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Moradabad News: रामपुर रोड पर रामगंगा किनारे विकसित होगा ईको टूरिज्म, रिवरफ्रंट भी बनेंगे

Wed, 03 Jul 2024 05:06 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Wed, 03 Jul 2024 05:06 AM IST
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Eco tourism will be developed on the banks of Ramganga on Rampur Road, riverfront will also be built.
मुरादाबाद। शासन से मास्टर प्लान-2031 को मंगलवार को मजूरी मिलने के साथ शहर के चौतरफा विकास के रास्ते भी खुल गए हैं। पीतलनगरी की चमक को और बढ़ाने के लिए एमडीए करीब 18 हजार करोड़ रुपये की 45 परियोजनाओं पर काम करेगा। रामपुर रोड पर रामगंगा किनारे ईको टूरिज्म का जहां विकास होगा, वहीं शहर की नदियों पर रिवरफ्रंट भी बनेंगे। दिल्ली रोड व्यावसायिक हब के रूप में विकसित किया जाएगा। आर्टिजन के लिए 200 एकड़ में हस्तशिल्प ग्राम, मेगा टाउनशिप के साथ औद्योगिक, लॉजिस्टिक पार्क की भी व्यवस्था रहेगी। उद्यमियों की मांग को पूरा करते हुए शहर के सभी प्रवेश मार्गों के पास औद्योगिक क्षेत्र होगा। मुख्य मार्गों पर स्थित आवासीय क्षेत्रों में बाजार स्ट्रीट का प्रावधान भी किया गया है, जिससे संबंधित क्षेत्रों में रहने वाले लोग अपने भवन के भूतल को व्यावसायिक रूप में उपयोग कर सकेंगे और उसके ऊपर आवास बनाकर रह सकेंगे।
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आवास एवं शहरी नियोजन विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. नितिन रमेश गोकर्ण की ओर से जारी शासनादेश एमडीए कार्यालय को मंगलवार दोपहर प्राप्त हो गया। इसी के साथ करीब चार वर्षों से अधिक समय से मास्टर प्लान को लेकर की जा रही मैराथन प्रक्रिया का भी पटाक्षेप हो गया।
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वर्ष 2019-20 से स्थलीय जीआईएस सर्वे का कार्य प्रारंभ होने के बाद, पहला ड्राफ्ट जनवरी-2022 में प्रकाशित किया गया था। इसके बाद निर्यातकों, उद्यमियों, शिक्षाविदों, जनप्रतिनिधियों समेत विभिन्न शासकीय विभागों के साथ प्राधिकरण द्वारा कई मीटिंगों का आयोजन किया गया। जून 2022 के समय जनसामान्य से आपत्ति, सुझाव मांगे गए। जिनका निस्तारण करने के बाद नवंबर 2022 में प्राधिकरण बोर्ड द्वारा महायोजना का अंतिम ड्राफ्ट अनुमोदित किया गया। जनवरी 2023 व फरवरी 2024 में शासन स्तर पर दो बार उपाध्यक्ष द्वारा मास्टर प्लान का प्रस्तुतीकरण शासकीय समिति को किया गया। शासकीय समिति के तकनीकी सुझावों का समायोजन करते हुए प्राधिकरण बोर्ड द्वारा महायोजना को मार्च-2024 में स्वीकृति के लिए भेजा गया था। आम चुनावों के कारण मुख्यमंत्री के समक्ष महायोजना का प्रस्तुतीकरण जून 2024 में हुआ। जिस पर हरी झंडी मिलने के बाद शासन द्वारा अब स्वीकृति जारी की गई है। वीसी शैलेष कुमार ने शासन से इसकी जानकारी मिलने के बाद एमडीए सभागार में प्रेसवार्ता कर इसकी विस्तार से जानकारी दी और इससे होने वाले लाभ के बारे में बताया।
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वीसी ने बताया कि मुरादाबाद मास्टर प्लान-2031 में विकास क्षेत्र की कुल जनसंख्या 16.66 लाख आंकी गई है। महायोजना में करीब 16,416 हेक्टेयर नगरीय क्षेत्र को चिह्नित किया गया है। जिसमें करीब 37 प्रतिशत क्षेत्र आवासीय, 15 प्रतिशत से अधिक औद्योगिक, करीब 17 प्रतिशत हरित पट्टी, हरित क्षेत्र, पार्क, यातायात, परिवहन के लिए लगभग 12.5 प्रतिशत, 6.6 प्रतिशत सामुदायिक सुविधाओं के लिए, करीब तीन प्रतिशत क्षेत्र व्यावसायिक गतिविधियों के लिए रखा गया है।

मुरादाबाद के लिए तीसरी महायोजना
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) की स्थापना वर्ष 1981 में हुई थी, जबकि 1995 में नगर निगम क्षेत्र घोषित किया गया। पहली महायोजना 1985 में लागू हुई थी जो 2001 तक प्रभावी थी। दूसरी महायोजना 2021 तक के लिए वर्ष 2013 में लागू हुई थी जो अभी तक प्रभावी थी। मंगलवार को तीसरी महायोजना 2031 लागू हो गई।

530 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है एमडीए का दायरा
स्थापना के समय प्राधिकरण के मूल विकास क्षेत्र में नगर निगम एरिया समेत कुल 180 राजस्व ग्राम शामिल थे। तब इसका विकास क्षेत्र लगभग 383 वर्ग किमी में फैला हुआ था। हाल ही में शासन ने प्राधिकरण क्षेत्र में 71 नए गांवों को जोड़े जाने की मंज़ूरी भी दी गई है। इससे प्राधिकरण का विकास क्षेत्र बढ़कर लगभग 530 वर्ग किमी हो जाएगा।
महायोजना: 2031 में खास
- 60 मीटर चौड़ा एनएचएआई रिंग रोड दिल्ली रोड, कांठ रोड, रामपुर रोड को जोड़ेगा।
- एसईजेड को नगर के इंडस्ट्रियल हब से जोड़ने के लिए 36 मीटर चौड़ी मास्टर प्लान रोड व इंडस्ट्रियल कॉरिडोर।
- 200 एकड़ क्षेत्र में हस्तशिल्प ग्राम।
- मेगा एमएसएमई क्लस्टर का प्रस्ताव।
- नॉलेज सिटी तथा मेडीसिटी की व्यवस्था।
- रामगंगा के किनारे ईको टूरिज्म व नेचर पार्क।
- नदियों के किनारे रिवरफ्रंट।
- औद्योगिक आवश्यकताओं के लिए कौशल विकास केंद्र।
- औद्योगिक व लॉजिस्टिक पार्कों की व्यवस्था।
- नगर में तीन स्थानों (संभल रोड, रामपुर रोड व निर्माणाधीन बाईपास रोड) पर ट्रक, बस टर्मिनल की व्यवस्था।
- आवासीय आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए मेगा टाउनशिप की परियोजना।
- स्पोर्ट्स सिटी, आयुष पार्क व शुगरकेन प्रोसेसिंग क्लस्टर।
- ऑडिटोरियम व कन्वेंशन सेंटर का प्रस्ताव।
- 18 हजार करोड़ की 45 परियोजनाओं पर होगा अगले दस वर्षों में काम।
- मुख्य मार्गों पर आवासीय क्षेत्रों में बाजार स्ट्रीट का प्रावधान।

- दिल्ली रोड पर व्यावसायिक हब की प्लानिंग।
- काँठ रोड, बरेली-दिल्ली बाईपास, रामपुर रोड सहित मौजूदा ट्रेंड के आधार पर औद्योगिक क्षेत्र में वृद्धि।
- नदियों व मुख्य मार्गों के किनारे ग्रीन बेल्ट।
- मछली मंडी व पशु मंडी को शहर के बाहर ले जाने की व्यवस्था।

निवेश में वृद्धि के साथ रोजगार के नए अवसर होंगे सृजित: वीसी
नया मास्टर प्लान शहर में निवेश में वृद्धि के साथ साथ रोजगार के नए अवसर सृजित करेगा। मुरादाबाद मास्टर प्लान -2031 को मुरादाबाद विजन प्लान (सिटी डेवलपमेंट प्लान-2051) के साथ एकरूपता स्थापित करते हुए बनाया गया है। पीतल उद्योग को बढ़ावा देने के लिए जहां औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार किया गया है, वहीं हस्तशिल्प कारीगरों के लिए हस्तशिल्प ग्राम की भी व्यवस्था की गई है। यह बात एमडीए वीसी शैलेष कुमार ने एमडीए सभागार में पत्रकारों से वार्ता में कही।
उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान निर्माण में शहर के जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, निर्यातकों, आर्किटेक्टों, अधिवक्ताओं, मीडियाकर्मियों व आमजन के साथ सभी सरकारी विभागों का सहयोग व सुझाव एमडीए को मिला है। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह के निर्देशन में मास्टर प्लान को जनहित में दिशा देने का काम किया गया है। इसके लागू हो जाने से चौतरफा विकास के रास्ते खुलेंगे। शहर में विविध आर्थिक गतिविधियों, नदियों व जलीय संरचनाओं के विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने तथा आमजन को सहूलियत देने की कई योजनाओं को इसमें शामिल किया गया है। जीआईएस आधारित महायोजना से नक्शे पास होने व नई प्लानिंग में जहां सुविधा होगी वहीं अवैध निर्माणों पर भी अंकुश लगेगा।


आर्किटेक्टों की नजर में मास्टर प्लान: 2031
मास्टर प्लॉन: 2031 में उद्यमियों के लिए औद्योगिक पार्क, औद्योगिक क्षेत्र भरपूर है। अगले दस सालों की जनसंख्या को ध्यान में रखते हुए सभी दिशाओं में आवासीय, व्यावसायिक तथा संस्थागत भू-उपयोग का विस्तार किया गया है। पुराने औद्योगिक क्षेत्र लाकड़ी फाजलपुर क्षेत्र से एक मार्ग प्रस्तावित किया गया है जो शहर के एसईजेड को सीधा जोड़ेगा। साथ ही उसके दोनों तरफ 500 मीटर क्षेत्र का भू-उपयोग उद्योग के लिए प्रस्तावित किया गया है।


पराग अग्रवाल, आर्किटेक्ट

मास्टर प्लान में औद्योगिक, आवासीय व व्यावसायिक उपयोग का बहुत अच्छा समावेश किया गया है। दिल्ली रोड पर गांगन नदी तक बाईं ओर पूरा औद्योगिक भू-उपयोग है। संभल, चंदौसी रोड पर समुचित औद्योगिक क्षेत्र दिया गया है। लेकिन कुछ कमियां भी हैं। जैसे रामगंगा नदी के दूसरी तरफ बहुत कम भू-उपयोग दिखाया गया है। जबकि शहर के लोगों को लखनऊ के गोमती नदी और अहमदाबाद में साबरमती नदी के दोनों ओर किए गए विस्तृत विकास की तरह यहां भी उम्मीद थी।

वाईपी गुप्ता, आर्किटेक्ट
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