी से कहा कि वे संबंधित विभागों से रामगंगा नदी किनारे एक सर्वे कराकर यह रिकॉर्ड तैयार कराएं कि वहां किस विभाग की कितनी जमीन पर अवैध कब्जे हैं। उन्हें चिह्नित कर वहां पर पक्के निशान लगाए जाएं।
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इसके बाद जिलाधिकारी सभी संबंधित विभागीय अधिकारियों के साथ बैठक करें और अवैध कब्जे हटाने की कार्ययोजना तैयार कर उन्हें भेजें। मंडलायुक्त ने बताया कि रामगंगा किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए तीन चरणों में काम करना होगा। पहला अवैध अतिक्रमण का चिह्नांकन और कब्जे हटाना, दूसरा रामगंगा में गंदगी और ई-कचरा आदि डालने वालों पर कार्रवाई और इसके बाद रामगंगा के स्वरूप को कायम कर उसे पुर्नजीवित करने पर काम होगा।