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Moradabad News: डीजल पर महंगाई से निर्यातकों पर हर महीने बढ़ा 87 लाख रुपये का बोझ

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 18 May 2026 02:08 AM IST
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Diesel prices increase the burden on exporters by Rs 87 lakh every month.
मुरादाबाद। डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर अब जिले के निर्यात कारोबार पर साफ दिखाई देने लगा है। फैक्टरियों में बिजली की लगातार ट्रिपिंग के कारण जनरेटर का इस्तेमाल किया जाता है। डीजल की बढ़ी कीमतों के कारण निर्यातकों पर हर माह करीब 87 लाख रुपये का अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। निर्यातकों का कहना है कि डीजल के दाम तीन रुपये प्रतिलीटर बढ़ने से बड़े निर्यातक को महीने में औसतन करीब 35 हजार रुपये तक का अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ेगा।
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जिले की फैक्टरियों में औसतन प्रतिदिन करीब दो घंटे बिजली की ट्रिपिंग होती है। उत्पादन कार्य बाधित न हो, इसके लिए फैक्टरी संचालकों को जनरेटर चलाने पड़ते हैं। जनरेटर संचालन में डीजल की खपत अधिक होने के कारण उत्पादन लागत बढ़ रही है। निर्यातकों का कहना है कि बिजली गुल होने पर पूरी सप्लाई चेन प्रभावित होती है। कच्चे माल को तैयार करने से लेकर पैकिंग तक की मशीनों को चालू रखने के लिए जनरेटर ही एकमात्र विकल्प बचता है।
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जिले में हस्तशिल्प उत्पाद की 250 से अधिक बड़ी फैक्टरियां हैं। इनमें हस्तशिल्प उत्पादों को तैयार किया जाता है। निर्यातकों का कहना है कि दो दिन पहले डीजल 88.32 रुपये प्रतिलीटर मिलता था लेकिन अब इसकी कीमत 91.33 रुपये प्रतिलीटर है। डीजल के दाम बढ़ने से बड़ी फैक्टरियों पर करीब 35 हजार रुपये प्रतिमाह आर्थिक बोझ बढ़ गया है। इसकी वजह से हस्तशिल्प उत्पाद भी महंगा हो जाएगा। हमारी सरकार से मांग है कि डीजल खरीद पर छूट प्रदान की जाए। इसके साथ ही सब्सिडी की व्यवस्था की जाए।
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निर्यातक बोले
-दिन में कई बार बिजली की ट्रिपिंग होती है। इसकी वजह से जनरेटर का इस्तेमाल करना पड़ता है। डीजल के दाम बढ़ने की वजह से महीने में करीब 35 हजार रुपये अतिरिक्त बोझ बढ़ जाएगा। परिवहन का किराया भी बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। हालांकि अभी परिवहन का किराया बढ़ने की कोई लिस्ट नहीं आई है। -काजी शौकत हुसैन, निर्यातक
-दिनभर में दो घंटे बिजली की ट्रिपिंग होती है। अगर कोई फॉल्ट हो जाता है तो इसे ठीक कराने में कई घंटे लग जाते हैं। इस दौरान अधिक क्षमता वाले जनरेटरों को चलाने में भारी मात्रा में डीजल फूंकना पड़ता है। डीजल के दाम बढ़ने पर हर महीने करीब 30 से 40 हजार रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ेगा। अगर बिजली ठीक आने लगे तो निर्यातकों पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। -सतपाल, निर्यातक व सचिव, दि हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन

-पश्चिमी एशिया में युद्ध की वजह से निर्यातक पहले से प्रभावित हैं। अब डीजल का दाम बढ़ने की वजह से अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है। सरकार से हमारी मांग है कि निर्यातकों को डीजल पर छूट प्रदान करे। इसके साथ ही परिवहन का किराया बढ़ने का अनुमान लगाया जा रहा है। -नावेद उर रहमान, निर्यातक व अध्यक्ष, एमएचईए
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