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Moradabad News: दानपत्र खारिज, पुत्र को पिता की संपत्ति लौटाने का आदेश

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 07 Dec 2024 02:20 AM IST
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Donation letter rejected, order to return father's property to son
मुरादाबाद। अपने पुत्र को दान में दी गई अचल संपत्ति को रेलवे से सेवानिवृत्त पिता ने कोर्ट में वाद दायर कर खारिज करा दिया। साथ ही मृतक मां के जेवरात भी वापस किए जाने के आदेश एसडीएम कांठ की अदालत ने दिए हैं। मामला कांठ थाना क्षेत्र के मोहल्ला महमूदपुर निवासी रमेश चंद्र लोहिया का है। उन्होंने सीनियर सिटीजन मेंटिनेंस एंड वेलफेयर एक्ट का हवाला देते हुए कोर्ट में अपील की थी, जिसके आधार पर निर्णय हुआ है।
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रमेश चंद्र लोहिया का दावा है कि यदि संतान उनकी देखरेख नहीं कर रही है हो तो इस एक्ट में अपनी संतान को दी गई संपत्ति वापस लेने का अधिकार माता-पिता को है। लोहिया ने 29 अप्रैल 2022 को अपनी चल-अचल संपत्ति का दान अपने बड़े बेटे राजीव लोहिया के हक में किया था। इसके बाद उन्होंने एसडीएम कांठ की अदालत में दावा पेश किया कि बेटे ने उन्हें धोखा देकर रजिस्ट्री गिफ्ट करा ली है। जबकि वास्तविकता में बेटा उनका ध्यान नहीं रखता और न ही उसने अपनी मां की मौत पर अंतिम संस्कार किया था। रमेश चंद ने अपने दावे में कहा कि बेटे राजीव ने अपने कारोबार के लिए तीस लाख रुपये और मां के जेवरात भी धोखा देकर ले लिए थे। इस मामले में अदालत ने 25 अक्तूबर 2023 को आदेश पारित करते हुए दानपत्र खारिज कर दिया था और पिता की संपत्ति लौटाने का आदेश दिया था। इसके बाद राजीव लोहिया इलाहबाद हाईकोर्ट गए, जहां से पत्रावली पुनः सुनवाई के लिए एसडीएम कांठ के पास आई।
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हाईकोर्ट ने कहा कि इसमें राजीव का पक्ष भी सुना जाए। राजीव लोहिया ने अदालत को बताया कि उसके अन्य तीन भाइयों ने पिता को भड़काया है। इस कारण वह दानपत्र खारिज करा रहे हैं। उन्होंने पूरी निष्ठा से पिता की सेवा करने का दावा किया। दोनों पक्षों की वार्ता के दौरान पिता रमेश चंद लोहिया ने दानपत्र को खारिज करने और दी गई संपत्ति वापस करने की मांग अदालत से की। इस पर दोबारा एसडीएम कोर्ट ने पूर्व पारित आदेश को यथावत रखा है और पुत्र राजीव लोहिया को आदेश दिया है कि वह दान में प्राप्त अचल संपत्ति को वापस करें। साथ ही जो राशि रमेश चंद लोहिया से प्राप्त की है वो भी वापस करें।
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हाईकोर्ट में याचिका दायर
- राजीव लोहिया का कहना है कि पिता ने अपनी इच्छा से संपत्ति उनके नाम की थी। एसडीएम कोर्ट में पहले उनका पक्ष सुना नहीं गया फिर सुप्रीम कोर्ट की नियमावली को दरकिनार करते हुए आदेश जारी कर दिया गया। उन्होंने हाईकोर्ट में याचिका दायर की है, जिसकी तारीख जल्द ही लगेगी।
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